'कोरोना ने अदालतों को मॉर्डन होने के लिए मजबूर किया, अब हमें दूसरी महामारी आने से पहले...', जजों की मीटिंग में बोले CJI चंद्रचूड़
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, इसका निष्कर्ष यह है कि महामारी के कारण न्यायिक प्रणाली को न्याय प्रदान करने के लिए आधुनिक तरीके अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा.

Chief Justice Of India: भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डी.वाई. चंद्रचूड़ ने शुक्रवार (10 मार्च) को एक कार्यक्रम में कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की अदालतों को न्याय देने के लिए मार्डन तरीकों को अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा.
इस दौरान कई तकनीकि वजहों के कारण अदालतों को परेशानी भी हुई. लेकिन हम अब अपनी न्यायिक व्यवस्था, और संस्थानों को किसी और महामारी के आने से पहले पूरी तरह से विकसित कर देना चाहते हैं.
एससीओ देशों के चीफ जस्टिस की कॉन्फ्रेंस में क्या बोले सीजेआई?
देश के मुख्य न्यायाधीश ने यह सारी बातें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में शामिल देशों के सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के 18वें सम्मेलन के दौरान कहीं. इस दौरान वह कोविड में भारतीय न्यायपालिका द्वारा उठाए गए कदमों पर बाकी देशों के अपने समकक्षों को इसके बारे में जानकारी दे रहे थे.
उन्होंने बाकी देशों के न्यायाधीशों से कहा, महामारी के बाद से भारत में जिला अदालतों ने वीडियो-कॉन्फ्रेंस के माध्यम से 16 करोड़ 50 लाख, उच्च न्यायालयों ने सात करोड़ 58 लाख जबकि सुप्रीम कोर्ट ने 3,79,954 मामलों में सुनवाई की.
क्या बोले सीजेआई?
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, इसका निष्कर्ष यह है कि महामारी के कारण न्यायिक प्रणाली को न्याय प्रदान करने के लिए आधुनिक तरीके अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा. लेकिन हमारा लक्ष्य किसी और महामारी के आने से पहले न्यायिक संस्थानों को विकसित करना और किसी सक्रिय रूप से निर्णय लेना होना चाहिए.
उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों ने महामारी के दौरान मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामलों की सक्रिय रूप से निगरानी की. उच्चतम न्यायालय 10 से 12 मार्च तक के बीच आयोजित सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है. इसका उद्देश्य एससीओ सदस्य देशों के उच्चतम न्यायालयों के बीच सहयोग विकसित करना है.
Source: IOCL
























