सपा में दंगल: अखिलेश के प्रतिनिधि सम्मेलन को मुलायम ने बताया असंवैधानिक, 5 जनवरी को होगा अधिवेशन

लखनऊ: समाजवादी पार्टी का दंगल अभी थमा नहीं है. लखनऊ में रामगोपाल यादव की तरफ से बुलाए गए पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया गया है. सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव की ओर से बुलाये गए आपातकालीन राष्ट्रीय अधिवेशन में स्वयं रामगोपाल ने कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे, जिन्हें सर्वसम्मति से पारित किया गया. हालांकि इसके तुरंत बाद समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने सामने आकर कहा कि आज बुलाया गया विशेष अधिवेशन पूरी तरह से असंवैधानिक है और 5 जनवरी को संवैधानिक रूप से मान्य अधिवेशन होगा. जबकि रामगोपाल यादव को एक बार फिर पार्टी से निकाल दिया गया है.
आज बुलाए हए अधिवेशन में रामगोपाल ने अखिलेश को सपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव रखा, जिसे अधिवेशन ने मंजूर किया. अधिवेशन ने मुलायम सिंह यादव को सपा का संरक्षक बनाने के प्रस्ताव पर मुहर लगायी तो राज्यसभा सांसद अमर सिंह को बाहर का रास्ता दिखा दिया.
मुलायम बने मार्गदर्शक, शिवपाल पद से हटे
अधिवेशन में अखिलेश को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने के साथ-साथ चाचा शिवपाल को भी यूपी के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है. इतना ही नहीं पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव को पार्टी का मार्गदर्शक बना दिया गया है. इससे पहले मुलायम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे.
अमर सिंह सपा से बाहर
सपा के महासचिव अमर सिंह को भी पार्टी से बाहर कर दिया गया है. अमर सिंह यूपी में समाजवादी परिवार के दंगल में अखिलेश समर्थकों के निशाने पर रहे हैं. खुद अखिलेश भी बिना नाम लिए सारे विवाद के लिए एक बाहरी शख्स को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं. इस पर लंदन में बैठे अमर सिंह ने कहा कि उन्हें बेवजह विलेन बनाया जा रहा है. मुलायम और अखिलेश के बीच सुलह की शर्तों में अमर सिंह को पार्टी से निकाले जाने की शर्त की भी चर्चा थी.
मुलायम ने हालांकि पत्र जारी कर इस अधिवेशन को अवैध और असंवैधानिक करार दिया था. उन्होंने कहा कि अधिवेशन में शामिल होने वालों के खिलाफ अनुशासनहीनता की कार्रवाई की जाएगी. मुलायम ने कहा है कि आने वाली 5 जनवरी को अधिवेशन होगा.
Mulayam Singh Yadav writes letter to party workers, asks them not to attend National Executive meet called by Ramgopal Yadav pic.twitter.com/cigXo5sSn8
— ANI UP (@ANINewsUP) January 1, 2017
पार्टी के लिए कोई भी त्याग करने को तैयार- अखिलेश
कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा, 'अगर नेताजी के खिलाफ साज़िश हो तो नेताजी का बेटा होते हुए मेरी ज़िम्मेदारी बनती है कि मैं साज़िश को सामने लेकर आउं.' इसके बाद अखिलेश बोलते हैं कि 'हमारे लिए नेताजी का स्थान सबसे ऊंचा और महत्वपूर्ण है, हमारी सरकार एक बार फिर बनने से सबसे ज्यादा खुशी नेताजी को ही होगी.'
अधिवेशन में रामगोपाल यादव ने कहा है कि अखिलेश के खिलाफ साजिश रची जा रही है. पार्टी के दो लोग साजिश कर रहे हैं. वो लोग नहीं चाहते की यूपी में सपा की सरकार बने. इससे पहले शिवपाल यादव ने मुलायम सिंह यादव के आवास पर उनके साथ बैठक भी की.
बता दें कि राष्ट्रीय सम्मेलन बुलाने के लिए 40 फीसदी सदस्यों की मंजूरी लेनी होती है . यहां अखिलेश के पास 40 फीसदी से ज्यादा का समर्थन हैं.
यादव परिवार पांच सासंदो में से मुलयाम को अगल कर दिया जाए तो पत्नी डिंपल, चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव, रामगोपाल के बेटे अक्षय यादव और भतीजा तेज प्रताप यादव भी अखिलेश के साथ ही खड़े है.
अगर अखिलेश राष्ट्रीय अध्यक्ष बने तो...
- समाजवादी पार्टी पर उनका कब्जा होगा. ये भी साफ होगा कि पार्टी जीतती है तो सीएम अखिलेश ही बनेंगे.
- अखिलेश 403 सीटों पर उम्मीदवारों का एलान करने के लिए आजाद होंगे.
- साइकिल का चुनाव चिन्ह भी वही बाटेंगे.
- अखिलेश का विरोध करने वाले नेता हाशिए पर चले जाएंगे.
बेवजह विलेन बनाया जा रहा है- अमर सिंह
पार्टी से बाहर किए गए महासचिव अमर सिंह उत्तर प्रदेश में समाजवादी परिवार के दंगल में अखिलेश समर्थकों के निशाने पर रहे हैं. खुद अखिलेश भी बिना नाम लिए सारे विवाद के लिए एक बाहरी शख्स को जिम्मेदार ठहराते रहे. इस पर लंदन में बैठे अमर सिंह ने कहा कि उन्हें बेवजह विलेन बनाया जा रहा है. मुलायम और अखिलेश के बीच सुलह की शर्तों में अमर सिंह को पार्टी से निकाले जाने की शर्त की भी चर्चा थी.
Source: IOCL























