महिला आरक्षण बिल कब लाएगी सरकार? पता चल गई तारीख, ऐसे कराया जाएगा पास
Women Reservation Bill: बताया जा रहा है कि सरकार 2 अप्रैल को सत्र को पूरी तरह समाप्त (Sine Die) करने के बजाय स्थगित कर सकती है. इससे सरकार को आगे की रणनीति के लिए समय मिल सकेगा.

महिला आरक्षण बिल को लेकर सरकार की रणनीति तेज होती नजर आ रही है. सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, सरकार इस महत्वपूर्ण बिल को पारित कराने के लिए विशेष तैयारी कर रही है और इसके लिए संसद सत्र की अवधि बढ़ाने या अलग से सत्र बुलाने की योजना बनाई जा रही है.
मौजूदा सत्र में नहीं आएगा संशोधन बिल
सूत्रों के मुताबिक, पहले से तय संसद सत्र की तारीखों के बीच महिला आरक्षण संशोधन बिल पेश नहीं किया जाएगा. वर्तमान सत्र 2 अप्रैल तक निर्धारित है, लेकिन इसके भीतर इस बिल को लाना संभव नहीं माना जा रहा है.
सत्र बढ़ाने या स्थगित करने की तैयारी
बताया जा रहा है कि सरकार 2 अप्रैल को सत्र को पूरी तरह समाप्त (Sine Die) करने के बजाय स्थगित कर सकती है. इससे सरकार को आगे की रणनीति के लिए समय मिल सकेगा.
अप्रैल में फिर बुलाया जा सकता है सत्र
सूत्रों के अनुसार, अप्रैल के दूसरे या तीसरे सप्ताह में संसद को एक-दो दिनों के लिए फिर से बुलाया जा सकता है. इस विशेष सत्र का मुख्य और संभवतः एकमात्र एजेंडा महिला आरक्षण संशोधन बिल को पारित कराना होगा.
विपक्षी दलों ने सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की
उधर, विपक्षी दलों ने मंगलवार को सरकार को पत्र लिखकर आग्रह किया कि वह महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन के विषय पर सर्वदलीय बैठक चार राज्यों एवं एक केंद्रशासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद बुलाए. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के संसद भवन स्थित कार्यालय में सोमवार को विपक्षी नेताओं की एक बैठक के बाद, नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 (महिला आरक्षण विधेयक) को लागू करने की रूपरेखा को लेकर सरकार से विचार-विमर्श करने के लिए सर्वदलीय बैठक की जरूरत पर जोर दिया गया था. कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों ने मंगलवार को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू को पत्र लिखकर सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया. इस पत्र पर कांग्रेस के अलावा माकपा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शप), झारखंड मुक्ति मोर्चा और कुछ अन्य दलों के नेताओं ने हस्ताक्षर किए हैं.
रंजीत रंज ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर लंबे समय से तैयारी कर रही है. उन्होंने याद दिलाया कि 2023 में संसद के नए भवन में प्रवेश के समय भी यह मुद्दा उठा था, लेकिन अब 2026 तक भी इसे लागू करने में देरी हो रही है.रंजन ने कहा कि सरकार पहले परिसीमन और फिर चुनाव की बात कर रही है, जिससे प्रक्रिया और लंबी हो सकती है. उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरा विपक्ष इस बिल का समर्थन कर रहा है. सरकार को इसे जल्द लागू करना चाहिए.





















