ब्रह्मांड का रहस्य बताने वाले वैज्ञानिक ने 76 साल तक मौत को दी मात, कहा था- औरतें मेरे लिए पूर्ण रहस्य
8 जनवरी, 1942 को इंग्लैंड को ऑक्सफर्ड में सेंकड वर्ल्ड वॉर के समय स्टीफन हॉकिंग का जन्म हुआ था. वह बचपन से ही एएलएस बीमारी से पीड़ित थे.

नई दिल्ली: कहते हैं कि विश्वास अगर हो तो इंसान मौत को भी मात दे सकता है. ऐसा ही विश्वास था दुनिया के प्रसिद्ध भौतिक विज्ञान के प्रोफेसर स्टीफन हॉकिंग का. बचपन से ही एएलएस(Amyotrophic Lateral Sclerosis) नाम की असाध्य बीमारी से वह पीड़ित थे. डॉक्टर ने उनकी ज्यादा दिन तक नही जीने की भविष्यवाणी की थी लेकिन वह भरपूर जीये और सभी भविष्यवाणियों को अपने हौसले से मात दी.
8 जनवरी, 1942 को इंग्लैंड को ऑक्सफर्ड में सेंकड वर्ल्ड वॉर के समय स्टीफन हॉकिंग का जन्म हुआ था. वह बचपन से ही एएलएस बीमारी से पीड़ित थे. यह वही बीमारी है जिसमें शरीर की मांस पेशियां काम करना बंद कर देती हैं. हॉकिंग चल फिर नहीं सकते थे. वह बाते भी कंप्यूटर की सहायता से कर पाते थे. तब डॉक्टरों का अनुमान था कि वह पांच साल से ज्यादा जिंदा नहीं रह सकेंगे लेकिन उन्होंने इन दावों को झुठला दिया. उन्होंने तकलीफ के बावजूद अपनी पढ़ाई जारी रखी और उनका हौसला ही था कि उन्होंने 1965 में 'प्रॉपर्टीज ऑफ एक्सपैंडिंग यूनिवर्सेज' विषय पर अपनी पीएचडी पूरी की.
दुनिया को दिया सबसे महत्वपूर्ण खोज-''ब्लैक होल थ्योरी''हुनर किसी शारीरिक क्षमताओं की मोहताज नहीं होती और इस कथन को सच कर दिखाया स्टीफन हॉकिंग ने. 1974 में हॉकिंग ने दुनिया को अपनी सबसे महत्वपूर्ण खोज ब्लैक होल थ्योरी से रूबरू करवाया. उन्होंने बताया कि ब्लैक होल क्वांटम प्रभावों की वजह गर्मी फैलाते हैं. ब्लैक होल वास्तव में कोई छेद नहीं है, यह तो मरे हुए तारों के अवशेष हैं. करोड़ों, अरबों सालों के गुजरने के बाद किसी तारे की जिंदगी खत्म होती है और ब्लैक होल का जन्म होता है.
1974 में महज 32 वर्ष की उम्र में वह ब्रिटेन की प्रतिष्टत रॉयल सोसाइटी के सबसे कम उम्र के सदस्य बने. पांच साल बाद ही वह कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में गणित के प्रोफेसर बन गए. यह वही पद था जिस पर कभी महान वैज्ञानिक आइनस्टीन नियुक्त थे.
1988 में उन्हें सबसे ज्यादा चर्चा मिली थी, जब उनकी पहली पुस्तक 'ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम: फ्रॉम द बिग बैंग टु ब्लैक होल्स' मार्केट में आई. इसके बाद कॉस्मोलॉजी पर आई उनकी पुस्तक की 1 करोड़ से ज्यादा प्रतियां बिकी थीं. इसे दुनिया भर में साइंस से जुड़ी सबसे ज्यादा बिकने वाली पुस्तक माना जाता है.
हाकिंग ने माना नहीं होता स्वर्ग
स्वर्ग की परिकल्पना को वह सिरे से खारिज करते थे. उनका मानना था कि स्वर्ग अंधेरे से डरने वालों की कहानी है. अपनी नई किताब द ग्रैंड डिजायन में प्रोफेसर हॉकिंग ने कहा था कि ब्रह्मांड खुद ही बना है. विज्ञान को किसी देवी शक्ति की जरूरत नहीं है.
ब्रह्मांड को समझे लेकिन महिलाओं को नहीं
ब्रह्मांड की रहस्यमय दुनिया के बारे में सबको बताने वाले हॉकिंग ने माना कि महिलाएं उनके लिए रहस्य ही बनी रही. दरअसल एक बार उनसे एक इंटरव्यू में जब पूछा गया कि पूर्ण रहस्य क्या है तो उन्होंने कहा कि महिलाएं अभी भी पूर्ण रहस्य ही हैं. बता दें कि उन्होंने 1974 में जेन विल्डे से शादी की थी. दोनों के तीन बच्चे हुए लेकिन 1999 में तलाक भी हो गया. इसके बाद हॉकिंग ने दूसरी शादी की थी.
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Source: IOCL






















