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राजस्थान चुनाव: वोटिंग शुरू, इन VIP सीटों पर रहेंगी सबकी निगाहें

राज्य में मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है और लगभग 130 सीटों पर इन दोनों पार्टियों के उम्मीदवारों में सीधी टक्कर है. वहीं 50 सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय माना जा रहा है जिनमें से 45 सीटों पर दोनों पार्टियों के बागी उम्मीदवारों ने मुकाबले को रोचक बना दिया है.

नई दिल्ली: राजस्थान में आज 2,274 उम्मीदवारों की राजनीतिक किस्मत ईवीएम में कैद हो जाएगी. सूबे में 200 विधानसभा सीटों में से 199 विधानसभा सीटों के लिये 189 महिला उम्मीदवारों सहित 2,274 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमाने के लिये चुनावी मैदान में उतरे हैं. अलवर जिले के रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में बीएसपी उम्मीदवार के निधन की वजह से चुनाव स्थगित कर दिया गया है.

राज्य में मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है और लगभग 130 सीटों पर इन दोनों पार्टियों के उम्मीदवारों में सीधी टक्कर है. वहीं 50 सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय माना जा रहा है जिनमें से 45 सीटों पर दोनों पार्टियों के बागी उम्मीदवारों ने मुकाबले को रोचक बना दिया है. जाट नेता हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोक तांत्रिक पार्टी ने 58 सीटों पर उम्मीदवार खड़े करके दोनों पार्टियों को चुनौती दी है. हम आपको राजस्थान की उन विधानसभा सीटों के बारे में बताने जा रहे हैं जहां के नतीजों पर सबकी नजर रहने वाली है.

झालरापाटन राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे झालरापाटन विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रही हैं. कांग्रेस ने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह को उनके खिलाफ उम्मीदवार बनाया है. बाड़मेर के शिव क्षेत्र से विधायक मानवेंद्र ने सितंबर में भारतीय जनता पार्टी छोड़ने की घोषणा की थी. 17 अक्टूबर को मानवेंद्र ने बीजेपी को बड़ा झटका देते हुए कांग्रेस का दामन थाम लिया था. पिछले चुनाव में वसुंधरा राजे ने कांग्रेस की मीनाक्षी चंद्रावत को 50 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था. वसुंधरा को 1,14,384 तो वहीं मीनाक्षी चंद्रावत को 53,488 वोट मिले थे.

विधानसभा चुनाव: राजस्थान और तेलंगाना चुनाव का LIVE कवरेज यहां देखें

राजस्थान में साल 1998 से ही हर चुनाव के बाद सीएम पद की गद्दी मुख्य विपक्षी पार्टी को मिल जाती है. ऐसे में मुख्यमंत्री वसुंधरा के सामने इस मिथक को तोड़ना सबसे बड़ी चुनौती है. वसुंधरा राजे सिंधिया 2013 में प्रदेश की 13वीं मुख्यमंत्री बनीं थीं. वसुंधरा राजे इस कार्यकाल को मिलाकर दूसरी बार सीएम पद पर अपना कार्यकाल पूरा करेंगी. वह प्रदेश की पहली महिला मुख्यमंत्री भी हैं. ग्वालियर राजघराने से ताल्लुक रखने वाली वसुंधरा ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1984 में बीजेपी ज्वाइन करने के बाद की थी.

टोंक राजस्थान की टोंक विधानसभा सीट पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट की उम्मीदवारी से रोमांचक मुकाबले की उम्मीद की जा रही है. मुस्लिम बहुल इस सीट पर 2013 के पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी जबकि कांग्रेस प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहा था. भारतीय जनता पार्टी ने पायलट के खिलाफ टोंक विधानसभा सीट पर अपने एकमात्र मुस्लिम उम्मीदवार यूनुस खान को मैदान में उतारा है. पार्टी ने इससे पहले यहां से मौजूदा विधायक अजित सिंह मेहता को उम्मीदवार बनाने की घोषणा की थी. लेकिन कांग्रेस ने जब मुस्लिम बहुल टोंक सीट से पायलट को उतारने की घोषणा की तो बीजेपी ने अपने प्रत्याशी को बदलकर यूनुस खान को उतार दिया. वसुंधरा राजे सरकार में कद्दावर मंत्री रहे यूनुस खान इस समय डीडवाना से विधायक है.

सचिन पायलट राजस्थान कांग्रेस के युवा तेजतर्रार नेता हैं और प्रदेश कांग्रेस की कमान अभी उन्हीं के हाथों में है. इस कारण कांग्रेस पार्टी की तरफ से सचिन पायलट मुख्यमंत्री के उम्मीदवार भी माने जा रहे हैं. पायलट राजस्थान के दौसा लोकसभा सीट से पहली बार 2004 में सांसद बने और 2009 में वो अजमेर से लोकसभा के लिए दूसरी बार चुने गए. 2014 के लोकसभा चुनाव में भी वो अजमेर से चुनाव लड़े लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा. सचिन पायलट केन्द्र में भी भूमिका निभा चुके हैं. वो यूपीए-2 में कॉरपोरेट मंत्री के पद पर थे. सचिन पायलट को राजनीति विरासत में मिली है. उनके पिता राजेश पायलट कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता थे.

सरदारपुरा कांग्रेस के कद्दावर नेता अशोक गहलोत जोधपुर से ताल्लुक रखते हैं. जोधपुर जिले की सरदारपुरा सीट से गहलोत विधायक हैं. पिछले चुनाव में उन्होनें बीजेपी शंभू सिंह खेतासर को हराया था. माना जा रहा है कि पिछली बार के चुनाव की तरह इस बार भी दोनों नेताओं में दिलचस्प और कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा. राजस्थान चुनाव के सियासी पंडित अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री पद का प्रमुख दावेदार मान रहे हैं. गहलोत को कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में शुमार किया जाता है. वो इस वक्त कांग्रेस पार्टी के संगठन महासचिव हैं.

छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहने वाले गहलोत ने सबसे पहले 1980 में जोधपुर संसदीय क्षेत्र से चुनाव जीतकर राजनीति में प्रवेश किया था. इसके बाद उन्होंने 1984, 1991, 1996 और 1998 में भी लोकसभा चुनाव जीता. साल 1999 में उन्हें राजस्थान के चुनाव में एंट्री की और सरदारपुरा, जोधपुर से चुनाव जीतकर राजस्थान विधानसभा पहुंचे. वो 1998 से लेकर 2003 और 2008 से लेकर 2013 तक राजस्थान के मुख्यमंत्री भी रहे.

केकड़ी राजस्थान के अजमेर जिले की केकड़ी विधानसभा सीट से कांग्रेस पार्टी की ओर से डॉ रघु शर्मा चुनाव लड़ रहे हैं. खास बात ये है कि रघु शर्मा अजमेर के सांसद भी हैं. लेकिन उससे भी खास बात ये है कि अशोक गहलोत ने एक बयान में उन्हें सीएम उम्मीदवार तक कह दिया है. इसके बाद से ही केकड़ी सीट चर्चा में है. बीजेपी ने रघु शर्मा के खिलाफ मौजूदा एमएलए का टिकट काटकर मौजूदा पार्षद राजेन्द्र विनायका को चुनावी मैदान में उतारा है.

बाड़मेर बीजेपी सांसद कर्नल सोनाराम चौधरी बाड़मेर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. कर्नल सोनाराम चौधरी की गिनती मारवाड़ के कद्दावर जाट नेताओं के रूप में होती है. कांग्रेस की तरफ से मेवाराम जैन वहां से चुनाव लड़ रहे हैं. मेवाराम वर्तमान में बाड़मेर सीट से विधायक भी हैं. सोनाराम चौधरी 1996, 1998, 1999 में बाड़मेर लोकसभा सीट से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीत कर संसद पहुंचे. इसके बाद 2004 के लोकसभा चुनावों में चौधरी पूर्व केन्‍द्रीय मंत्री जसवंत सिंह के पुत्र मानवेन्‍द्र सिंह के सामने चुनाव लड़े, लेकिन हार गए.

सोनाराम 2008 में बाड़मेर की बायतु विधानसभा सीट से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंचे. इसके बाद 2013 में चौधरी ने इसी सीट पर चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए. 2013 में विधानसभा का चुनाव हारने के बाद चौधरी 2014 के लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए और बीजेपी के पूर्व वरिष्ठ नेता और केन्‍द्रीय मंत्री जसवंत सिंह को हराकर लोकसभा पहुंचे. बीजेपी ने 2018 के विधानसभा चुनावों में सांसद सोनाराम चौधरी को इस बार बाड़मेर विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा है.

नाथद्वारा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सीपी जोशी राजस्थान विधानसभा चुनाव में नाथद्वारा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. उनके खिलाफ वसुधंरा सरकार में मंत्री किरण माहेश्वरी चुनावी मैदान में हैं. यहां दोनों ही बड़े चेहरों के लिए जीत हासिल करना प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका है. सीपी जोशी का पूरा नाम चंद्रप्रकाश जोशी है. वो राजस्थान की नाथद्वारा विधानसभा सीट से 1980, 1985, 1998 और 2003 चुनाव जीते हैं. इसके अलावा उन्होंने पंद्रहवीं लोकसभा के मंत्रिमंडल में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभाली थी. 2014 में वो जयपुर ग्रामीण से लोकसभा का चुनाव हार गए थे.

उदयपुर विश्वभर में पर्यटकों के आकर्षण के केंद्र उदयपुर में कांग्रेस की दिग्गज महिला नेता गिरिजा व्यास और वसुंधरा सरकार में मंत्री गुलाबचंद कटारिया के बीच टक्कर है. गुलाबचंद कटारिया उदयपुर शहर से विधायक और सूबे के गृहमंत्री हैं. उनकी गिनती वसुंधरा सरकार के ताकतवर मंत्रियों में होती है. वहीं गिरिजा व्यास चार बार लोकसभा सदस्य रह चुकी हैं. वो सिर्फ 25 साल की उम्र में ही राजस्थान विधानसभा की सदस्य बन गई थीं. नरसिम्हा राव सरकार में उन्होंने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और मनमोहन सिंह की यूपीए-2 में शहरी आवास एवं ग़रीबी उन्मूलन मंत्रालय की ज़िम्मेदारी संभाली थी. गिरिजा व्यास राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष पद के साथ-साथ लोकसभा में कांग्रेस की मुख्य सचेतक के पद पर भी रहीं हैं.

श्रीगंगानगर कामिनी जिंदल राजस्थान के श्रीगंगानगर सीट से विधायक हैं और इस बार के चुनाव में भी किस्मत आजमा रही हैं. कामिनी जिंदल के नाम राजस्थान की सबसे युवा विधायक होने का रिकॉर्ड भी दर्ज है. यहीं नहीं वह राजस्थान विधानसभा में पहुंचने वाली सबसे ज्यादा अमीर विधायक भी हैं. इस सीट को लेकर भी सूबे में काफी चर्चा है. कामिनी जिंदल नेशनल यूनियनिस्ट जमींदारा पार्टी के अध्यक्ष बीडी अग्रवाल की बेटी हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में वह इसी पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज की थी. वह अकेले अपने दम पर बीजेपी और कांग्रेस को जबरदस्त टक्कर दे रही हैं.

खींवसर राजस्थान का सत्ता सिंहासन यूं तो अब तक कांग्रेस और बीजेपी के सियासी राजवंशों के हाथ रहा है. विधानसभा चुनाव 2018 में सीधा मुकाबला भी इन्हीं दोनों के बीच है. मगर इस बार तीसरे मोर्चे के लड़ाके सियासी बीजेपी और कांग्रेस का सियासी गणित कई सीटों पर गड़बड़ा रहे हैं. उनमें से सबसे बड़ा नाम जाटों के तेज़ तर्रार नेता हनुमान बेनीवाल का है. बेनीवाल 2008 में बीजेपी के टिकट पर खींवसर से विधायक बने. उनकी मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से नहीं बन पाई और अलग हो गए. साल 2013 में वो खींवसर से निर्दलीय चुने गए. इस बार भी वो इसी सीट से चुनावी मैदान में उतरे हैं. खींवसर जाट बहुल विधानसभा है. अपने नए सियासी दल राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के साथ ताल ठोंक रहे हनुमान बेनीवाल ने 58 सीटों पर अपने उम्मीदवार भी उतारे हैं.

बता दें कि बीजेपी राज्य की सभी विधानसभा सीटों पर चुनाव लड रही है जबकि कांग्रेस ने पांच सीटें गठबंधन की पार्टियों को देकर 195 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं. बीएसपी के 190, सीपीआईएम के 28, सीपीआई के 16 और 830 निर्दलीय उम्मीवादर चुनाव मैदान में हैं.

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