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Tunnel Accident: आठ राज्य, 41 मजदूर और 15 दिन से जिंदगी की जद्दोजहद जारी, क्या मुश्किल आ गई कि टनल में फंसे मजदूरों को निकालने का काम अटक गया

Tunnel Accident: जिस तरह से ऑगर मशीन का ब्लेड टूट गया है और सेना को मैनुअल ड्रिलिंग के लिए बुलाया गया है, उसे देखते हुए ऐसा लग रहा है कि बचाव अभियान खत्म होने में अभी हफ्तों लग सकते हैं.

Tunnel Accident Rescue Operation Update: उत्तराखंड की सिलक्यारा सुरंग में पिछले 15 दिनों से फंसे 41 श्रमिकों को निकालने के लिए जारी बचाव अभियान पर रविवार (26 नवंबर) को भी विराम लगा हुआ है. पिछले तीन दिनों से इस बात की उम्मीद की जा रही है कि बचाव अभियान अंतिम चरण में है और किसी भी वक्त मजदूरों को बाहर निकाला जा सकता है, लेकिन 10 मीटर की आखिरी पाइप बिछाने का काम मुश्किल हो गया है. इसकी वजह से मजदूरों को बाहर निकलने का काम अटक गया है. इसकी सबसे बड़ी वजह मजदूरों तक पहुंचने के लिए टनल के मलबे में ड्रिलिंग के लिए इस्तेमाल हो रही अमेरिका निर्मित ऑगर मशीन में आई खराबी है.

मजदूरों तक पहुंचने के लिए 80 सेंटीमीटर व्यास की पाइप 46.9 मीटर तक बिछा दी गई है. इसी के अंदर ऑगर मशीन के ड्रिलिंग ब्लेड्स को डालकर आगे की ओर ड्रिलिंग की जा रही थी, जहां शुक्रवार रात इस्पात की जाली रास्ते में होने की वजह से मशीन का ब्लेड टूट कर फंस गया है. अब इन हिस्सों को काटकर हटाने के लिए हैदराबाद से हवाई मार्ग के जरिए एक प्लाज्मा कटर मशीन मंगाई गई है.

आगे मैन्युअल ड्रिलिंग करेगी सेना
न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट की मानें तो अब आगे बचाव अभियान में मैन्युअल ड्रिलिंग का काम सेना के जवान करेंगे. बचाव कार्य को आगे बढ़ाने के लिए पाइप के अंदर से मशीन के हिस्से को पूरी तरह से हटाना आवश्यक है. श्रमिकों को बाहर निकालने का मार्ग तैयार करने के लिए मलबे में हाथ से ड्रिलिंग के जरिए पाइप डालने होंगे.

पहाड़ से होगी वर्टिकल ड्रिलिंग
इसके अलावा वर्टिकल ड्रिलिंग के लिए पहाड़ी की चोटी पर सुरंग के ऊपर एक ड्रिल मशीन भेजी गई है. भारतीय सेना की ‘कोर ऑफ इंजीनियर्स’ के समूह ‘मद्रास सैपर्स’ की एक इकाई बचाव कार्यों में सहायता के लिए रविवार को घटनास्थल पहुंची है.

शुक्रवार रात से ही रुकी हुई है ड्रिलिंग, अभी लगेगा और अधिक समय
सिलक्यारा में धंसी निर्माणाधीन सुरंग में ‘ड्रिल’ करने में इस्तेमाल की जा रही ऑगर मशीन के ब्लेड शुक्रवार रात मलबे में फंस गए थे, जिसके बाद अधिकारियों को अन्य विकल्पों पर विचार करना पड़ा. इससे बचाव कार्य में कई दिन या कई सप्ताह और लगने की संभावना है. न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक मलबे के शेष 10 या 12 मीटर हिस्से में हाथ से ‘ड्रिलिंग’ या ऊपर की ओर से 86 मीटर नीचे ‘ड्रिलिंग’ की जाएगी.

बचाव अभियान पर मंडरा रहा बर्फबारी का खतरा
उत्तराखंड के इस युद्ध स्तरीय बचाव अभियान पर इंद्र का कोप भी बरपने वाला है. मौसम विभाग ने सोमवार को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा के ऊपरी इलाकों में भारी बारिश के साथ-साथ बर्फबारी की संभावना व्यक्त की है. सिलक्यारा, बड़कोट उत्तरकाशी के वो इलाके हैं जहां भारी बर्फबारी होती है. पहाड़ी मिट्टी होने की वजह से बारिश के बाद हल्की होकर और धंसने लगती है.

 ऐसा हुआ तो सुरंग के अंदर डाली गई पाइप जिस सहारे पर टिकी है उसमें दरार आ सकती है. यहां रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे लोगों की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती होगी. अगर मौसम विभाग की चेतावनी के हिसाब से यहां बर्फबारी होती है तो निश्चित तौर पर रेस्क्यू ऑपरेशन प्रभावित होगा. बर्फबारी के बाद बिजली की दिक्कतें पैदा हो सकती हैं. साथ ही ठंड बढ़ने के कारण सुरंग में मजदूरों को भी दिक्कतें होंगी. इसलिए सेना के जवान आज रविवार को ड्रिलिंग के मुश्किल हिस्से को पूरा कर लेना चाहते हैं.

बचाव अभियान की निगरानी कर रहे हैं मुख्यमंत्री धामी 
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद पिछले कई दिनों से मौके पर डटे हुए हैं और खुद ही बचाव अभियान की निगरानी कर रहे हैं. उन्होंने उत्तरकाशी में अपना एक अस्थाई कैंप खोला है जहां से मुख्यमंत्री दफ्तर के बाकी काम कर रहे हैं. उनके मुताबिक जिस पाइप के अंदर घुसकर मैनुअल ड्रिलिंग की जानी है उसमें पहले से फंसी ऑगर मशीन के कटे हुए हिस्से से बाहर आते ही हाथ से ड्रिलिंग शुरू होगी जो काफी मेहनत भरी और टाइम टेकिंग प्रक्रिया है. 

पीएमओ भी रख रहा है लगातार निगरानी 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी निर्माणाधीन सुरंग के अंदर फंसे 41 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए राज्य में चल रहे बचाव अभियान के बारे में हर रोज जानकारी ले रहे हैं. सूत्रों ने बताया है कि प्रधानमंत्री दफ्तर (PMO) भी लगातार बचाव अभियान की निगरानी कर रहा है और राज्य सरकार से अपडेट ले रहा है. 

बढ़ रही है परिजनों की चिंता
ऑगर मशीन के अगले हिस्से के टूट जाने के बाद काम बाधित है. इसकी वजह से अंदर फंसे हुए श्रमिकों के परिजनों की चिंता बढ़ती जा रही है. आपदा स्थल के आस-पास ठहरे हुए परिजन यहां स्थापित की गई कम्यूनिकेशन टेक्नोलॉजी के जरिये अकसर श्रमिकों से बात करते करते हैं. मजदूरों तक एक 6 इंच की पाइप डाली गई है जिसके जरिए एनडीआरएफ के मनोचिकित्सक भी मजदूरों से बात कर उनकी मानसिक स्थिति ठीक रखने और रिलैक्स रहने की सलाह दे रहे हैं.  पाइप से इंडोस्कोपिक कैमरा भी डाला गया है जिससे अंदर के हालात देखे जा रहे हैं. सुरंग के अंदर मजदूर कई गेम्स खेल कर खुद को रिलैक्स रख रहे हैं और नियमित व्यायाम भी करते हैं.

आठ राज्यों के मजदूरों में सबसे अधिक झारखंड के

फंसे हुए श्रमिकों में आठ राज्यों के मजदूर हैं जिनकी जिदंगी की जद्दोजहद जारी है. इनमें सबसे अधिक झारखंड के हैं. झारखंड के 15 लोग अंदर सुरंग में फंसे हैं, जबकि यूपी के 8, उत्तराखंड के 2, हिमाचल प्रदेश का एक , बिहार के 5, पश्चिम बंगाल के 3, असम के 2 और ओडिशा के 5 मजदूर सुरंग में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं.

दिवाली के दिन अचानक धंस गई थी टनल
आपको बता दें कि दिवाली के दिन 12 नवंबर (रविवार) को निर्माणाधीन सुरंग भूस्खलन के बाद धंस गई थी,जिसमें 41 मजदूर फंस गए हैं. दुर्घटना के 15 दिन बीत जाने के बाद भी अत्यधिक भारी मशीनों से भी मलबे को नहीं हटाया जा सका है और एक भी मजदूर बाहर नहीं निकाल पाए हैं. इसकी वजह से परिजनों में निराशा और नाराजगी बढ़ रही है. यह टनल महत्वाकांक्षी चारधाम परियोजना का हिस्सा है, जो बद्रीनाथ, केदारनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री तक कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए एक नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पहल का हिस्सा है.

 ये भी पढ़ें :Tunnel Accident: अंदर सुरंग में फंसे मजदूर, बाहर बर्फबारी का खतरा.. उत्तरकाशी में येलो अलर्ट के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन में चुनौती! 10 बड़ी बातें

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