कौन है जगतार सिंह हवारा, जिसकी पैरोल को लेकर पंजाब में मची सियासी हलचल
Who Is Jagtar Singh Hawara: पूर्व CM बेअंत सिंह हत्याकांड का दोषी जगतार हवारा फिर चर्चा में है. 2004 में सुरंग से जेल भागने वाला यह आतंकी आज भी पंजाब की 'पंथिक सियासत' का केंद्र है.

पंजाब की राजनीति में 'बंदी सिखों' की रिहाई का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है और इस पूरी सियासत के केंद्र में एक ही नाम गूंज रहा है— जगतार सिंह हवारा. प्रतिबंधित आतंकी संगठन 'बब्बर खालसा' का यह खूंखार सदस्य 1995 के चर्चित बेअंत सिंह हत्याकांड का मुख्य दोषी है. जेल की सलाखों के पीछे होने के बावजूद, हवारा का पंजाब की पंथिक राजनीति में गहरा रसूख है.
आखिर कौन है जगतार सिंह हवारा और क्यों वह 30 साल बाद भी राजनीतिक दलों के लिए अहम बना हुआ है? आइए जानते हैं.
मूल रूप से कहां का रहने वाला है हवारा?
जगतार सिंह हवारा पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले का मूल निवासी है. युवावस्था में ही वह चरमपंथी विचारधारा के संपर्क में आ गया था और बाद में प्रतिबंधित संगठन 'बब्बर खालसा इंटरनेशनल' (BKI) का एक अहम चेहरा बन गया.
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पूर्व CM बेअंत सिंह हत्याकांड का मास्टरमाइंड
हवारा का नाम सबसे ज्यादा तब चर्चा में आया, जब 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ स्थित पंजाब सिविल सचिवालय के बाहर एक भीषण आत्मघाती बम धमाका हुआ. इस खौफनाक हमले में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह सहित 17 लोगों की मौत हो गई थी.
जांच में सामने आया कि इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड जगतार सिंह हवारा ही था. उसने ही आत्मघाती हमलावर दिलावर सिंह की मदद की थी. इस मामले में हवारा को मुख्य दोषी करार दिया गया.
हॉलीवुड फिल्म जैसी थी 'बुड़ैल जेल ब्रेक' की घटना
हवारा सिर्फ अपने खूंखार मंसूबों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने दुस्साहस के लिए भी जाना जाता है. जनवरी 2004 में उसने अपने साथियों (परमजीत सिंह भ्योरा और जगतार सिंह तारा) के साथ मिलकर चंडीगढ़ की अति-सुरक्षित बुड़ैल जेल से भागने की साजिश रची. उन्होंने जेल के अंदर लगभग 90 फुट लंबी सुरंग खोदी और फरार हो गए. हालांकि, इस घटना के करीब डेढ़ साल बाद (जून 2005 में) दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उसे दोबारा गिरफ्तार कर लिया.
अदालत का फैसला: ताउम्र जेल में ही रहेगा हवारा
- मौत की सजा: मार्च 2007 में चंडीगढ़ की एक अदालत ने बेअंत सिंह हत्याकांड में हवारा को फांसी की सजा सुनाई थी.
- उम्रकैद में तब्दीली: अक्टूबर 2010 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने उसकी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया. लेकिन अदालत ने सख्ती से कहा कि हवारा को जीवन भर जेल से रिहा नहीं किया जाएगा. फिलहाल उसके खिलाफ 25 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं.
जेल से ही तय होती है पंथिक राजनीति!
उम्रकैद की सजा काट रहे हवारा का प्रभाव पंजाब के एक खास वर्ग में आज भी कम नहीं हुआ है. नवंबर 2015 में चरमपंथी संगठनों ने 'सरबत खालसा' (सिखों का महासम्मेलन) बुलाकर उसे श्री अकाल तख्त साहिब का समानांतर 'कार्यवाहक जत्थेदार' घोषित कर दिया था. यह घटना दिखाती है कि कट्टरपंथी गुटों में उसका कितना प्रतीकात्मक महत्व है.
आज भी शिरोमणि अकाली दल समेत कई सिख संगठन उसकी रिहाई (बंदी सिखों की रिहाई) की मांग उठाते रहते हैं. यही वजह है कि हवारा आज भी पंजाब की सियासत में एक बड़ा और संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है.
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