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Heeraben Modi 100th Birthday: 'अभाव की हर कथा से बहुत ऊपर, एक मां की गौरव गाथा होती है', माता हीराबेन के 100वें साल पर PM मोदी की यादें

PM Modi Blog on Mother: पीएम मोदी ने ब्लॉग में लिखा कि मां की तपस्या, उसकी संतान को, सही इंसान बनाती है. मां की ममता संतान को मानवीय संवेदनाओं से भरती है.

PM Modi Emotional Blog on Heeraben Modi 100th Birthday: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां हीराबेन 100वें साल में प्रवेश कर गईं. मोदी ने इस मौके पर अपनी मां के नाम एक ब्लॉग (PM Modi Blog) लिखा. इसमें उन्होंने अपने मां के जन्म से लेकर अब तक के सारे बड़े वृतांत लिखे. पीएम मोदी ने बताया कि किस तरह उनके पिता के करीबी दोस्त का देहांत हो गया तो उनके पिता दोस्त के बेटे को घर ले आए. वह दोस्त का बेटा मोदी के घर पर ही पला-बढ़ा. मोदी की मां ने भी उसे अपने बच्चों जैसा प्यार दिया. आपको जानकर हैरानी होगी कि उनके पिता के यह दोस्त हिंदू नहीं बल्कि मुसलमान थे. मोदी की मां उनके बेटे अब्बास के लिए ईद पर उसकी पसंद के खास पकवान बनाती थीं.

मोदी की मां हीराबेन (Heeraben Modi) हमेशा दूसरों को खुश देखकर खुश रहा करती हैं. घर में जगह भले कम हो लेकिन उनका दिल बहुत बड़ा है. 

मोदी की मां अब्बास को अपने बच्चों की तरह ही प्यार करती थीं. अब्बास उनके घर में ही रहकर पढ़ा. जिस तरह हीराबेन नरेंद्र मोदी और उनके भाई-बहनों का ख्याल रखती थीं उसी तरह वह अब्बास की भी बहुत देखभाल करती थीं. ईद पर मां अब्बास के लिए उसकी पसंद के पकवान बनाती थीं. पीएम मोदी ने लिखा कि आज मैं अपनी खुशी, अपना सौभाग्य, आप सबसे साझा करना चाहता हूं. मेरी मां, हीराबा आज 18 जून को अपने सौवें वर्ष में प्रवेश कर रही हैं. यानि उनका जन्म शताब्दी वर्ष प्रारंभ हो रहा है. पिताजी आज होते, तो पिछले सप्ताह वो भी 100 वर्ष के हो गए होते. पिछले ही हफ्ते मेरे भतीजे ने गांधीनगर से मां के कुछ वीडियो भेजे हैं. पिताजी की तस्वीर कुर्सी पर रखी है, भजन कीर्तन चल रहा है और मां मगन होकर भजन गा रही हैं, मंजीरा बजा रही हैं. मां आज भी वैसी ही हैं. शरीर की ऊर्जा भले कम हो गई है लेकिन मन की ऊर्जा यथावत है.

जीवन में जो कुछ अच्छा है मां-पिताजी की देन-मोदी

वैसे हमारे यहां जन्मदिन मनाने की कोई परंपरा नहीं रही है. लेकिन परिवार में जो नई पीढ़ी के बच्चे हैं उन्होंने पिताजी के जन्मशती वर्ष में इस बार 100 पेड़ लगाए हैं. आज मेरे जीवन में जो कुछ भी अच्छा है, मेरे व्यक्तित्व में जो कुछ भी अच्छा है, वो मां और पिताजी की ही देन है. आज जब मैं यहां दिल्ली में बैठा हूं, तो कितना कुछ पुराना याद आ रहा है. मेरी मां जितनी सामान्य हैं, उतनी ही असाधारण भी. ठीक वैसे ही, जैसे हर मां होती है. आज जब मैं अपनी मां के बारे में लिख रहा हूं, तो पढ़ते हुए आपको भी ये लग सकता है कि अरे, मेरी मां भी तो ऐसी ही हैं, मेरी मां भी तो ऐसा ही किया करती हैं. ये पढ़ते हुए आपके मन में अपनी मां की छवि उभरेगी.

मां की तपस्या संतान को इंसान बनाती है-PM

मां की तपस्या, उसकी संतान को, सही इंसान बनाती है. मां की ममता, उसकी संतान को मानवीय संवेदनाओं से भरती है. मां एक व्यक्ति नहीं है, एक व्यक्तित्व नहीं है, मां एक स्वरूप है. हमारे यहां कहते हैं, जैसा भक्त वैसा भगवान. वैसे ही अपने मन के भाव के अनुसार, हम मां के स्वरूप को अनुभव कर सकते हैं. मेरी मां का जन्म, मेहसाणा जिले के विसनगर में हुआ था. वडनगर से ये बहुत दूर नहीं है. मेरी मां को अपनी मां यानि मेरी नानी का प्यार नसीब नहीं हुआ था. एक शताब्दी पहले आई वैश्विक महामारी का प्रभाव तब बहुत वर्षों तक रहा था. उसी महामारी ने मेरी नानी को भी मेरी मां से छीन लिया था. मां को अक्षर ज्ञान भी नसीब नहीं हुआ, उन्होंने स्कूल का दरवाजा भी नहीं देखा. उन्होंने देखी तो सिर्फ गरीबी और घर में हर तरफ अभाव.

मिट्टी के घर में बारिश में दिक्कतें होती थीं- PM

घर चलाने के लिए दो चार पैसे ज्यादा मिल जाएं, इसके लिए मां दूसरों के घर के बर्तन भी मांजा करती थीं. समय निकालकर चरखा भी चलाया करती थीं क्योंकि उससे भी कुछ पैसे जुट जाते थे. कपास के छिलके से रूई निकालने का काम, रुई से धागे बनाने का काम, ये सब कुछ मां खुद ही करती थीं. उन्हें डर रहता था कि कपास के छिलकों के कांटें हमें चुभ ना जाएं. अपने काम के लिए किसी दूसरे पर निर्भर रहना, अपना काम किसी दूसरे से करवाना उन्हें कभी पसंद नहीं आया. मुझे याद है, वडनगर वाले मिट्टी के घर में बारिश के मौसम से कितनी दिक्कतें होती थीं. लेकिन मां की कोशिश रहती थी कि परेशानी कम से कम हो. इसलिए जून के महीने में, कड़ी धूप में मां घर की छत की खपरैल को ठीक करने के लिए ऊपर चढ़ जाया करती थीं. लेकिन हमारा घर इतना पुराना हो गया था कि उसकी छत, तेज बारिश सह नहीं पाती थी.

घर में पानी टपकता था- पीएम मोदी

बारिश में हमारे घर में कभी पानी यहां से टकपता था, कभी वहां से. पूरे घर में पानी ना भर जाए, घर की दीवारों को नुकसान ना पहुंचे, इसलिए मां जमीन पर बर्तन रख दिया करती थीं. छत से टपकता हुआ पानी उसमें इकट्ठा होता रहता था. उन पलों में भी मैंने मां को कभी परेशान नहीं देखा, खुद को कोसते नहीं देखा. आप ये जानकर हैरान रह जाएंगे कि बाद में उसी पानी को मां घर के काम के लिए अगले 2-3 दिन तक इस्तेमाल करती थीं. जल संरक्षण का इससे अच्छा उदाहरण क्या हो सकता है. मां को घर सजाने का, घर को सुंदर बनाने का भी बहुत शौक था.

मां की गौरव गाथा अभाव से ऊपर है- पीएम मोदी

पीएम मोदी (PM Modi) ने अपनी मां हीराबेन (Heeraben) की यादें समेटते हुए लिखा कि उनका एक और बड़ा ही निराला और अनोखा तरीका मुझे याद है. वो अक्सर पुराने कागजों को भिगोकर, उसके साथ इमली के बीज पीसकर एक पेस्ट जैसा बना लेती थीं, बिल्कुल गोंद की तरह. फिर इस पेस्ट की मदद से वो दीवारों पर शीशे के टुकड़े चिपकाकर बहुत सुंदर चित्र बनाया करती थीं. बाजार से कुछ-कुछ सामान लाकर वो घर के दरवाजे को भी सजाया करती थीं. मैं अपनी मां की इस जीवन यात्रा में देश की समूची मातृशक्ति के तप, त्याग और योगदान के दर्शन करता हूं. अभाव की हर कथा से बहुत ऊपर, एक मां की गौरव गाथा होती है. सार्वजनिक रूप से कभी आपके लिए इतना लिखने का, इतना कहने का साहस नहीं कर पाया. मां, आपको जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं. आप स्वस्थ रहें, हम सभी पर आपका आशीर्वाद बना रहे, ईश्वर से यही प्रार्थना है.

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