'परिवार के साथ मेरी संवेदनाएं...' पीएम मोदी ने सत्यपाल मलिक के निधन पर जताया दुख
PM Modi on Satyapal Malik Demise: जम्मू-कश्मीर, गोवा, बिहार और मेघालय के राज्यपाल रहे सत्यपाल मलिक का 5 अगस्त 2025, मंगलवार को देहांत हो गया. वह कई दिनों से अस्पताल में भर्ती थे.

जम्मू-कश्मीर के पूर्व सत्यपाल मलिक के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताया है. पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा- 'सत्यपाल मलिक जी के निधन से दुखी हूं. इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और समर्थकों के साथ हैं. ॐ शांति.'
पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का मंगलवार को 79 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. उन्हें दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में 11 मई को भर्ती कराया गया था. वे लंबे समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे और मंगलवार दोपहर 1 बजे अंतिम सांस ली.
किसान आंदोलन और सरकार से दूरी
सत्यपाल मलिक ने उस समय खुलकर किसानों का समर्थन किया जब मोदी सरकार ने तीन विवादास्पद कृषि कानून लागू किए थे. देशभर में चल रहे किसान आंदोलन के पक्ष में बोलने वाले गिने-चुने बड़े नेताओं में वे शामिल थे. इसी दौरान उनके और केंद्र सरकार के बीच रिश्ते बिगड़ने शुरू हुए. इसके अलावा, साल 2023 में जब महिला पहलवानों ने बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए धरना दिया, तब भी सत्यपाल मलिक उनके समर्थन में धरनास्थल पहुंचे और कहा कि वह व्यक्तिगत स्तर पर पहलवानों की हरसंभव मदद करेंगे.
Saddened by the passing away of Shri Satyapal Malik Ji. My thoughts are with his family and supporters in this hour of grief. Om Shanti.
— Narendra Modi (@narendramodi) August 5, 2025
CBI की चार्जशीट और भ्रष्टाचार का आरोप
मई 2024 में CBI ने सत्यपाल मलिक के खिलाफ 2200 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार मामले में चार्जशीट दाखिल की. यह मामला किरू हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट के सिविल वर्क्स से जुड़ा है, जो जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में स्थित है. उन पर ठेके देने में अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लगे, जिससे उनका नाम एक बार फिर सुर्खियों में आ गया.
चौधरी चरण सिंह से प्रेरित विचारधारा
सत्यपाल मलिक ने अपने लंबे राजनीतिक करियर में कई दल बदले- कांग्रेस, जनता दल, लोकदल और अंततः भाजपा. लेकिन उनकी पहचान हमेशा एक जाट नेता और किसान हितैषी चेहरा बनी रही. वे खुद को लोहियावादी विचारधारा से जुड़ा मानते थे और चौधरी चरण सिंह को अपना राजनीतिक गुरु मानते थे. किसानों के अधिकार और ग्रामीण भारत के मुद्दों पर उनकी स्पष्ट राय हमेशा चर्चा में रही.
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