'केरल के शख्स को महाराष्ट्र के मामले में इतनी रुचि क्यों?' हेट स्पीच केस में सरकार का सवाल, सुप्रीम कोर्ट ने दिया ये आदेश
Supreme Court On Hate Speech: हिंदू जन आक्रोश रैली में भड़काऊ भाषण न देने की मांग को लेकर याचिका दायर करने वाले केरल के शाहीन अब्दुल्ला पर महाराष्ट्र सरकार ने सवाल उठाए हैं.

Hate Speech Case: सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि मुंबई में होने जा रही हिंदू जन आक्रोश रैली में भड़काऊ भाषण न दिए जाएं. कोर्ट ने केरल के रहने वाले याचिकाकर्ता शाहीन अब्दुल्ला की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया. कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस कार्यक्रम की वीडियोग्राफी करवाए.
सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार ने याचिकाकर्ता पर सवाल उठाते हुए कहा कि केरल के व्यक्ति को महाराष्ट्र के मामले में इतनी रुचि क्यों है. राज्य सरकार के लिए पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, "एक ही समुदाय के कार्यक्रमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक पैटर्न के तहत याचिकाएं दाखिल हो रही है. कोर्ट के मंच का इस्तेमाल हो रहा है." याचिकाकर्ता के लिए पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने इसका विरोध किया.
किस निर्देश को आधार बनाया गया?
साल 2018 में तहसीन पूनावाला बनाम भारत सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भीड़ की हिंसा रोकने को लेकर निर्देश दिए थे. उस फैसले में प्रशासन की ज़िम्मेदारी तय की गई थी कि वह भड़काऊ कार्यक्रमों पर रोक लगाए. हाल ही में इस फैसले का हवाला देते हुए कई याचिकाएं दाखिल हुई है. इनमें अलग-अलग राज्यों में हिंदू धर्म संसद समेत दूसरे कार्यक्रमों पर रोक की मांग की गई है.
याचिका में क्या कहा गया?
शाहीन अब्दुल्ला की याचिका में भी मुंबई में पिछले दिनों हुई हिंदू जन आक्रोश रैली का हवाला दिया गया है. कहा गया है कि इसमें मुसलमानों के आर्थिक बहिष्कार के भाषण दिए गए. याचिकाकर्ता ने 5 फरवरी को फिर से ऐसे कार्यक्रम के होने का दावा करते हुए इसे रोकने की मांग की थी. इस पर महाराष्ट्र सरकार ने कहा कि अभी तक इस तरह के कार्यक्रम की कोई अनुमति मांगी ही नहीं गई. जब अनुमति मांगी जाएगी, तब सुनिश्चित किया जाएगा कि कार्यक्रम में कोई भड़काऊ भाषण न हो.
सरकार ने क्या कहा?
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह भी कहा कि वह 29 जनवरी को हुई रैली पर कोर्ट में जवाब दाखिल करेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि 'सकल हिंदू समाज' नाम की संस्था को सिर्फ इसलिए भविष्य में सभा के आयोजन से नहीं रोका जा सकता कि याचिकाकर्ता उस पर आपत्ति कर रहा है.
जस्टिस के एम जोसेफ की अध्यक्षता वाली बेंच ने उनके जवाब को नोट करते हुए कहा कि अगर मुंबई में संस्था की तरफ से कोई कार्यक्रम होता है तो पुलिस उसकी वीडियोग्राफी करवाएं और 2 हफ्ते में उसका ब्यौरा कोर्ट में पेश करे.
यह भी पढ़ें- Gyanvapi: बढ़ सकती हैं ओवैसी और अखिलेश की मुश्किलें! हेट स्पीच मामले में आज होगी सुनवाई























