लालू परिवार में सबकुछ ठीक नहीं, आरजेडी के स्थापना दिवस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए तेजस्वी यादव
अपने छोटे भाई से अनबन की खबरों पर तेजप्रताप यादव ने कहा कि वे कृष्ण हैं और तेजस्वी अर्जुन हैं. जो दोनों भाइयों के बीच में आएगा उसपर सुदर्शन चक्र चल जाएगा. उन्होंने कहा कि तेजस्वी किसी काम में व्यस्त हैं.

पटना: राष्ट्रीय जनता दल ने आज 23वां स्थापना दिवस मनाया लेकिन तेजस्वी यादव इसमें मौजूद नहीं हुए. इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और तेजप्रताप यादव मौजूद रहे. इस कार्यक्रम में राबड़ी देवी सबसे पहले पहुंचीं. बाद में बड़े बेटे तेजप्रताप पहुंचे. मंच पर राबड़ी देवी के दोनों तरफ उनके दोनों बेटों के बैठने का प्रबंध किया गया था.
कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि तेजस्वी कार्यक्रम में पहुंचकर इसे संबोधित करेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ. तेजस्वी की कुर्सी पर पार्टी के सीनियर नेता शिवानंद तिवारी को बैठाया गया. छोटे भाई तेजस्वी से अनबन को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए तेज़प्रताप ने कहा, ''मैं अगर कृष्ण हूं तो भाई तेजस्वी अर्जुन हैं. कोई अगर बीच में आया तो सुदर्शन चक्र चल जाएगा. हम दोनों भाइयों को लेकर जो बोलेगा, उसको हम चीर देंगे. तेजप्रताप ने आगे कहा, ''बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव काम में व्यस्त हैं, इसलिए हमको यहां पर भेजे हैं.''
वहीं राबड़ी देवी ने इस कार्यक्रम में सीएम नीतीश कुमार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि सुशासन बाबू के राज में गुंडागर्दी के अलावा कुछ नहीं बचा है. इससे पहले रघुवंश प्रसाद ने पीएम नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष किया.
इस दौरान बीते लोकसभा चुनाव पार्टी के हार की समीक्षा की गई. राबड़ी देवी ने पार्टी के बड़े नेताओं पर कई सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि जीतने वाले सांसद और विधायकों ने सिर्फ़ अपने क्षेत्र में सिमट कर रहना सही समझा और ये नतीजे देखने को मिले. उन्होंने ये भी कहा कि आज ज्यादातर लोग हमसे जुड़ना चाहते हैं. इसपर हमें अभी से काम करना होगा, चुनाव का इंतजार करना सही नहीं है.
देखा जाए तो आरजेडी 22 साल के सियासी सफर में अभी अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है. आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव जेल में हैं. बीते लोकसभा चुनाव में पार्टी का खाता भी नहीं खुला. लालू के दोनों बेटों के बीच मनमुटाव की खबरें भी सामने आती रहती हैं.
5 जुलाई 1997 को आरजेडी का गठन किया गया तब लालू यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे. उस दौर में आरजेडी के पास 17 लोकसभा सांसद और 8 राज्यसभा सांसद थे. संघर्ष के दौर से गुजर रही आरजेडी की नजर अगले साल राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव पर है.
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