नीतीश कुमार की जेडीयू ने संसद में की मांग, बिहार को मिले विशेष राज्य का दर्जा
जेडीयू के सांसद ललन सिंह ने कहा कि सरकार को इस दिशा में कार्यवाही करनी चाहिएउन्होंने कहा कि बिहार की विधानसभा ने प्रस्ताव पास करके बराबर केंद्र सरकार को भेजा है

नई दिल्ली: संसद में जेडीयू के संसदीय दल के नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने आज राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अपना पक्ष रखते हुए बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की वकालत की. ललन सिंह ने चर्चा के दौरान कहा कि विकास तो हो रहा है लेकिन अलग-अलग राज्यों की अलग-अलग जरूरते हैं. अगर वो पूरे नहीं होंगे तो विकास नहीं होगा.
ललन सिंह ने कहा कि देश अलग-अलग राज्यों से मिलकर बना है. जब तक अलग-अलग राज्यों को विकसित नहीं किया जाएगा तब तक विकसित राष्ट्र की कल्पना नहीं की जा सकती है. उन्होंने कहा कि पिछली सरकार यूपीए की थी. यूपीए की सरकार ने रंगराजन कमेटी बनाई थी. रंगराजन कमेटी ने चिन्हित करके पिछड़े राज्यों के बारे में बताया था.
जेडीयू सांसद ने कहा, ''मैं समझता हूं कि आप अगर हर क्षेत्र का विकास करना चाहते हैं तो हर क्षेत्र का विकास करने के लिए जो पिछड़े राज्य हैं, जिनको चिह्नित किया गया है...उसमें बिहार भी है, उसमें ओडिशा भी है, उसमें झारखण्ड भी है. उसमें कई राज्य है जिनकी विभिन्न पैरामीटर्स पर रंगराजन कमेटी ने भी अनुशंसा की है. आप उनको भी जरा देखिए. उन पर विशेष ध्यान केन्द्रित कीजिए.''
ललन सिंह ने कहा, ''मैं इसके तहत मांग करूंगा और बिहार की विधान सभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास करके बराबर केंद्र को भेजा है कि बिहार को विशेष पैकेज मिलना चाहिए, बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिलना चाहिए. इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए और इस दिशा में कार्यवाही होनी चाहिए.''
इसके साथ ही उन्होंने जातिगत जनगणना की मांग की. ललन सिंह ने कहा कि साल 1931 में इस देश में जनगणना हुई थी. वह जनगणना जातीय आधारित जनगणना थी. उसके बाद से आज तक जातीय आधारित जनगणना नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि एक बार यह साफ तो होना चाहिए कि इस देश में जो जातीय आधार पर लोग दावा कर रहे हैं उसकी वास्तविक स्थिति क्या है? जब वास्तविक स्थिति सरकार जानेगी तो सरकार को नीति बनाने में सुविधा होगी. सरकार को ये पता चलेगा कि किस जाति के कितने लोग हैं.
Source: IOCL
























