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पश्चिम बंगाल की ड्राफ्ट SIR लिस्ट में जगह न पाने वाले 1 करोड़ से ज्यादा लोगों को मिला एक और मौका, सुप्रीम कोर्ट ने दस्तावेज पेश करने के लिए 10 दिन का समय दिया

टीएमसी नेताओं की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि ग्रामीण इलाकों के अशिक्षित लोगों का ध्यान रखा जाना चाहिए. उन्हें दस्तावेज पेश करने के लिए इतनी दूर बुलाया जा रहा है कि वह वहां नहीं जा सकते.

पश्चिम बंगाल की SIR ड्राफ्ट लिस्ट में जगह न पाने वाले लोगों को सुप्रीम कोर्ट ने एक और अवसर दिया है. कोर्ट ने चुनाव आयोग से उन एक करोड़ से ज्यादा लोगों के नाम सार्वजनिक करने को कहा है, जिन्हें उनसे जुड़ी जानकारी पर संदेह के आधार पर ड्राफ्ट लिस्ट में जगह नहीं मिली है. इन लोगों को अपने दस्तावेज पेश करने के लिए 10 दिन का समय मिलेगा.

तृणमूल कांग्रेस सांसद डोला सेन और डेरेक ओब्रायन ने याचिका दायर कर विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) में गड़बड़ियों की शिकायत की है. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उन्होंने बताया कि 1 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं को लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी (तार्किक त्रुटि) श्रेणी में डाल कर नोटिस भेजा गया. जिन त्रुटियों को चुनाव आयोग ने दर्ज किया है, उनमें वोटर और उसके माता/पिता की उम्र में 15 साल तक का अंतर, वोटर और उसके माता/पिता की उम्र में 50 साल से ज्यादा अंतर, वोटर और उसके दादा-दादी की उम्र में 40 साल से कम का अंतर जैसी बातें हैं.

चुनाव आयोग की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने इसका बचाव करते हुए कहा कि नोटिस मिलने का अर्थ वोटर लिस्ट से नाम कट जाना नहीं है. लोग संतोषजनक दस्तावेज पेश कर चुनाव आयोग के अधिकारी के सामने अपनी बात रख सकते हैं. द्विवेदी ने कहा कि मतदाता सूची के हिसाब से 1 व्यक्ति के 234 बच्चे हैं, 7 लोग ऐसे हैं जिनके 100 से अधिक बच्चे हैं. ऐसी बातों को संदेह से देखना और दस्तावेज मांगना चुनाव आयोग का काम है.

चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने चुनाव आयोग की दलील से सहमति जताई. इस पर तृणमूल नेताओं के लिए पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि ग्रामीण इलाकों के अशिक्षित लोगों का ध्यान रखा जाना चाहिए. उन्हें दस्तावेज पेश करने के लिए इतनी दूर बुलाया जा रहा है कि वह वहां नहीं जा सकते. सिब्बल के साथ याचिकाकर्ता पक्ष की तरफ से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान और तृणमूल कांग्रेस सांसद कल्याण बनर्जी ने भी जिरह की.

सुनवाई के अंत में कोर्ट ने कहा कि वह जमीनी सच्चाइयों को देखते हुए लिस्ट में जगह न पाने वाले लोगों को समय देने के पक्ष में है. कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि वह 'तार्किक त्रुटि' श्रेणी में शामिल 1 करोड़ से ज्यादा लोगों के नाम प्रकाशित करे. यह नाम पंचायत भवन, तहसील कार्यालय या वार्ड ऑफिस में लगाए जाएं. इसके बाद 10 दिन के भीतर लोग अपने दस्तावेज पेश कर सकते हैं. लोग स्वयं या अपने प्रतिनिधि के जरिए अधिकारी के सामने पेश हों. दस्तावेज पेश करने की सुविधा तहसील कार्यालय और पंचायत भवन में मिले.

 

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करीब 2 दशक से सुप्रीम कोर्ट के गलियारों का एक जाना-पहचाना चेहरा. पत्रकारिता में बिताया समय उससे भी अधिक. कानूनी ख़बरों की जटिलता को सरलता में बदलने का कौशल. खाली समय में सिनेमा, संगीत और इतिहास में रुचि.
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