गोरखपुर: कर्ज में डूबे एक परिवार के पांच लोगों ने की सामूहिक आत्महत्या
रविवार की सुबह एक परिवार के लिए स्याह काली रात बनकर आई. एक ही परिवार के पांच लोगों ने कर्ज में डूबे होने के कारण विषाक्त पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली.

गोरखपुर: रविवार की सुबह एक परिवार के लिए स्याह काली रात बनकर आई. एक ही परिवार के पांच लोगों ने कर्ज में डूबे होने के कारण विषाक्त पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली. सुबह उसी मकान में रहने वाले परिवार के अन्य सदस्यों को इसकी जानकारी हुई, तो कोहराम मच गया. पहले परिवार के मुखिया का शव सूर्यकुंड रेलवे ट्रैक पर मिला. उसके बाद परिवार के अन्य सदस्यों को सामूहिक आत्महत्या की जानकारी हुई.
गोरखपुर के राजघाट थानाक्षेत्र के हसनगंज में आज सुबह एक ही परिवार के 4 लोगों के शव मिलने से सनसनी फैल गयी. इस परिवार के मुखिया रमेश ने जहां ट्रेन से कटकर आत्महत्या की. वहीं उसकी पत्नी और तीन बच्चों ने जहर खा लिया. इस घटना में गंभीर मुखिया की लड़की को इलाज के लिए मेडिकल कालेज ले जाया गया, जहां उसकी भी इलाज के दौरान मौत हो गई. यह परिवार व्यापार में घाटे की वजह से लाखों के कर्ज में डूबा हुआ था और सूदखोरों की धमकी से परेशान होकर इस आत्मघाती कदम को उठाया.
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मृतका सरिता की मां कुसुमलता ने बताया कि उनके दामाद और परिवार के मुखिया रमेश गुप्ता दाल के थोक व्यापारी रहे हैं. वे राजघाट के हसनगंज में 45 वर्षीय पत्नी सरिता, 20 साल की बेटी रचना, 15 साल की बेटी पायल और 10 साल के बेटे आयुश के साथ मकान के तीसरे तल पर रहते रहे हैं. बड़ा बेटा सोनू सहजनवां में रहकर कारोबार करता है.
उन्होंने गीडा में दाल की फैक्ट्री डाली थी. इसी कारण वे कर्ज में डूबते चले गए. वहीं से सूदखोरों और कर्ज देने वालों ने तकादा करना शुरू कर दिया. शनिवार को भी कुछ लोग कर्ज चुकाने के लिए दबाव बनाने आए थे. घर पर काफी विवाद भी हुआ था. उसके बाद देर रात परिवार के लोग सोने चले गए. कैसे ये घटना हुई इसकी जानकारी नहीं हो पाई.
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रमेश गुप्ता की बड़ी बेटी को उनके भाई के परिवार के लोगों ने गम्भीर हालात में दरवाजे पर पाया और जब घर के अंदर गए तो वहां रमेश की पत्नी और दो बच्चे बिस्तर में मौत के आगोश में पाए गए. इन सभी ने रात के खाने में जहर मिलाकर खाया था. इसी बीच इस परिवार के मुखिया का शव भी सूरजकुंड इलाके में रेलवे ट्रैक के पास पाया गया.
मृतक की भाभी विजयलक्ष्मी ने बताया कि गोरखपुर के हसनगंज निवासी व्यापारी रमेश गुप्ता की महेवा ग़ल्ला मण्डी में दलहन की दुकान है. रमेश ने गीडा इलाके में नमकीन की फैक्ट्री डाली थी और गुड़ का व्यापार भी करते थे. लेकिन, फैक्ट्री के नहीं चलने की वजह से रमेश धीरे-धीरे लाखों के कर्ज में डूब गए. इस कर्ज को भरने के लिए रमेश ने सूदखोरों का सहारा लिया और दूसरी व्यापार में पैसा लगाया. लेकिन, वहां पर भी घाटा होने की वजह से इन के ऊपर 15 लाख से ऊपर की देनदारी हो गई.
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सूदखोर हर रोज रमेश की दुकान और घर तक आकर उनको धमकी देते और उनके साथ गाली-गलौज करते थे. इसी वजह से परिवार पिछले 1 महीने से काफी परेशान रहने लगा था. रमेश ने हर जतन कर के देख लिया कि कहीं से उसको कुछ फायदा मिल सके. लेकिन, हर जगह निराशा हाथ लगने की वजह से यह परिवार पूरी तरह से डिप्रेशन का शिकार हो गया था.
रोज रोज की धमकी और सूदखोरों से बचने के लिए रमेश और उसके परिवार में ऐसा आत्मघाती कदम उठाया. इस घटना के संबंध में एसएसपी डा. सुनील गुप्ता का कहना है कि कमरे में मिली लाश को देखकर ये लगता है कि पूरे परिवार ने एक साथ सुसाइड किया है. क्योंकि सभी शव सोते हुए हालत में पाए गए हैं. परिवार के मुखिया रमेश गुप्ता का शव भी रेलवे ट्रैक के किनारे बरामद हुआ है.
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इस मामले में शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही ये पता चल पाएगा कि आखिर आत्महत्या के लिए किस जहर का इस्तेमाल किया गया है. उन्होंने कहा कि आत्महत्या का कारण क्या है इसकी भी जांच की जा रही है. बुराड़ी कांड की तरह ही इस सामूहिक आत्महत्या के मामले ने जहां शहर में सनसनी फैला दी है. तो वहीं लोग इस बात से भी हैरत में हैं कि आखिर पूरे परिवार को आत्महत्या जैसा कदम क्यों उठाना पड़ा.
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