दिल्ली में लगा स्मार्ट पोल, रोशनी के साथ बताएगा हवा कितनी जहरीली, जानिए पूरा सिस्टम
मध्य दिल्ली में लगे इन पोल को देखकर पहली नजर में इन्हें सामान्य स्ट्रीट लाइट समझना आसान है, लेकिन इनका काम इससे कहीं ज्यादा है. सड़क को रोशन करने वाला यही पोल आसपास के वातावरण की निगरानी भी कर रहा है.

दिल्ली की सड़कों पर अब स्ट्रीट लाइट के साथ हवा की निगरानी और प्रदूषण कम करने वाली तकनीक भी दिखाई दे रही है. मध्य दिल्ली में लगाए गए स्मार्ट स्मॉग पोल एक साथ कई काम कर रहे हैं. ये रात में रोशनी देने के अलावा लगातार पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर रिकॉर्ड करते हैं और मिस्ट स्प्रे के जरिए हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों को नीचे बैठाने की कोशिश भी करते हैं. फिलहाल यह तकनीक परीक्षण के दौर में है और इसके भविष्य का फैसला IIT दिल्ली की विशेषज्ञ जांच के बाद होगा.
एक पोल में तीन काम, इसलिए खींच रहा लोगों का ध्यान
मध्य दिल्ली में लगाए गए इन पोल को देखकर पहली नजर में इन्हें सामान्य स्ट्रीट लाइट समझना आसान है, लेकिन इनका काम इससे कहीं ज्यादा है. इनमें हवा की गुणवत्ता पर नजर रखने वाला सिस्टम, प्रदूषण कम करने के लिए मिस्ट स्प्रेयर और डेटा दिखाने वाली डिजिटल स्क्रीन मौजूद है. यानी सड़क को रोशन करने वाला यही पोल आसपास के वातावरण की निगरानी भी कर रहा है.
हवा में मौजूद बारीक कणों को पकड़ने की कोशिश
इस तकनीक का मुख्य मकसद हवा में मौजूद पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे प्रदूषक कणों पर असर डालना है. पोल में लगे मिस्ट स्प्रेयर बेहद बारीक पानी की धुंध हवा में छोड़ते हैं. दावा यह है कि पानी की बूंदों के संपर्क में आने के बाद ये सूक्ष्म कण अपेक्षाकृत भारी हो जाते हैं और जमीन पर बैठने लगते हैं. इससे आसपास की हवा में मौजूद प्रदूषक कणों की मात्रा घटाने में मदद मिल सकती है.
असली परीक्षा खुले वातावरण में होगी
किसी बंद जगह की तुलना में सड़क और खुले वातावरण में प्रदूषण नियंत्रण करना कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण होता है. इसी वजह से इस तकनीक के वास्तविक प्रभाव को समझने के लिए दिल्ली सरकार ने इसका पायलट परीक्षण शुरू कराया है. अब यह देखना अहम होगा कि खुले वातावरण में मिस्ट का छिड़काव वास्तव में एयर क्वालिटी और धूल कणों के स्तर को कितना प्रभावित करता है.
IIT दिल्ली के विशेषज्ञ एक महीने तक करेंगे समीक्षा
इस पायलट प्रोजेक्ट का विस्तृत मूल्यांकन IIT दिल्ली की विशेषज्ञ टीम कर रही है. करीब एक महीने तक चलने वाली समीक्षा में यह जांचा जाएगा कि सिस्टम व्यवहार में कितना प्रभावी है और मिस्ट छिड़काव से प्रदूषण तथा धूल कणों में वास्तविक कमी आती है या नहीं. इस परीक्षण के नतीजे ही आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.
रिपोर्ट सकारात्मक आई तो बढ़ सकता है दायरा
सरकार की नजर अब इस प्रयोग के परिणाम पर है. यदि IIT दिल्ली की रिपोर्ट में यह मॉडल प्रभावी पाया जाता है और प्रदूषण नियंत्रण में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं, तो इसे केवल मध्य दिल्ली तक सीमित रखने के बजाय राजधानी के दूसरे प्रमुख इलाकों में इस्तेमाल करने की योजना बनाई जा सकती है. खास तौर पर उन क्षेत्रों में इसे लगाने पर विचार हो सकता है, जिन्हें प्रदूषण के हॉटस्पॉट के तौर पर देखा जाता है.
बिजली के बजाय सूरज से चलेगा स्मार्ट सिस्टम
इस पोल की एक खास बात यह भी है कि इसके संचालन के लिए सौर ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाता है. यानी सिस्टम को चलाने में पारंपरिक बिजली पर निर्भरता नहीं है. सौर ऊर्जा आधारित संचालन इसे ऊर्जा की बचत करने वाली और पर्यावरण के अनुकूल तकनीक के तौर पर पेश करता है.
हर पांच मिनट में बदलेगा प्रदूषण का आंकड़ा
पोल पर लगी डिजिटल स्क्रीन आसपास की हवा की स्थिति को लगातार अपडेट करती है. पीएम 2.5 और पीएम 10 से जुड़े आंकड़े हर पांच मिनट में अपने आप अपडेट होते हैं. इससे किसी व्यक्ति को वहां की हवा की स्थिति जानने के लिए अलग से किसी ऐप या डिवाइस पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी.
सिर्फ आज की हवा नहीं, पिछले 24 घंटे का हिसाब भी
सिस्टम की स्क्रीन पर केवल तत्काल प्रदूषण स्तर ही नहीं दिखता. इसमें पिछले 24 घंटे के दौरान सिस्टम ने कुल कितनी हवा को साफ किया, इसका रियल-टाइम रिपोर्ट कार्ड भी प्रदर्शित होता है. इस फीचर के जरिए तकनीक के काम और उसके संभावित प्रभाव को लगातार ट्रैक किया जा सकता है.
इनोवेशन चैलेंज से निकला मॉडल अब दिल्ली की सड़कों पर
यह तकनीक दिल्ली सरकार के इनोवेशन चैलेंज के जरिए सामने आई थी. इस चैलेंज में देशभर से बड़ी संख्या में प्रविष्टियां प्राप्त हुई थीं. उनमें से चयनित मॉडलों में स्मार्ट स्मॉग पोल भी शामिल रहा. शुरुआती तौर पर इसे व्यावहारिक और उपयोगी मानते हुए सरकार ने इसे सीधे बड़े पैमाने पर लागू करने के बजाय पहले जमीनी स्तर पर आजमाने का रास्ता चुना है.
फिलहाल यह मॉडल प्रयोग के चरण में है और इसके परिणाम आने बाकी हैं. यदि एक महीने के परीक्षण में IIT दिल्ली की विशेषज्ञ टीम यह पाती है कि मिस्ट स्प्रेयर खुले वातावरण में पीएम 2.5, पीएम 10 और धूल कणों को कम करने में प्रभावी हैं, तो राजधानी में इसके विस्तार की संभावना बढ़ जाएगी. ऐसे में आने वाले समय में दिल्ली की प्रमुख सड़कों और प्रदूषण वाले हॉटस्पॉट इलाकों में ऐसे पोल सिर्फ रोशनी देने वाले उपकरण नहीं, बल्कि हवा की निगरानी और प्रदूषण नियंत्रण के लिए इस्तेमाल होने वाले मल्टी-फंक्शन सिस्टम के रूप में नजर आ सकते हैं.
राजघाट पर्यटन स्थल पर घूमने आए दंपति ने कहा...
राजघाट पर्यटक स्थल पर घूमने आए दंपति देवेंद्र कुमार और उनकी पत्नी स्वाति सिंह ने एबीपी लाइव की टीम से कहा राजघाट के पास जो सोलर लाइट लगाई गई है दिल्ली सरकार के द्वारा बहुत ही उत्कृष्ट कार्य किया है जिसमें दिल्ली की हवा की क्वालिटी हर मिनट अपडेट मिलती है. समय समय पर फव्वारा निकलने पर गर्मी से थोड़ी राहत मिलती है जो काफी आकर्षण का केंद्र बना हुआ. रात की चांदनी में इसकी खूबसूरती और बढ़ जाती है साथ ही साथ यहां आने वाले पर्यटक को सटीक जानकारी मिल रही है.















