Aravalli Mining: अरावली में खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक तो पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव का आया रिएक्शन, जानें क्या कहा?
Aravalli Mining Case: केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि सरकार अरावली पहाड़ियों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और मंत्रालय कोर्ट की इस नई समिति को हर आवश्यक सहयोग प्रदान करेगा.

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोमवार (29 दिसंबर, 2025) को अरावली पर्वतश्रृंखलाओं की परिभाषा और खनन मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट के दिए नए फैसले का स्वागत किया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में अरावली पहाड़ियों को लेकर अपने पिछले आदेश पर रोक लगाते हुए इस मामले के अध्ययन के लिए एक नई समिति बनाने के निर्देश दिए हैं.
इस आदेश का स्वागत करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार अरावली पहाड़ियों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि पर्यावरण मंत्रालय सुप्रीम कोर्ट की इस नई समिति को हर आवश्यक सहयोग प्रदान करेगा. इस दौरान उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अरावली रेंज में नई माइनिंग लीज या पुराने लीज के रिन्यूअल पर पूरी तरह से रोक जारी है.
भूपेंद्र यादव ने एक्स पर किया पोस्ट
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया. पोस्ट में भूपेंद्र यादव ने कहा, ‘मैं अरावली रेंज से जुड़े अपने आदेश पर रोक लगाने और मुद्दों का अध्ययन करने के लिए एक नई समिति बनाने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का स्वागत करता हूं.’
I welcome the Supreme Court directions introducing a stay on its order concerning the Aravalli range, and the formation of a new committee to study issues.
— Bhupender Yadav (@byadavbjp) December 29, 2025
We stand committed to extending all assistance sought from MOEFCC in the protection and restoration of the Aravalli range.…
उन्होंने कहा, ‘हम अरावली रेंज की सुरक्षा और बहाली में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MOEFCC) से मांगी गई सभी सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं. मौजूदा स्थिति के अनुसार, नए माइनिंग लीज या पुराने माइनिंग लीज के रिन्यूअल के संबंध में खनन पर पूरी तरह से रोक जारी है.’
सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर को दिया था पिछला आदेश
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने 20 नवंबर, 2025 को दिए गए अपने फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है. कोर्ट ने अपने पिछले आदेश में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की ओर से गठित एक समिति के सुझाए गए अरावली पहाड़ियों और पर्वतश्रृंखला की एक समान परिभाषा को स्वीकार किया था. हालांकि, अब कोर्ट ने अपने फैसले पर रोक लगाते हुए अरावली पहाड़ से जुड़े पूरे मामले की गहराई से अध्ययन करने के लिए एक्सपर्ट्स की एक नई उच्च स्तरीय समिति बनाने के निर्देश दिया है.
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Source: IOCL





















