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12वीं पास ने 10वीं पास पद पर ले ली नौकरी, क्या उच्च योग्यता छिपाने पर हो सकता है बर्खास्त? SC पहुंचा मामला

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि याचिकाकर्ता ने कार्य सहायक के पद के लिए आवेदन किया था, जिसके लिए निर्धारित योग्यता 10वीं पास थी और उसने यह खुलासा नहीं किया था कि वह 12वीं पास है.

सुप्रीम कोर्ट मंगलवार (2 जून, 2026) को इस मुद्दे पर विचार करने को सहमत हो गया कि क्या किसी सरकारी कर्मचारी को नौकरी के लिए निर्धारित डिग्री से अधिक योग्यता रखने की जानकारी छिपाने के कारण सेवा से बर्खास्त किया जा सकता है.

सुप्रीम कोर्ट तेलंगाना हाईकोर्ट के उस फैसले पर विचार करेगी, जिसमें अनुसूचित जनजाति (ST) के एक कर्मचारी की सेवा को इस आधार पर समाप्त करने के केंद्र सरकार के आदेश को बरकरार रखा गया था कि उसने कार्य सहायक की नौकरी पाने के लिए 12वीं पास होने की जानकारी छिपाई थी, जबकि इस पद के लिए 10वीं पास की योग्यता निर्धारित की गई थी.

जस्टिस पीएस नरसिम्हा, जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की बेंच ने तेलंगाना हाईकोर्ट के 27 नवंबर 2025 के फैसले के खिलाफ पवार सुभाष की याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया. बेंच ने सुभाष की ओर से पेश वकील से कहा, 'यह फैसला प्रथम दृष्टया गलत है. हम फैसले पर विचार करेंगे. सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला पहले से ही मौजूद है, जिसमें कहा गया है कि उच्च योग्यता अयोग्यता का आधार नहीं हो सकती.'

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि याचिकाकर्ता ने कार्य सहायक के पद के लिए आवेदन किया था, जिसके लिए निर्धारित योग्यता 10वीं पास थी और उसने यह खुलासा नहीं किया था कि वह 12वीं पास है. अदालत ने कहा था कि सुभाष ने 10वीं कक्षा की परीक्षा 2003 में, जबकि 12वीं कक्षा की परीक्षा 2006 में पास की थी और उसने 26 जुलाई 2010 को ‘कार्य सहायक’ के पद के लिए आवेदन किया था.

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हाईकोर्ट ने कहा था कि सुभाष की ओर से की गई घोषणा के आधार पर उसे इस पद के लिए चुना गया था. अदालत ने कहा था कि 25 मई 2013 को सुभाष ने एक घोषणा पत्र पेश किया, जिसमें उसने खुद के 12वीं कक्षा पास होने की जानकारी दी. हाईकोर्ट ने कहा कि आवेदन के चरण में और बाद में सत्यापन प्रक्रिया के दौरान इस महत्वपूर्ण जानकारी को जानबूझकर छिपाने के लिए केंद्र सरकार ने 27 मई 2013 को सुभाष की सेवाएं समाप्त कर दी थीं.

सुभाष ने बर्खास्तगी के आदेश को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के समक्ष चुनौती दी थी, जिसने 27 मई 2013 के आदेश को रद्द कर दिया था और केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह सुभाष को सरकारी पद पर रखने के पहलू पर पुनर्विचार करे, जिसके लिए वह अन्यथा योग्य था और एक स्पष्ट आदेश पारित करे.

सरकार ने मामले पर पुनर्विचार करने के बाद 30 अप्रैल 2022 को एक विस्तृत आदेश पारित किया, जिसमें कहा गया कि याचिकाकर्ता सरकारी पद के लिए अनुपयुक्त है. सरकार ने दोहराया कि सुभाष ने आवेदन पत्र, शपथ पत्र और घोषणा पत्र में अपनी उच्च योग्यता को जानबूझकर और बार-बार छिपाया. सरकार ने कहा कि जानकारी छिपाने का कृत्य स्पष्ट रूप से याचिकाकर्ता में सत्यनिष्ठा की कमी को दर्शाता है, जो उसे सरकारी पद के लिए अनुपयुक्त बनाता है.

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सुभाष ने सरकार के फैसले के खिलाफ फिर से सीएटी का रुख किया. हालांकि, इस बार सीएटी ने इस आधार पर फैसले को बरकरार रखा कि याचिकाकर्ता ने जानबूझकर और सोची-समझी रणनीति के तहत जानकारी छिपाई थी. सीएटी के फैसले से असंतुष्ट सुभाष ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की और दलील दी कि अगर कोई तथ्य छिपाया गया था, तो वह ‘महत्वपूर्ण तथ्य’ नहीं था.

सुभाष ने सुप्रीम कोर्ट के दो फैसलों को आधार बनाया था, जिनमें कहा गया था कि उच्च योग्यता का होना अयोग्यता का आधार नहीं है. हालांकि, उच्च न्यायालय सुभाष की दलीलों से संतुष्ट नहीं हुआ और उसने याचिका खारिज दी.

Input By : PTI
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