सुप्रीम कोर्ट ने एडवोकेट विक्रम सिंह को तत्काल रिहा करने का दिया आदेश, मर्डर केस में हरियाणा पुलिस ने किया था गिरफ्तार
एडवोकेट विक्रम सिंह के वकील विकास सिंह ने कहा कि उन्होंने दिल्ली के वकीलों को मनाया है कि इस मुद्दे पर हड़ताल जारी न रखें क्योंकि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की जा चुकी है.

सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के मामले में गिरफ्तार दिल्ली के वकील विक्रम सिंह को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है. विक्रम सिंह को गुरुग्राम पुलिस के विशेष कार्यबल (STF) ने हत्या के एक मामले में गिरफ्तार किया था. बुधवार (12 नवंबर, 2025) को मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस एन वी अंजारिया की बेंच ने 10,000 रुपये के जमानती बॉन्ड जमा करने पर विक्रम सिंह को तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया.
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार (न्यायिक) को निर्देश दिया कि वे कोर्ट के फैसले की जानकारी गुरुग्राम के पुलिस आयुक्त को दें ताकि उसका तत्काल अनुपालन किया जा सके. सुनवाई शुरू होने पर विक्रम सिंह के वकील सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने चिंता जताई कि क्रिमिनल लॉ में प्रैक्टिस करने वाला कोई भी व्यक्ति अब इस तरह के बलपूवर्क उपायों का शिकार हो सकता है. विकास सिंह सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं.
उन्होंने कहा कि विक्रम सिंह गैंगस्टर्स का केस लड़ रहे थे, लेकिन वकीलों को लेकर पुलिस का ये रवैया अस्वीकार्य है. विकास सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि हर गिरफ्तार व्यक्ति को उसकी गिरफ्तारी के आधारों की जानकारी लिखित रूप में और ऐसी भाषा में दी जानी चाहिए जिसे वह समझ सके, चाहे अपराध का स्वरूप कुछ भी हो. एडवोकेट विकास सिंह ने आरोप लगाया कि एसटीएफ ने ऐसा नहीं किया.
विकास सिंह ने यह भी कहा कि उन्होंने दिल्ली के वकीलों को मनाया है कि इस मुद्दे पर हड़ताल जारी न रखें क्योंकि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की जा चुकी है. इन दलीलों पर गौर करते हुए कोर्ट ने हरियाणा और दिल्ली सरकारों और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस जारी किया.
सीजेआई ने आदेश में कहा, 'याचिकाकर्ता एक वकील हैं और कानून की प्रक्रिया से बचने की संभावना नहीं है. अतः उन्हें अंतरिम राहत दी जाती है और 10,000 रुपये के मुचलके पर तत्काल रिहा किया जाता है. मामले को अगले बुधवार को सूचीबद्ध किया जाए. सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार (न्यायिक) इस आदेश को गुरुग्राम पुलिस आयुक्त को संप्रेषित करें..'
कोर्ट ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि एसटीएफ अधिकारी गिरफ्तार वकील के संपर्क में थे. बेंच ने कहा, 'याचिकाकर्ता का कहना है कि एएसआई (सहायक उपनिरीक्षक) के कहने पर वह थाने गए लेकिन वहां पहुंचने के बाद उन्हें गिरफ्तारी का कारण बताए बिना हिरासत में ले लिया गया.'
दिल्ली की विभिन्न जिला अदालतों के बार एसोसिएशन ने 6 नवंबर को वकील को झूठे हत्या के मामले में फंसाए जाने के विरोध में हड़ताल की थी. सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में उनकी तत्काल रिहाई और एसटीएफ की कार्रवाई की न्यायिक जांच का अनुरोध किया गया है. याचिका में यह भी अनुरोध किया गया कि भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 34 और शस्त्र कानून की धारा 25 के तहत दर्ज सभी आपराधिक कार्यवाहियों को रद्द किया जाए.
साल 2019 से एडवोकेट विक्रम सिंह दिल्ली बार काउंसिल में रजिस्टर्ड हैं और फिलहाल वह फरीदाबाद जेल में बंद हैं. याचिका में कहा गया कि वकील को तब निशाना बनाया गया जब उन्होंने कोर्ट में आवेदन दायर कर आरोप लगाया कि उनके मुवक्किल ज्योति प्रकाश उर्फ बाबा से हिरासत में मारपीट की गई. बाबा के एसटीएफ हिरासत में रहने के दौरान पैर में फ्रैक्चर हो गया था.
याचिका में कहा गया है, 'जांच एजेंसी की जवाबी कार्रवाई के परिणामस्वरूप मेरी अवैध गिरफ्तारी हुई.' याचिका में कहा गया है कि विक्रम सिंह को 31 अक्टूबर को गिरफ्तारी के लिखित आधार या स्वतंत्र गवाहों के बिना गिरफ्तार किया गया, जो संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 का उल्लंघन है.
एक नवंबर को फरीदाबाद के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने विक्रम सिंह को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. सूरज भान मर्डर केस में एक एफआईआर दर्ज हुई थी. सूरज भान को कपिल संगवान गैंग ने गोली मारी थी. 16 मार्च, 2024 को विक्रम सिंह के मुवक्किल ज्योति प्रकाश की इस मामले में गिरफ्तारी हुई थी.
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Source: IOCL





















