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शीला के पीएस, प्रणव मुखर्जी के दूत; कांग्रेस में कैसे पावरफुल होते गए पवन खेड़ा?

1998 में सत्ता में आने के बाद शीला दीक्षित ने अपने बेटे संदीप के दोस्त पवन खेड़ा को राजनीतिक सचिव नियुक्त किया. राजधानी दिल्ली में रहने की वजह खेड़ा 24 अकबर रोड में भी अपनी पैठ बना ली.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विवादित टिप्पणी करने वाले कांग्रेस मीडिया डिपार्टमेंट के चेयरमैन पवन खेड़ा को असम पुलिस ने गुरुवार दोपहर गिरफ्तार कर लिया. खेड़ा की गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के सामने अर्जेंट सुनवाई की अपील की. कांग्रेस ने कहा कि एक बयान की वजह से खेड़ा के खिलाफ पूरे देश में केस दर्ज किए जा रहे हैं.

वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि असम पुलिस ने प्रधानमंत्री पर बयान देने की वजह से खेड़ा के खिलाफ कम्युनल डिस्टर्बेंस और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मामलों में मुकदमा दर्ज कर लिया है. उन्हें गिरफ्तार कर असम ले जा रही है, जो गलत है.

सिंघवी ने कहा कि मैं खेड़ा की टिप्पणी का समर्थन नहीं करता हूं, लेकिन उनके खिलाफ असम में आईपीसी की धारा 153, 153बी और 120 बी के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने खेड़ा को अंतरिम राहत देते हुए दिल्ली कोर्ट से उन्हें जमानत देने के लिए कहा है.


शीला के पीएस, प्रणव मुखर्जी के दूत; कांग्रेस में कैसे पावरफुल होते गए पवन खेड़ा?

(Photo- Social Media)

पहले जानिए सुप्रीम कोर्ट में क्या-क्या हुआ?

अभिषेक मनु सिंघवी- जुबान फिसलने की वजह से खेड़ा ने यह बयान दिया. प्रधानमंत्री को अपमानित करने का कोई इरादा नहीं था. 

एएसजी एश्वर्य भाटी- प्रधानमंत्री चुनकर आए हैं. उनके खिलाफ इस तरह का साजिशन बयान देना देशद्रोह है. खेड़ा ने जानबूझकर ऐसा बयान दिया. 

चीफ जस्टिस- हम अंतरिम राहत देने के पक्ष में हैं. अनुच्छेद 32 के तहत एफआईआर क्लब की मांग की गई है. पहले भी हमने कई केस में ऐसा किया है.

एएसजी एश्वर्य भाटी- वीडियो देखिए आप. खेड़ा हंस-हंस कर प्रधानमंत्री के खिलाफ बयान दे रहे हैं. काम के आधार पर नाम तय कर रहे हैं. 

अभिषेक मनु सिंघवी- मैं उनकी जगह पर रहता तो शायद यह बयान भी नहीं देता. सार्वजनिक माफी मांगने के लिए भी तैयार हैं. बयान का समर्थन नहीं करता हूं.

असम पुलिस ने खेड़ा मामले में क्या कहा है?
न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए असम पुलिस के प्रवक्ता प्रशांत कुमार भूंइया ने कहा कि दीमा हसाओ जिले के हाफलॉन्ग पुलिस स्टेशन में खेड़ा के खिलाफ एफआईआर दर्ज है. 

इसी सिलसिले में पुलिस की एक टीम दिल्ली गई है, जिसने दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर खेड़ा को गिरफ्तार की है. स्थानीय कोर्ट से इजाजत मिलने के बाद टीम खेड़ा को लेकर असम आएगी और फिर हम मामले की जांच करेंगे. 

खेड़ा की गिरफ्तारी पर कांग्रेस का बयान
पवन खेड़ा की गिरफ्तारी को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने तानाशाही बताया है. खड़गे ने ट्वीट कर कहा कि हमारे मीडिया विभाग के चेयरमैन को गिरफ्तार किया गया है. भारत के लोकतंत्र को मोदी और शाह की जोड़ी ने हिटलरशाही में बदल दिया है.

कांग्रेस ने खेड़ा की गिरफ्तारी को रायपुर में होने वाला महाधिवेशन से भी जोड़ा है. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि नागपुर से दिल्ली तक जितना भी जोर बीजेपी लगा ले, अधिवेशन को असफल नहीं कर पाएगी.

कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने एक बयान जारी कर कहा है कि पूरी पार्टी पवन खेड़ा के साथ खड़ी है. एक मनगढ़ंत एफआईआर के जरिए सरकार आंदोलन को कमजोर नहीं कर सकती है.

खेड़ा ने क्या कहा था, जिस पर बवाल मचा?
उद्योगपति गौतम अडानी के मुद्दे पर जेपीसी से जांच कराने की मांग को लेकर पवन खेड़ा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे. खेड़ा उसी दौरान प्रधानमंत्री के नाम में गौतम अडानी का नाम जोड़ दिया. 

खेड़ा ने टिप्पणी में पहले 'नरेंद्र गौतम दास मोदी' कहा, लेकिन तुरंत इसे ठीक करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री का पूरा नाम नरेंद्र दामोदर दास मोदी लिया. खेड़ा ने इस टिप्पणी के लिए तुरंत खेद जताया. हालांकि, फिर कहा कि काम तो नरेंद्र गौतम दास मोदी जैसा ही कर रहे हैं. 

खेड़ा के इस टिप्पणी पर बीजेपी भड़क गई और इसे पीएम मोदी का अपमान बताया. खेड़ा के इस बयान पर कई जगहों पर एफआईआर भी दर्ज की गई है.

शीला के पीएस कैसे हुए कांग्रेस में पावरफुल?
पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले पवन खेड़ा की कांग्रेस में एंट्री संदीप दीक्षित के जरिए हुई. खेड़ा और संदीप की दोस्ती वर्षों पुरानी है. 1990 के शुरुआती दौर में दोनों एक साथ एनजीओ में काम करते थे. 

1998 में पवन खेड़ा दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के राजनीतिक सचिव नियुक्त हुए. 2013 तक खेड़ा इस पद पर रहे. दिल्ली कांग्रेस के पुराने नेताओं की माने तो खेड़ा शीला के सहारे इन 13 सालों में 24 अकबर रोड से 10 जनपथ तक अपनी पैठ बना ली. 


शीला के पीएस, प्रणव मुखर्जी के दूत; कांग्रेस में कैसे पावरफुल होते गए पवन खेड़ा?(Photo- Social Media)

2008 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में पवन खेड़ा टिकट चयन को लेकर सुर्खियों में आए. मीडिया में शीला के डी कंपनी को लेकर कई खबरें भी छपी. इन डी कंपनी में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष जेपी अग्रवाल, शीला दीक्षित के बेटे संदीप और पवन खेड़ा शामिल थे.

पवन के जिम्मे इस चुनाव में शीला के लिए रणनीति बनाने का काम भी था. चुनाव में तमाम आरोप लगने के बावजूद शीला को भारी सफलता मिली और दिल्ली में तीसरी बार सरकार बनाने में कामयाब रही. 2008 चुनाव के बाद पवन कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं के नजर में आ गए.

अन्ना से समझौता में प्रणव के दूत बने खेड़ा
2011 में लोकपाल विधेयक को लेकर अन्ना हजारे ने दिल्ली में आंदोलन छेड़ दिया. धीरे-धीरे यह आंदोलन कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ाने लगा. आंदोलन से निपटने के लिए पार्टी ने कई स्तर पर योजना तैयार की, लेकिन सब विफल हो गया. 

मनमोहन सिंह ने अन्ना हजारे और उनकी टीम की मांग सुनकर सरकार से समझौता कराने की जिम्मेदारी कद्दावर नेता प्रणव मुखर्जी को सौंपी. प्रणव मुखर्जी ने अन्ना हजारे और उनकी टीम से संपर्क साधने का काम पवन खेड़ा को सौंपा.

वरिष्ठ पत्रकार और आम आदमी पार्टी के सदस्य रहे आशुतोष अपनी किताब अन्ना क्रांति में लिखते हैं- पवन खेड़ा सरकार की ओर से दूत बनकर समझौते के लिए आए थे. टीम अन्ना और मनमोहन सिंह के बीच मीटिंग आयोजित कराने में खेड़ा की बड़ी भूमिका थी.

खेड़ा सरकार और टीम अन्ना के बीच एक कड़ी का काम कर रहे थे. हालांकि, शुरूआत में मनमोहन सिंह की सरकार ने टीम अन्ना की मांग नहीं मानी. 

गलत बयान पर केजरीवाल को भेजा नोटिस
2012 में राजनीतिक पार्टी बनाने के बाद अरविंद केजरीवाल ने शीला दीक्षित और बिजली कंपनियों के बीच सांठगांठ का आरोप लगाया था. केजरीवाल ने कहा था कि कंपनी और शीला जी के बीच एक डील है, जिसके तहत दिल्ली में बिजली के दामों में बढ़ोतरी की जा रही है.  

केजरीवाल के इस बयान को शीला दीक्षित ने बिना आधार वाला बताया था. दीक्षित ने पवन खेड़ा के जरिए केजरीवाल को मानहानि का नोटिस भिजवाया था. केजरीवाल ने उस वक्त माफी मांगने से इनकार कर दिया था. हालांकि, 2018 में उन्होंने पवन खेड़ा से लिखित माफी मांगी थी.

कांग्रेस के मीडिया विभाग में एंट्री
2013 में कांग्रेस में आधिकारिक रूप से शामिल होने के बाद पवन खेड़ा को पार्टी मीडिया में पक्ष रखने के लिए भेजने लगी. खेड़ा यहां अपने तर्क से चर्चा में रहने लगे. 2018 में जब राहुल गांधी को कांग्रेस की कमान मिली तो खेड़ा को आधिकारिक प्रवक्ता नियुक्त किया गया.

2022 में कांग्रेस ने जब इमरान प्रतापगढ़ी समेत कुछ नए नेताओं को राज्यसभा भेजा तो खेड़ा का एक ट्वीट खूब वायरल हुई. इसमें खेड़ा ने कहा था कि मेरी तपस्या में कुछ कमी रह गई है.

अक्टूबर 2022 में कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने खेड़ा को पार्टी के मीडिया और पब्लिसिटी विभाग का चेयरमैन नियुक्त किया. खेड़ा रायपुर में हो रहे कांग्रेस अधिवेशन में ड्राफ्ट कमेटी के सदस्य भी हैं. पवन खेड़ा की बेटी राधिका खेड़ा भी कांग्रेस में प्रवक्ता हैं और टीवी पर पार्टी का पक्ष रखती हैं.

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