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दिल्ली में उपेंद्र कुशवाहा मीटिंग के इंतजार में, अमित शाह छत्तीसगढ़ प्रचार में

बिहार जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ट नारायण सिंह ने उपेंद्र कुशवाहा से साफ-साफ शब्दों में कहा कि एनडीए मजबूत है और काफी अच्छी स्थिति में है, किसी के आने जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता है.

नई दिल्ली: बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में इन दिनों सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी) पर जेडीयू हो या बीजेपी दोनों अब खुलकर बयानबाजी कर रही है. केंद्रीय मंत्री और आरएलएसपी अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के तेवरों पर सत्तारूढ़ जेडीयू ने आज कहा कि गठबंधन में किसी के आने-जाने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

इस समय कुशवाहा दिल्ली में मौजूद हैं. उन्हें बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मिलने का इंतजार है. आज अमित शाह से उनकी मुलाकात की संभावना कम ही दिख रही है. शाह छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के प्रचार में व्यस्त हैं. सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह ने कुशवाहा से मुलाकात के लिए समय तय नहीं किया है. साफ है कि कुशवाहा के रुख से  गठबंधन की छवि को हो रहे नुकसान के बाद अब बीजेपी और जेडीयू उन्हें फिलहाल ज्यादा तवज्जो नहीं देना चाहते हैं. पहले कुशवाहा ने सीट बंटवारे पर हार्ड बार्गेनिंग की कोशिश की लेकिन अब इन्हें ना ही महागठबंधन की तरफ से बुलावा आ रहा है ना ही बीजेपी बहुत गंभीरता के साथ ले रही है. बता दें कि इनके पार्टी के सांसद और विधायक भी नीतीश कुमार से संपर्क में हैं.

कल उपेंद्र कुशवाहा ने ट्वीट कर कहा था कि ''दिल्ली पहुंचकर मैंने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से कल मुलाकात के लिए समय निर्धारण हेतु उनके कार्यालय प्रभारी को सूचित कर दिया है.'' इससे ठीक पहले उन्होंने ट्वीट कर कहा था, ''अभी मैं पटना से दिल्ली जा रहा हूं. कल बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मिलकर सीट शेयरिंग पर बातचीत करने का प्रयास करूंगा.'' उन्होंने बीजेपी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और प्रमुख मीडिया संस्थानों को भी अपने ट्वीट में टैग किया.

उपेंद्र कुशवाहा की दो टूक, NDA का मतलब सिर्फ नीतीश कुमार नहीं

जेडीयू ने क्या कहा? बिहार जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ट नारायण सिंह ने कहा कि एनडीए मजबूत है और काफी अच्छी स्थिति में है, किसी के आने जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता है. उपेंद्र कुशवाहा पर हम कोई टिप्पणी नहीं करते, हमारे प्रवक्ता भी संयम बरत रहे हैं. सीएम नीतीश कुमार ने कोई ऐसा बयान नहीं दिया, जब कोई खुद दूसरी धारा में जाना चाहता है उसे नहीं रोका जा सकता. कोई व्यक्ति किसी जाति का ठेकेदार नहीं हो सकता है.

दरअसल, उपेंद्र कुशवाहा ने दावा किया है कि नीतीश कुमार ने उनकी जाति को नीच कहा है. इसके विरोध में आरएलएसपी ने पटना में विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शन को अनियंत्रित देखते हुए पुलिस ने लाठीचार्ज कर दी. जिसमें कई कार्यकर्ता जख्मी हो गए. इसके बाद उपेंद्र कुशवाहा एनडीए के अन्य सहयोगी एलजेपी के अध्यक्ष रामविलास पासवान से मिले और पुलिस की कार्रवाई के बारे में उनसे 'शिकायत' की. उन्होंने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पूरे मामले पर चुप्पी साध रखी है. हालांकि उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने इशारों-इशारों में उपेंद्र कुशवाहा पर हमला किया और कहा कि वह शहीद बनने की कोशिश न करें. उन्होंने ट्वीट कर कहा, ''नीतीश कुमार ने कभी किसी नेता के बारे ‘नीच’शब्द का प्रयोग नहीं किया है. मैं उस कार्यक्रम में मौजूद था. जान बूझ कर कुछ लोग शहीद बनने की कोशिश कर रहें हैं. परंतु उन्हें सफलता नहीं मिलेगी.''

सुशील मोदी के ट्वीट के एक दिन बाद कुशवाहा ने एक के बाद एक कई ट्वीट कर सुशील मोदी पर निशाना साधा. और इसी बहाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार की पुरानी बयानबाजी को भी ताजा कर दिया. उन्होंने कहा, ''तो लगे हाथ यह भी कह ही दीजिए कि DNA वाले मुद्दे पर नीतीशे जी सही थे और प्रधानमंत्री जी गलत.......!''

आखिर कुशवाहा नाराज क्यों हैं? 2019 लोकसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है अधिक सीटों की मांगों को लेकर सभी पार्टियां अपनी जमीन तैयार करने में लगी है. कुशवाहा को अंदेशा है कि बिहार में एनडीए उसे पिछले साल के मुकाबले कम सीटें देगी. जबकि उनका कहना है कि आरएलएसपी का जनाधार बढ़ा है और एनडीए पिछले चुनाव के मुकाबले अधिक सीट दे.

साथ ही उपेंद्र कुशवाहा बिहार की नीतीश सरकार में पार्टी विधायकों के लिए मंत्री पद की मांग कर रहे हैं. नीतीश कुमार इस बात के लिए राज़ी नहीं हैं. कुशवाहा का दावा है कि नीतीश कुमार उनके विधायकों को भी तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि वे सफल नहीं होने देंगे. आरएलएसी के सांसद अरुण कुमार पहले ही बगावत कर चुके हैं.

उपेंद्र कुशवाहा ने सुशील मोदी पर साधा निशाना, पूछा- क्या DNA के मुद्दे पर नीतीश सही थे और पीएम गलत?

दरअसल, 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी बिहार की 40 सीटों में से 30 पर लड़ी थी और उसे 22 सीटों पर जीत मिली थी. एलजेपी और आरएलएसपी क्रमश: सात और तीन सीटों पर उतरी थीं और उन्होंने क्रमश: छह और तीनें सीटें जीती थीं.

कुशवाहा के पास क्या है रास्ता? उपेंद्र कुशवाहा अमित शाह से मुलाकात के बाद ही आगे की रणनीति तैयार करेंगे. हालांकि सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा खूब हो रही है कि एनडीए मे सीटों पर बात नहीं बनी तो वह महागठबंधन की ओर रुख कर सकते हैं. इस अटकलों को और अधिक बल तब मिलने लगा जब उन्होंने कुछ दिनों पहले राष्ट्रीय जनता दल के नेता और पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव से मुलाकात की थी.

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