अब ड्रोन कैमरे करेंगे दुधवा टाइगर रिजर्व की निगरानी, 680 किलोमीटर के एरिया पर रहेगी नजर
निगरानी कार्यक्रम ‘ई बर्ड सर्विलांस’ के तहत दुधवा टाइगर रिजर्व और वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया देहरादून (डब्ल्यू डब्ल्यू आई) ने संयुक्तरूप से पार्क में मौजूद चीतों, तेंदुए, गैंडो और अन्य वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल करने का फैसला लिया है.

लखीमपुर खीरी: वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए दुधवा टाइगर रिजर्व के तीनों हिस्सों दुधवा नेशनल पार्क, किशनपुर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी और कतर्निया घाट वाइल्ड लाइफ सेंचुरी सहित पूरे 1,107 किलोमीटर इलाके की निगरानी में अब ड्रोन कैमरे भी शामिल होंगे.
निगरानी कार्यक्रम ‘ई बर्ड सर्विलांस’ के तहत दुधवा टाइगर रिजर्व और वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया देहरादून (डब्ल्यू डब्ल्यू आई) ने संयुक्तरूप से पार्क में मौजूद चीतों, तेंदुए, गैंडो और अन्य वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल करने का फैसला लिया है.
दुधवा टाइगर रिजर्व के निदेशक रमेश पांडे ने बताया कि 'इस आधुनिक निगरानी प्रोजेक्ट का नाम ई बर्ड प्रोजेक्ट रखा गया है. इसके तहत ड्रोन कैमरे पार्क की सुरक्षा करने वाली गश्ती टीम की मदद करेंगे. इनकी मदद से जीव जंतुओं पर नजर रखने के साथ-साथ जंगलों में शिकार करने वाले अपराधियों पर भी नजर रखी जा सकेगी.'
उन्होंने कहा, डब्ल्यू डब्ल्यू आई देहरादून की टीम दुधवा टाइगर रिजर्व को ड्रोन कैमरे उपलब्ध कराएगी. वह रिजर्व के कर्मचारियों को कैमरे संचालित करने का प्रशिक्षण भी देगी.
पांडे ने बताया कि प्रायोगिक स्तर पर यह परियोजना 29 जुलाई से शुरू हो चुकी है. ड्रोन कैमरे फिलहाल गैंडो की निगरानी कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि ड्रोन कैमरों की मदद से हम गैंडों के करीब गए बगैर उनपर नजर रख रहे हैं.
उन्होंने बताया कि डब्ल्यू डब्ल्यू आई देहरादून ने दुधवा टाइगर रिजर्व के तीन हिस्सों का सर्वेक्षण करेंगी. इसमें दुधवा नेशनल पार्क का 680 किलोमीटर, किशनपुर का 204 किलोमीटर का इलाका और कतर्नियाघाट का 478 किलोमीटर का इलाका शामिल है.
Source: IOCL



























