लाठीचार्ज मामला: गिरफ्तारी के संबंध में उपेंद्र कुशवाहा और पुलिस के दावे अलग अलग
पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि वह गिरफ्तारी देने आए थे लेकिन पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया. हालांकि पुलिस का कहना है कि उन्हें गिरफ्तार किया गया था और बाद में निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया.

पटना: कोतवाली में शनिवार को नाटकीय घटनाक्रम तब देखने को मिला जब आरएलएसपी प्रमुख और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने यहां कहा कि वह गिरफ्तारी देने आए थे लेकिन पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया. हालांकि पुलिस का कहना है कि उन्हें गिरफ्तार किया गया था और बाद में निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया.
राष्ट्रीय लोक समता पार्टी प्रमुख अपने 200 समर्थकों के साथ पुलिस थाना पहुंचे थे. पार्टी कार्यकर्ताओं का का कहना था कि पिछले सप्ताह पुलिस बल के साथ हुई झड़प के मामले में उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए. कुशवाहा ने बीजेपी के साथ अपने संबंध खत्म करते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल से 10 दिसंबर को इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने प्रधानमंत्री पर मंत्रिमंडल को रबड़ की मुहर बना देने का आरोप लगाया था.
पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार आज मेरे साथ हजारों साथी कोतवाली थाना पहुंचे लेकिन पुलिस ने गिरफ्तार करने से मना कर दिया और बिना जमानत जाने के लिए कहा ।
पुलिस के इस रवैये से स्पष्ट है कि मुकदमा पूर्णतः झुठा है। अतः राज्य सरकार को अविलंब मुकदमा वापस लेना चाहिए । pic.twitter.com/DjIg4mPpZr — Upendra Kushwaha (@UpendraRLSP) February 9, 2019
दो फरवरी को राज भवन मार्च के संबंध में उपेंद्र कुशवाहा और उनके करीब 200 ‘अज्ञात’ समर्थकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है. पुलिस ने इस मार्च के दौरान लाठीचार्ज किया था. पुलिस थाने से बाहर आकर कुशवाहा ने दावा किया, ‘‘ मैं यहां गिरफ्तारी देने आया था क्योंकि हमारे खिलाफ मामले वापस लेने की मांग पुलिस ने नहीं मानी. हालांकि जब मैंने गिरफ्तारी के लिए स्वयं को पेश किया तो उन्होंने कहा कि वह हमारे खिलाफ कार्रवाई नहीं चाहते हैं और हमें बाहर आने दिया.''
हालांकि पुलिस का बयान इस मामले में अलग है. पुलिस का कहना है कि कुशवाहा को गिरफ्तार किया गया और निजी मुचलका भरने और जांच में सहयोग के आश्वासन के बाद छोड़ दिया गया.
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