क्या पारसी ट्रस्ट हिंदू से शादी करने वाली पारसी लड़की को उसके पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने देगा-SC
आज पांच जजों की संविधान पीठ के सामने गुलरोख की वकील इंदिरा जयसिंह ने स्पेशल मैरिज एक्ट के हवाले दिया. उन्होंने कहा कि गुलरोख कांट्रेक्टर ने महिपाल गुप्ता से स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी की. इसके तहत 2 लोग बिना धर्म बदले शादी कर सकते हैं. वो आज भी पारसी है.

नई दिल्ली: क्या वलसाड का पारसी ट्रस्ट हिन्दू से शादी करने वाली पारसी लड़की गुलरोख को भविष्य में उसके पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने देगा? क्या उसे पारसी मंदिर में दाखिल होने दिया जाएगा? ये सवाल सुप्रीम कोर्ट ने पूछे हैं. पारसी ट्रस्ट को इनका जवाब 14 दिसंबर को देना है.
गुलरोख को गुजरात हाईकोर्ट ने पारसी मानने से मना कर दिया था. हाई कोर्ट ने वलसाड पारसी ट्रस्ट की इस दलील को स्वीकार किया था कि गैर पारसी से शादी करने वाली लड़की पारसी नहीं मानी जा सकती.
आज पांच जजों की संविधान पीठ के सामने गुलरोख की वकील इंदिरा जयसिंह ने स्पेशल मैरिज एक्ट के हवाले दिया. उन्होंने कहा कि गुलरोख कॉन्ट्रेक्टर ने महिपाल गुप्ता से स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी की. इसके तहत दो लोग बिना धर्म बदले शादी कर सकते हैं. वो आज भी पारसी है.
इंदिरा जयसिंह ने समानता के अधिकार का मसला भी उठाया. उन्होंने कहा कि पारसी ट्रस्ट के नियम बराबरी के मौलिक अधिकार का हनन है. हाई कोर्ट ने इसे मान कर गलत किया है. जवाब में वलसाड पारसी ट्रस्ट के वकील गोपाल सुब्रमण्यम ने धार्मिक परंपरा की बात उठाई. उन्होंने ये भी कहा कि पारसी संख्या में बेहद कम हैं. इसलिए उन्हें समुदाय को बनाए रखने के लिए इस तरह के सख्त नियम बहुत ज़रूरी हैं.
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि ये नियम सिर्फ गुजरात के पारसी समाज में है. मुंबई और दिल्ली में गैर पारसी से शादी करने वाली पारसी लड़कियों को धार्मिक स्थानों और कार्यक्रमों में आने से नहीं रोका जाता.
इस पर कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसा है तो मामले को ज़्यादा बढ़ाना ज़रूरी नहीं लगता. वलसाड पारसी ट्रस्ट इस बात का जवाब दे कि वो भविष्य में गुलरोख को माता-पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने देगा या नहीं. अगर ट्रस्ट इसके लिए तैयार है तो मामला यहीं खत्म हो जाएगा.
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