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प्रवासी मजदूरों को वापस भेजने के लिए ठाकरे सरकार ने बनाई रणनीति

ठाकरे सरकार के आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र में साढे 6 लाख अलग अलग राज्यों के मजदूर मौजूद हैं. प्रवासी मजदूरों को उनके गृहराज्य भेजने से ठाकरे सरकार को दूसरी राहत ये मिलेगी कि वो इतने सारे लोगों के खानपान की जिम्मेदारी से मुक्त हो जायेगी.

मुंबई: केंद्र की ओर से देश के अलग अलग भागों में लॉकडाउन की वजह से फंसे मजदूरों, पर्यटकों, छात्रों और तीर्थयात्रियों को निकालने के लिये बनाई गई नीति से सबसे ज्यादा राहत महाराष्ट्र की ठाकरे सरकार को मिली है. ठाकरे सरकार अब ऐसे तमाम लोगों को उनके गृहराज्य भेजने के लिये रणनीति बना रही है और तमाम इंतजाम कर रही है.

ठाकरे सरकार के आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र में साढे़ 6 लाख अलग अलग राज्यों के मजदूर मौजूद हैं. इनमें से कई मजदूर झुग्गी बस्तियों में रहते हैं. इन झुग्गियों की पतली, संकरी गलियों के इर्द गिर्द बने घरों में 5 से 15 लोग तक रहते हैं. ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन नहीं हो पाता. इसके अलावा इन झुग्गियों में रहनेवाले लोगों को सार्वजनिक शौचालयों और नलों का इस्तेमाल करना पड़ता है. इन तमाम कारणों से झुग्गी बस्तियों में बडे पैमाने पर संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है. मुंबई के धारावी और वर्ली की झुग्गियां इसकी मिसाल हैं. ऐसे में इन झुग्गियों से अगर भीड़ कम होती है तो कोरोना के संक्रमण पर काबू पाने में काफी सफलता मिलेगी.

प्रवासी मजदूरों को उनके गृहराज्य भेजने से ठाकरे सरकार को दूसरी राहत ये मिलेगी कि वो इतने सारे लोगों के खानपान की जिम्मेदारी से मुक्त हो जायेगी. लाखों लोगों की भूख मिचाने का इंतजाम सरकार के लिये मुश्किल हो रहा था, हालांकि 14 अप्रैल को जब बांद्रा इलाके में बड़ी तादाद में लोगों की भीड़ उमड़ी थी तो उसके बाद ठाकरे ने प्रवासी मजदूरों से अपील की थी कि वे चिंता न करें. सरकार उनकी देखभाल करेगी. इस अपील के बावजूद भी कई मजदूरों को अपना और अपने परिवार के पेट भरने के लिये संघर्ष करना पड़ रहा था. हजारों की तादाद में मजदूर पैदल ही अपने राज्यों के लिये निकल पड़े क्योंकि ट्रेनें नहीं चल रहीं थीं.

अब जब केंद्र से मंजूरी मिल गई है तो उसके बाद ठाकरे सरकार ने मजदूरों को भेजने के लिये योजना बनाना शुरू कर दिया है. शहरी इलाकों में पुलिस के डीसीपी और ग्रामीण इलाकों में जिलाधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया गया है जो मजदूरों की वापसी के अभियान का समन्वय करेंगे. वापस लौटने की चाहत रखने वाले मजदूरों को प्रशासन के पास एक फॉर्म जमा करना होगा जिसमें उनके गृहराज्य का पता, उनके वाहन का ब्यौरा और उनकी संक्षिप्त जानकारी होगी. किसी भी वाहन में उसकी क्षमता के 50 फीसदी मुसाफिर ही बैठ सकेंगे. वापस जाने वालों की जांच होंगी और उनमें अगर कोरोना का कोई भी लक्षण पाया गया तो जाने नहीं दिया जायेगा. किसी एक ठिकाने पर जानेवालों की संख्या अगर 1 हजार तक होगी तो ट्रेन का इंतजाम किया जायेगा और 25 तक होगी तो बस की व्यवस्था की जायेगी. अगर कोई शख्स किसी हॉटस्पॉट में रह रहा है तो उसे जाने की इजाजत नहीं दी जायेगी.

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