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Explained: बिहार जितना आसान नहीं बंगाल जीतना, 5% वोट स्विंग से पलट जाएगा पासा! BJP बीते 6 MPs-MLAs चुनावों में खा चुकी पटखनी

West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल का चुनाव जीतना बीजेपी के लिए 'नाक' बचाने जितना जरूरी हो गया है, लेकिन यह बिहार जितना आसान नहीं है. सिर्फ 5% वोट पूरा खेल बदल सकता है. लेकिन कैसे?

बिहार में हालिया जीत के बाद बीजेपी का जोश हाई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार की जीत के बाद सीधे कहा कि अब बंगाल में ‘जंगल राज’ खत्म करना है. बिहार, महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली की लगातार जीतों ने पार्टी को नया जोर दिया है. अब सबकी नजर 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव पर है. बंगाल बीजेपी के लिए सिर्फ एक राज्य नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा और विस्तार का सबसे बड़ा टेस्ट बन गया है- ठीक वैसे ही जैसे बिहार था. अब तक बीजेपी का बंगाल में कैसा परफॉर्मेंस रहा? बीजेपी के लिए बंगाल की जीत जरूरी क्यों? बंगाल जीतना बिहार जितना आसान क्यों नहीं? आइए एक्सप्लेनर में जानते हैं...

सवाल 1: बीजेपी का बंगाल में सफर अब तक कैसा रहा?

जवाब: आजादी के बाद 1952 में पश्चिम बंगाल में पहली बार विधानसभा चुनाव हुए थे. बीजेपी का गठन 1980 में हुआ, लेकिन 46 सालों में एक बार भी बीजेपी सरकार नहीं बना सकी. हालांकि, 2014 में मोदी लहर के बाद पार्टी के हालत कुछ बदले जरूर:

  • 2015 में पश्चिम बंगाल में बीजेपी के सिर्फ 2 सांसद थे और विधायक एक भी नहीं.  
  • 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 42 में से 18 सीटें जीत लीं.  
  • 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 38% वोट शेयर के साथ रिकॉर्ड 77 सीटें हासिल कीं. तृणमूल कांग्रेस (TMC) को 48% वोट मिले और 215 सीटें. बीजेपी विपक्ष में बैठी.
  • उसके बाद कुछ विधायकों के दलबदल से बीजेपी की ताकत थोड़ी घटी, लेकिन पार्टी ने हार नहीं मानी. आज बंगाल में मुकाबला साफ तौर पर दो मुख्य पार्टियों- बीजेपी और TMC के बीच है.
  • ममता बनर्जी 2011 में बंगाल की मुख्यमंत्री बनीं थीं. तब से वह 2011, 2014, 2016, 2019, 2021 और 2024 यानी 6 विधानसभा और लोकसभा चुनावों में बीजेपी को पटखनी दे चुकी हैं.

 

2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 38% वोट शेयर के साथ रिकॉर्ड 77 सीटें हासिल की थीं.
2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 38% वोट शेयर के साथ रिकॉर्ड 77 सीटें हासिल की थीं.

सवाल 2: 2026 में बीजेपी सरकार बनाने के कितना करीब है?

जवाब: 2021 के चुनाव में बीजेपी ने 38 सीटें सिर्फ 5% के मार्जिन से हारी थीं और 75 सीटें 10% के मार्जिन से. मतलब, छोटा-सा वोट स्विंग भी बड़ी तादाद में सीटें दिला सकता है. इलेक्शन एक्सपर्ट कहते हैं कि अगर बीजेपी TMC के सिर्फ 5% वोट भी अपने पाले में कर ले, तो उसकी कुल सीटें 75+77 यानी करीब 152 हो जाएंगी. पश्चिम बंगाल में बहुमत के लिए 148 सीटें चाहिए, यानी बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर सरकार बना सकती है.

दूसरी ओर एंटी-इनकंबेंसी, बेरोजगारी, स्थानीय असंतोष और TMC नेताओं में भ्रष्टाचार के आरोपों ने ममता बनर्जी की पार्टी के लिए रास्ता और मुश्किल कर दिया है.

 

पश्चिम बंगाल के लोकल मुद्दे TMC के लिए बने राह का रोड़ा
पश्चिम बंगाल के लोकल मुद्दे TMC के लिए बने राह का रोड़ा

सवाल 3: बीजेपी के लिए बंगाल जीतना इतना जरूरी क्यों है?

जवाब: पॉलिटिकल एक्सपर्ट रशीद किदवई कहते हैं कि बीजेपी के लिए बंगाल जीतना करो या मरो वाली स्थिति बन गई है, जिसकी 5 बड़ी वजहें हैं...

1. ब्रांड मोदी अब और मजबूत: बिहार जीत के बाद मोदी का कद और बढ़ गया है. पार्टी के अंदर और RSS के साथ तालमेल भी बेहतर हुआ है. बंगाल में ‘जंगल राज’ खत्म करने का वादा अब सिर्फ चुनावी नारा नहीं, बल्कि ब्रांड मोदी की विश्वसनीयता का सवाल है.

2. पूर्वी भारत में बीजेपी का विस्तार: बंगाल जीतने से बीजेपी पूर्व में अपनी पकड़ मजबूत कर लेगी. अभी तक उत्तर और पश्चिम में मजबूत बीजेपी पूर्व में TMC जैसी मजबूत क्षेत्रीय पार्टी से जूझ रही है. बंगाल पर कब्जा पूरे देश में बीजेपी की छवि को नया आयाम देगा.

3. 2026 में सत्ता का सीधा मौका: 294 सीटों वाली विधानसभा में 152 सीटें बहुमत से ज्यादा हैं. 5% वोट स्विंग से ही सरकार बन सकती है. इतना करीब पहुंचकर हारना बीजेपी के लिए बड़ा झटका होगा, जबकि जीत ऐतिहासिक होगी.

4. TMC के खिलाफ सीधा मुकाबला: बंगाल में कोई गठबंधन नहीं. बीजेपी अकेले TMC से लड़ रही है. यहां जीत का मतलब सिर्फ सीटें नहीं, बल्कि ममता बनर्जी की 14 साल पुरानी सत्ता का अंत है. ये बीजेपी के लिए ‘अकेले ही जीतने’ की ताकत साबित करेगा.

5. कैडर का मोरल और संगठनात्मक मजबूती: बिहार जीत ने कार्यकर्ताओं का जोश बढ़ाया है. बंगाल में समीक भट्टाचार्य जैसे नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति भी इसी दिशा में कदम है. 2026 की जीत पूरे संगठन को नई ऊर्जा देगी और 2024 लोकसभा के झटके को पूरी तरह भुला देगी.

सवाल 4: लेकिन क्या बंगाल जीतना बिहार जैसा आसान होगा?

जवाब: नहीं. CSDS के प्रोफेसर और इलेक्शन एनालिस्ट हिलाल अहमद कहते हैं कि बंगाल बिहार जितना आसान नहीं है. बंगाली पहचान, संस्कृति, इतिहास और राजनीति की बारीकियों की वजह से बीजेपी को यहां ‘घुसपैठिए’ मुद्दे पर सावधानी बरतनी होगी क्योंकि ये मुद्दा हिंदू वोट बैंक दोनों को प्रभावित कर रहा है. TMC सांस्कृतिक भावनाओं को अच्छे से भुनाती है. फिर भी, एंटी-इनकंबेंसी और मोदी ब्रांड की ताकत को देखते हुए बीजेपी आज बंगाल में सबसे मजबूत चुनौती देने की स्थिति में है.

हिलाल अहमद कहते हैं, 'बिहार जीतना बीजेपी के लिए आसान रहा क्योंकि वहां JDU के साथ गठबंधन था और नीतीश कुमार की पावरफुल इमेज बीजेपी के साथ थी. बंगाल में स्थिति अलग है. यहां सत्ताधारी पार्टी बीजेपी से हर कदम लोहा लेती रही है.'

वहीं, पॉलिटिकल एक्सपर्ट रशीद किदवई कहते हैं, 'बीजेपी ने 2021 के चुनाव में 77 सीटें जीती थीं. महज 10 सालों में बीजेपी 0 से 77 सीटों पर आ गई. अगर बीजेपी ने TMC के कुछ ही वोट प्रतिशत काट लिया, तो सरकार बनाने की राह आसान होगी. बहरहाल, ये राजनीति है, ऊंट किस करवट बैठेगा, यकीन के साथ नहीं कहा जा सकता है.'

बंगाल अब बीजेपी के लिए सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि एक बड़ी परीक्षा है. 2015 से शुरू हुआ सफर 2019-2021 में मजबूत हुआ. 2026 में 5% वोट स्विंग से सरकार बनाने का मौका है. बिहार की जीत ने रास्ता दिखा दिया है. अगर बीजेपी सांस्कृतिक संवेदनशीलता के साथ एंटी-इनकंबेंसी को भुनाती है, तो 2026 बंगाल उसकी सबसे बड़ी जीत बन सकता है. ये कहानी सिर्फ सीटों की नहीं, बल्कि बीजेपी की पूर्वी भारत में स्थायी जगह बनाने की है.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

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