अखिलेश यादव और राजा भैया के बीच का परदा उठ ही गया, साफ दिखने लगी अदावत
अखिलेश यादव ने राजपूताना पगड़ी बांध कर ख़ूब फ़ोटो खिंचवाई. समाजवादी पार्टी ऑफ़िस में महाराणा प्रताप की जयंती मनाई गई. पूरे ठाठ बाट के साथ. ग़ाज़ीपुर से लेकर ग़ाज़ियाबाद तक के ठाकुर नेता बुलाए गए.

लखनऊ: अखिलेश यादव ने राजपूताना पगड़ी बांध कर ख़ूब फ़ोटो खिंचवाई. समाजवादी पार्टी ऑफ़िस में महाराणा प्रताप की जयंती मनाई गई. पूरे ठाठ बाट के साथ. ग़ाज़ीपुर से लेकर ग़ाज़ियाबाद तक के ठाकुर नेता बुलाए गए. राजपूताना आन-बान और शान पर लंबे-लंबे भाषण हुए. अखिलेश यादव लगातार 5 सालों तक सीएम रहे. लेकिन इस भव्यता से महाराणा प्रताप की जयंती कभी नहीं मनाई गई थी. कहीं ये राजा भैया का असर तो नहीं है? राजनीति की समझ रखने वाले तो यही कहते हैं.
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बाहुबली नेता राजा भैया उर्फ़ रघुराज प्रताप सिंह ने ख़ुद ही तस्वीर साफ़ कर दी. उन्होंने तो आगे की राजनैतिक रणनीति का भी ख़ुलासा कर दिया. राजा ने ट्वीट किया,"महाराणा प्रताप को सिर्फ़ क्षत्रियों का नेता मानना उनका अपमान है. वे विदेशी आक्रमणकारियों के ख़िलाफ़ लड़े, वे भारत माँ के सच्चे सपूत थे."
समाजवादी पार्टी के महाराणा प्रताप जयंती का ये जवाब था. जिसमें उन्हें राजपूतों के सम्मान का प्रतीक बताया गया था. राजा भैया और अखिलेश यादव के रिश्तों के ‘अच्छे दिन’ ख़त्म हो चुके हैं. वैसे भी दोनों नेताओं में कभी ‘मीठा’ तो नहीं रहा. मुलायम सिंह यादव के कारण राजा भैया को लेकर अखिलेश ने अपने को मुलायम रखा.
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राज्यसभा चुनाव के बाद से अखिलेश यादव और राजा भैया के रास्ते अलग हो गए हैं. गोरखपुर और फूलपुर उप चुनाव से पहले एसपी और बीएसपी में गठबंधन हो चुका था. राजा इसके ख़िलाफ़ थे. मायावती से उनके रिश्ते छत्तीस के रहे हैं. अब भला वे राज्य सभा चुनाव में बीएसपी के लिए वोट कैसे करते.
वैसे राजा हमेशा कहते रहे, “मैं अखिलेश यादव के साथ हूँ." लेकिन बीएसपी उम्मीदवार हार गए. मायावती ने इसके लिये राजा भैया को भला बुरा कहा. बुआ ने तो भतीजे अखिलेश को राजनैतिक नासमझ भी बता दिया. ग़ुस्साए अखिलेश ने अगले ही दिन राजा भैया को थैंक्यू करने वाला ट्वीट ही डिलीट कर दिया. तब से दोनों नेताओं के बीच अंदर ही अंदर ठनी हुई है.
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राज्य सभा चुनाव वाले दिन राजा भैया ने सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाक़ात की थी. योगी के पैर छूकर राजा प्रणाम करते हैं. दोनों नेता ठाकुर बिरादरी के हैं. राजा भैया अब योगी की बोली बोलते हैं. राजा कहते हैं,"जिन्ना की फ़ोटो हटाने के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है, 70 साल की आज़ादी के बाद यही मिला."
योगी को भी जिन्ना का महिमा मंडन बर्दाश्त नहीं है. अखिलेश और राजा के बीच जारी शीत युद्ध से धर्म संकट में हैं समाजवादी पार्टी के ठाकुर नेता. कुछ को छोड़ कर सभी राजा का टीम के रहे हैं. अरविंद सिंह गोप से लेकर राकेश प्रताप सिंह तक. अब इन्हें दोगुने जोश से अखिलेश समर्थक बताना और दिखाना पड़ रहा है.
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