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दुश्मन की नजर से बचकर करेगी न्यूक्लियर अटैक... अमेरिका की नई LRSO मिसाइल की सामने आई तस्वीर, रूस-चीन की बढ़ी टेंशन!

USA AGM-181 LRSO: जून 2025 में LRSO की पहली तस्वीर सामने आई, जिसमें यह B-52 बॉम्बर के नीचे लटकी दिख रही थी. यह तस्वीर कैलिफोर्निया में एक प्लेनस्पॉटर ने खींची थी

अमेरिका की नई AGM-181 LRSO मिसाइल इन दिनों चर्चा में है. इसे पेंटागन गुप्त रख रहा था, लेकिन कैलिफोर्निया में एक प्लेनस्पॉटर ने पहली बार इसकी तस्वीर ली. यह मिसाइल दूर से न्यूक्लियर हमला करने में सक्षम है और पुरानी AGM-86B को बदलने जा रही है. स्टेल्थ तकनीक से बनी यह मिसाइल दुश्मन की नजर से बचकर चुपचाप वार कर सकती है, जो इसे बेहद खास बनाती है.

LRSO में क्या है खास?
AGM-181 LRSO एक एयर-लॉन्च्ड क्रूज मिसाइल है, जिसे लंबी दूरी से हमला करने के लिए तैयार किया गया है. यह न्यूक्लियर वॉरहेड ले जाती है, यानी लड़ाकू विमान को लक्ष्य के पास ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती. मिसाइल खुद दुश्मन के भीतर गहराई तक जाकर हमला कर सकती है और इस पूरी प्रक्रिया में बमवर्षक विमान बिल्कुल सुरक्षित रहता है.

स्टेल्थ तकनीक-रडार को धोखा देने की क्षमता
LRSO को इस तरह डिजाइन किया गया है कि रडार इसे आसानी से पकड़ न सके. इसकी बॉडी का रडार सिग्नल बहुत कम है, पंख उड़ान के दौरान खुलते हैं और नीचे की तरफ एक वर्टिकल टेल लगाया गया है जो रडार पर इसकी छवि को और भी कम कर देता है. इस वजह से यह मिसाइल दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देते हुए अपने लक्ष्य तक पहुंच सकती है.

आकार, रेंज और तकनीकी क्षमता
यह मिसाइल लगभग 6.4 मीटर लंबी और 0.62 मीटर चौड़ी है, आकार में एक छोटी कार जितनी. वजन लगभग 1,360 किलो है, जो पुरानी AGM-86 मिसाइल के बराबर है. इसकी रेंज 2,500 किलोमीटर से भी अधिक है- इतना कि यह एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक हमले की क्षमता रखती है. यह मिसाइल सबसोनिक गति, यानी लगभग 850 किमी/घंटा की रफ्तार से उड़ती है और W80-4 न्यूक्लियर वॉरहेड ले सकती है, जिसकी शक्ति 5 से 150 किलोटन तक बदली जा सकती है. 150 किलोटन पर यह हीरोशिमा बम से लगभग 10 गुना अधिक ताकतवर हमला कर सकती है. मार्गदर्शन के लिए इसमें इनर्शियल सिस्टम के साथ GPS और TERCOM का इस्तेमाल होता है, जिससे यह रास्ता बदलते हुए भी लक्ष्य पर सटीक प्रहार कर सकती है.

तस्वीर लीक होने के बाद पहली बार दिखी मिसाइल
जून 2025 में LRSO की पहली तस्वीर सामने आई, जिसमें यह B-52 बॉम्बर के नीचे लटकी दिख रही थी. यह तस्वीर कैलिफोर्निया में एक प्लेनस्पॉटर ने खींची थी. इसके बाद पहली बार लोग इस मिसाइल का वास्तविक रूप देख पाए, क्योंकि पेंटागन इसे अब तक बेहद गोपनीय रख रहा था.

कब होगी युद्ध के लिए तैयार?
यह मिसाइल अभी परीक्षण चरण में है और उम्मीद है कि 2030 तक पूरी तरह सेवा में शामिल हो जाएगी. शुरुआत में इसे B-52 बॉम्बर से लॉन्च किया जाएगा और बाद में यह अमेरिका के नए स्टेल्थ बॉम्बर B-21 Raider पर भी तैनात होगी. ट्रंप सरकार के समय इसके विकास को गति मिली थी और इसका पहला कॉन्ट्रैक्ट 2020 में रिथियन कंपनी को मिला था.

रूस और चीन के लिए बड़ा संदेश
अमेरिका इस मिसाइल को अपने न्यूक्लियर डिटरेंस को मज़बूत करने के साधन के रूप में देख रहा है. पेंटागन के अनुसार LRSO रूस और चीन की बढ़ती मिसाइल क्षमता का मजबूत जवाब है. यह न सिर्फ अमेरिका की रणनीतिक ताकत बढ़ाती है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि किसी भी हमले का जवाब देने के लिए अमेरिका हर समय तैयार है.

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