अमित शाह के बयान से तिलमिलाया विपक्ष, राहुल से अखिलेश तक किसने क्या बोला?
12 अगस्त को गृह मंत्री अमित शाह ने नीट और छात्रों के प्रदर्शन पर चर्चा करने का आग्रह किया, लेकिन विपक्ष लगातार अपनी मांगों पर विपक्ष अड़ा रहा. अब इस पूरे सत्र को लेकर विपक्ष की तरफ से क्या रिएक्शन आए.

मॉनसून सत्र खत्म होने को है. 13 अगस्त को आखिरी दिन है. ऐसे में पहली बार कोई सत्र है, जिसमें प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने किसी भी तरह की बहस में हिस्सा नहीं लिया. पूरा सत्र विपक्ष की कुछ चुनिंदा मुद्दों की मांग को लेकर हंगामे की भेंट चढ़ गया. इनमें प्रमुखता से जो मुद्दे विपक्ष ने उठाए, उनमें राम मंदिर का चंदा चोरी का मुद्दा, पेपर लीक और छात्रों के प्रदर्शन को लेकर रहा. इधर, 12 अगस्त को गृह मंत्री अमित शाह ने नीट और छात्रों के प्रदर्शन पर चर्चा करने का आग्रह किया, लेकिन विपक्ष लगातार अपनी मांगों पर अड़ा रहा. अब इस पूरे सत्र को लेकर विपक्ष लगातार बयानबाजी कर रहा है. आइए जानते हैं, विपक्ष की तरफ से क्या रिएक्शन आए.
अमित शाह की चुप्पी ही उनका कबूलनामा है: राहुल गांधी
लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा, जब किसी व्यक्ति के सच बोलने की हिम्मत नहीं होती, तो उसकी चुप्पी ही उसकी बात कह देती है. अमित शाह की चुप्पी ही उनका कबूलनामा है.
अखिलेश यादव ने क्या कहा है?
सरकार की तरफ से पेश FCRA बिल भी इस बार पास नहीं हो सका. इस पर सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव ने कहा, 'FCRA क्या है? FCRA सिर्फ अल्पसंख्यकों को निशाना बनाता है. जितने भी अहम बिल लाए जा रहे हैं, वे अल्पसंख्यकों के खिलाफ हैं. अगर FCRA आ सकता है, तो दूसरे फंड भी हैं—उनके लिए नियम क्यों नहीं बनाए जा सकते?'
उन्होंने कहा, 'समाजवादी पार्टी का रुख यह था कि दोनों मुद्दों पर बहस होना चाहिए. शिक्षा और परीक्षा के मामले में सवाल किसके खिलाफ उठाए गए? या धार्मिक संस्थानों के मामले में सवाल किसके खिलाफ उठाए गए? इसीलिए हम दोनों मुद्दों पर बहस चाहते हैं. सरकार के पास कोई जवाब नहीं है. लखनऊ से आई SIT रिपोर्ट में ऐसे कई नाम हैं जो सरकार या BJP से जुड़े हैं.'
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने क्या कहा?
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा है कि इस बार के सत्र में सरकार पूरी तरह से बैकफुट पर रही. प्रतापगढ़ी ने कहा, 'आजादी के बाद इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि पूरा सत्र बीतने को आ गया, कल अंतिम दिन है और देश के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने इस ससंदीय कार्यवाही में किसी भी बहस में हिस्सा नहीं लिया है. इससे शर्मनाक संसदीय मर्यादाओं के लिए और क्या हो सकता है?
उन्होंने कहा, 'अब जब सत्र का अंतिम दिन है जब वो भी तय कर चुके हैं कि अब न प्रधानमंत्री को भाग लेना है, न गृहमंत्री को भाग लेना है बल्कि हर चर्चा से भाग लेना है, तो अब सिर्फ मीडिया के सामने झूठ बोलकर डैमेज कंट्रोल करना चाहते हैं. जब आपने बच्चों पर लाठियां और पैलेट गन चलवाया, उस दिन से जब से सरकार संसद से भागी है, तब से वो संसद में आने का साहस नहीं जुटा पा रही है.'
रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के सांसद प्रेमचंद्रन क्या बोले?
रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के सांसद एनके प्रेमचंद्रन ने कहा, 'स्पीकर को चिट्ठी लिखने के बजाय, गृह मंत्री को सदन में आने से कौन रोक रहा है? क्या संसद में आना और उसमें शामिल होना गृह मंत्री की जिम्मेदारी नहीं है? संसद में आने के बजाय बाहर रहकर स्पीकर को चिट्ठी लिखना कि वे जवाब देने के लिए तैयार हैं, यह क्या दिखाता है? इससे पता चलता है कि उन्हें इस संसद और इस लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई भरोसा नहीं है. गृह मंत्री को सदन में आकर यह कहना चाहिए कि वे जवाब देने के लिए तैयार हैं या वे बहस में हिस्सा लेने में दिलचस्पी रखते हैं.'
इसके अलावा उन्होंने कहा, 'FCRA बिल के बारे में विपक्ष का लगातार यही रुख रहा है कि इस बिल को वापस लिया जाना चाहिए. लेकिन अफसोस की बात है कि इसे जॉइंट पार्लियामेंट्री कमिटी (JPC) के पास भेज दिया गया है. हम JPC का सहयोग करेंगे. हम वहां भी अपनी बात रखेंगे और उन्हें बताएंगे कि इस बिल को रद्द कर दिया जाना चाहिए.'
अन्य विपक्षा सांसदों ने क्या कहा है?
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने गृहमंत्री अमित शाह के बयान पर कहा, 'अगर आप सदन को कुछ बताना चाहते हैं, तो सबसे अच्छा तरीका सदन में आना है. पिछले 18-19 दिनों से आप सदन में आ ही नहीं रहे थे.'
समाजवादी सांसद डिंपल यादव ने कहा, मुझे नहीं लगता कि इस सरकार में विनम्रता, संवेदनशीलता या समझदारी जैसी कोई चीज है. मेरा मतलब है कि आप किसका इंतजार कर रहे हैं? आप विपक्ष का इंतजार क्यों कर रहे हैं? हमें उम्मीद थी कि वह आएंगे. अपना बयान देंगे.
कांग्रेस एमपी राजीव शुक्ला ने कहा, 'आखिरी दिन ऐसी बातें कहने का कोई फायदा नहीं है. अगर कोई बयान देना ही था, तो यह सब तब दिया चाहिए था, जब इसकी मांग उठ रही थी. तभी आप यह बात रख सकते थे. जब सरकार चर्चा चाहती थी, तब वे यह मुद्दा (सदन के सामने) उठा सकते थे. मांग सिर्फ छात्रों के साथ हुई घटना पर ही नहीं, बल्कि राम मंदिर के दान में हुई चोरी के मुद्दे पर भी चर्चा की थी, लेकिन वे तैयार नहीं थे. अगर वे चाहते, तो चर्चा बहुत पहले हो सकती थी.'
इंडियन मुस्लिम लीग के सांसद ईटी मुहम्मद बशीर ने कहा, 'उन्होंने बहुत गलत का काम किया. ऐसा संसदीय लोकतंत्र में कभी नहीं सुना गया. हमने उनसे कहा था कि जेपीसी को भेजने से पहले इस पर चर्चा होना चाहिए. हमने कहा कि गृहमंत्री को सदन में आना चाहिए. उन्होंने इसे नजरंदाज कर दिया. उन्होंने हमारी का कोई सम्मान नहीं किया. इस मामले में हम शुरुआती चर्चा कर सकते थे. उसके बाद इसे जेपीसी को भेजा जा सकता था. इस तरह उन्होंने सिद्धांतों को नहीं माना. उन्होंने बहुत गलत किया.'
सपा सांसद इकरा हसन ने कहा, अगर वह चर्चा के लिए तैयार होते, तो सदन में दिखते, अभी वह कहीं नहीं नजर आ रहे हैं. अगर वह आते हैं, तोहम उनकी बात सुनते. विपक्ष काफी समय से मांगे कर रहा है. हमारे दो मुख्य मुद्दे हैं. पहला नीट आंदोलन और 20 तारीख की बर्बरता पर अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है. फिर डोनेशन की चोरी का मुद्दा है. लेकिन उन्हें पहले सामने आना होगा.
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा, 'समय तय करने वाले आप कौन होते हैं? हम यहां 18 दिनों से संघर्ष कर रहे हैं. मांग कर रहे हैं कि आप आएं, और छात्रों तथा फंड के गलत इस्तेमाल के बारे में जवाब दें. ठीक है. आप 3 से 3 तक वहां बैठिए.' इसके अलावा FCRA बिल पर उन्होंने कहा कि हम कल चर्चा करेंगे कि यह किसके दवाब में हो रहा है.
























