UP: CAA के विरोध प्रदर्शन से स्टूडेंट्स की इम्तहान की तैयारियों पर पड़ रहा है असर
CAA के विरोध प्रदर्शन से स्टूडेंट्स की इम्तहान की तैयारियों पर पड़ असर रहा है. आइए जानते हैं कैसे..

प्रयागराज : नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में संगम नगरी प्रयागराज की मुस्लिम महिलाओं का धरना आज लगातार सैंतीसवें दिन भी जारी है. आज भी बड़ी संख्या में बुर्कानशीं मुस्लिम महिलाएं धरने पर बैठी हुई हैं और केंद्र सरकार के खिलाफ हुंकार भर रही हैं.
शहर के रोशन बाग़ इलाके के मंसूर अली पार्क में चल रहे इस धरने में तमाम महिलाएं अपने बच्चों को भी साथ लाती हैं. जो महिलाएं लगातार इस धरने में शामिल हो रही हैं, उनके बच्चों की पढ़ाई और इम्तहान की तैयारियों पर इसका ज़बरदस्त असर पड़ रहा है. तमाम स्टूडेंट्स अपने परिवार वालों के साथ या तो कई घंटे धरने में शामिल होते हैं या फिर अभिभावकों के मंसूर पार्क जाने की वजह से वह पढ़ाई और इम्तहान की तैयारियों पर पूरा ध्यान नहीं दे पा रहे हैं.
यूपी बोर्ड के इम्तहान कल से शुरू हो रहे हैं. सीबीएसई के इम्तहान शुरू हो चुके हैं. बोर्ड के अलावा भी यह छोटे से लेकर बड़ी क्लास तक के बच्चों के इम्तहान का सीजन है, लेकिन CAA के खिलाफ विरोध प्रदर्शन पार्क जाने वाले परिवारों के लिए मुसीबत का सबब बनता जा रहा है. धरना स्थल मंसूर पार्क के आस - पास रहने वाले बच्चों की पढ़ाई भी लगातार बजते लाउडस्पीकर्स के शोर और इलाके में रहने वाली चहल -पहल की वजह से प्रभावित हो रही है.
धरने में शामिल होने वाली महिलाएं और उनके परिवार के स्टूडेंट्स भी इस कड़वी हकीकत से पूरी तरह रूबरू हैं, लेकिन कुछेक तो इसे किसी तरह मैनेज करने की बात करती हैं. वहीं ज़्यादातर इस बेतुकी दलील के साथ खुद अपना बचाव करती हैं कि अगर उनकी नागरिकता ही नहीं रहेगी तो पढ़ाई करने और इम्तहान की तैयारियां करने का क्या फायदा होना है. ये लोग यह तो मानते हैं कि CAA के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल होने से बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है, लेकिन इसके बावजूद वह इस धरने को जायज़ ठहराने पर लगे हुए हैं. दरअसल धरने में शामिल होने से बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ता है.
घर के लोग बच्चों को छोड़कर जब अकेले भी शामिल होते हैं, तब भी इम्तहान की तैयारियां प्रभावित होती हैं. इम्तहान का सीजन होने के बावजूद धरने में महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. मंसूर पार्क में यह धरना बारह जनवरी से लगातार चल रहा है. यह धरना चौबीसों घंटे चलता है, जिसमे आंदोलन की कमान बुर्कानशीं मुस्लिम महिलाएं ही संभाले रहती हैं. धरने को ख़त्म कराने और पार्क को आंदोलनकारियों के कब्ज़े से आज़ाद कराने की प्रशासन की सभी कोशिशें अब तक नाकाम साबित हुई हैं.
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