तेलंगाना सुरंग हादसे के रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल हुए सिलक्यारा के हीरो, कब बाहर आएंगे टनल में फंसे 8 लोग?
Telangana Tunnel Collapse: तेलंगाना सुरंग हादसे के बाद टनल में आठ लोग अबतक फंसे हुए हैं. इस रेस्क्यू ऑपरेशन में अब सिलक्यारा हादसे का रेस्क्यू करने वाले हीरो शामिल हो गए हैं.

Telangana Tunnel Accident: तेलंगाना के नगरकुर्नूल जिले में हुए टनल हादसे में आठ लोग बीते तीन दिनों से फंसे हुए हैं. उन्हें टनल से निकालने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें जुटी हुई हैं. इनके अलावा अब उत्तराखंड के सिलक्यारा सुरंग हादसे के बाद रेस्क्यू करने वाली टीम के छह लोग भी इस रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल हो चुके हैं. इस रेस्क्यू में सबसे बड़ी चुनौती ये है कि टनल में फंसे किसी भी शख्स से अबतक संपर्क नहीं हो पाया है.
श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल (SLBC) सुरंग में फंसे लोगों के रेस्क्यू में सिलक्यारा के हीरो भी शामिल हो गए हैं, जिसके बाद पीड़ित परिवारों को एक उम्मीद जगी है. हालांकि तेलंगाना सुरंग में रेस्क्यू टीम के सामने पानी और वहां जमा हुई गाद बहुत बड़ी चुनौती है. इसकी वजह से टीमें टनल बोरिंग मशीन और मलबेसे आगे नहीं बढ़ पाई हैं.
एक अधिकारी ने बताया है कि तेलंगाना सरकार ने उत्तराखंड सुरंग बचाव दल को रैट-होल माइनर्स के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन में मदद के लिए बुलाया है क्योंकि उन्हें इसमें महारत हासिल है. ऐसी स्थिति में ज्यादा लोगों का होना बेहतर है. हमें उम्मीद है कि सभी की जान बच जाएगी. बता दें कि सीएम रेवंत रेड्डी इस रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी कर रहे हैं. तेलंगाना के मंत्री भी लगातार घटनास्थल का दौरा कर वहां की जानकारी उन तक पहुंचा रहे हैं.
तेलंगाना के मंत्री उत्तम रेड्डी ने बताया कि टनल के प्राकृतिक पत्थर खिसकने की वजह से पानी और मिट्टी अचानक अंदर घुस गई, जिससे हालात और गंभीर हो गए. टनल में 12-13 फीट तक पानी भर गया है, जिससे राहत कार्य प्रभावित हो रहा है.
कब हुआ था सिलक्यारा हादसा?
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में बीते साल सिलक्यारा सुरंग में उस समय हादसा हुआ था, जब नाइट शिफ्ट खत्म कर मजदूर बाहर निकलने की तैयारी कर रहे थे. सुबह करीब पांच बजे सुरंग के करीब 200 मीटर अंदर भूस्खलन हुआ और इसमें 41 मजदूर फंस गए थे, जिनके रेस्क्यू के लिए एसडीआरए, एनडीआरएफ समेत कई टीमें लगी हुई थीं, लेकिन बाद रैट माइनर्स टीम ने ऑपरेशन चलाकर उन्हें 17 दिनों बाद बाहर निकाला. इस रेस्क्यू ऑपरेशन की मॉनिटरिंग खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे थे. 4.86 किमी लंबी सुरंग की लागत करीब 850 करोड़ रुपये थी.
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