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Operation Mahadev: 'चीनी सैटेलाइट फोन ऑन करते ही', पहलगाम के गुनहगारों की इस गलती ने उन्हें पहुंचाया जहन्नुम, ऑपरेशन महादेव की इनसाइड स्टोरी

Operation Mahadev: पहली बार 22 मई को आतंकियों की मूवमेंट देखी गई थी. उस वक्त जंगल में रहने वाले चरवाहों ने सुरक्षाबलों को अलर्ट किया था, लेकिन आतंकी जंगल के रास्ते निकल गए.

ऑपरेशन महादेव के तहत श्रीनगर के करीब दाचिगाम के जंगलों में मारे गए तीनों आतंकियों की पहचान का खुलासा खुद गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में किया. साथ ही इस बात का खुलासा भी किया कि तीनों ही आतंकी पहलगाम नरसंहार में सीधे तौर से शामिल थे. आतंकियों के कब्जे से बरामद हुए हथियारों की फॉरेंसिक जांच में इस बात की पुष्टि हुई है. तीन महीने (96 दिन) बाद पहलगाम के दरिंदों को सुरक्षाबलों ने कैसे इंटरसेप्ट किया, उसके पीछे की कहानी भी सामने आ गई है.

जानकारी के मुताबिक, 26 जुलाई यानी शनिवार को आतंकियों ने दाचीगाम नेशनल पार्क की महादेव चोटी (पहाड़ी) पर अपने सैटेलाइट फोन को ऑन किया था. इस फोन के ऑन होते ही सुरक्षाबल अलर्ट हो गए और सेना की पैरा-एसएफ (स्पेशल फोर्सेज) को मिशन के लिए खासतौर से जंगलों की तरफ रवाना कर दिया गया. करीब 48 घंटे की कॉम्बिंग के बाद 4 पैरा-एसएफ यूनिट के कमांडो, लिडवास और महादेव चोटियों के करीब पहुंच गए, जहां आतंकी एक मेक-शिफ्ट कैंप में रह रहे थे.

सुरक्षाबलों ने क्या-क्या बरामद किया ?
करीब छह घंटे चली मुठभेड़ में आतंकियों को ढेर करने के बाद सुरक्षाबलों ने हथियारों और गोला-बारूद के साथ ही उस सैटेलाइट फोन को भी बरामद किया, जिसका इस्तेमाल शनिवार को किया गया था. जानकारी के मुताबिक, ये एक चीनी सैटेलाइट फोन था, जिसके जरिए आतंकी, सीमा-पार (पाकिस्तान) में अपने आकाओं को मैसेज करने के लिए भी इस्तेमाल करते थे.

22 अप्रैल को पहलगाम की बैसरण घाटी में मासूम पर्यटकों का नरसंहार करने के बाद ही आतंकी जंगलों में छिपे हुए थे. आतंकियों ने बैसरन घाटी से जंगलों और पहाड़ों के रास्ते महादेव (दाचिगाम) पहुंचे थे. जानकारी ये भी मिली है कि दो हफ्ते पहले भी आतंकियों ने एक बार अपने सैटेलाइट फोन को ऑन किया था. तभी से इंटेलिजेंस एजेंसियां और सुरक्षाबल आतंकियों को जंगलों में तलाश रहे थे. इसके लिये पहलगाम और दाचिगाम के बीच जंगलों और पहाड़ों में थर्मल इमेजिंग ड्रोन्स, सैटेलाइट ट्रैकिंग, सिग्नल इंटरसेप्शन और ह्यूमन इंटेलिजेंस का सहारा लिया जा रहा था.

चरवाहों ने सुरक्षाबलों को किया था अलर्ट  
पहली बार पहलगाम के जंगलों के करीब 22 मई को आतंकियों की मूवमेंट देखी गई थी. उस वक्त जंगल में रहने वाले चरवाहों ने सुरक्षाबलों को अलर्ट किया था, लेकिन इससे पहले की सुरक्षाबल उन्हें ट्रैक कर पाते, आतंकी वहां से जंगल के रास्ते निकल गए. खुद गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को लोकसभा में बताया था कि आतंकियों की लोकेशन पहली बार 22 मई को पता चली थी.

पाकिस्तानी नागरिक के रूप में हुई आतंकियों की पहचान
मारे गए आतंकियों की पहचान सुलेमान शाह, जिब्रान भाई और अबू हमजा उर्फ हमजा अफगानी के तौर पर हुई है. तीनों ही पाकिस्तानी नागरिक हैं. अमित शाह ने संसद को बताया था कि दो आतंकियों के तो पहचान-पत्र नंबर तक देश की इंटेलिजेंस एजेंसियों के पास मौजूद हैं. भारतीय सेना की चिनार कोर के मुताबिक, आतंकियों को मार गिराने में पैरा-एसएफ यूनिट के अलावा जम्मू कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ भी शामिल थी.

आतंकियों के कब्जे से दो (02) एके-47 राइफल और एक (01) एम-4 राइफल के अलावा भारी मात्रा में हैंड ग्रेनेड, मैगजीन और दूसरा वॉर-स्टोर बरामद हुआ है. आतंकी जिस पॉलीथीन के बने टेंट में छिपे हुए थे, वहां से खाने-पीने का सामान और प्लेट इत्यादि बर्तन भी बरामद हुए हैं. ऐसा लगता है कि कई दिनों से आतंकी इस जगह छिपे हुए थे.

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नीरज राजपूत देश के जाने-माने डिफेंस-जर्नलिस्ट और वॉर-लेखक हैं. पत्रकारिता में करीब ढाई दशक का अनुभव रखते हैं और प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल मीडिया तीनों में गहरी पकड़ है.

वर्तमान में वे ABP नेटवर्क से जुड़े हैं, जहाँ युद्ध, रक्षा, नेशनल सिक्योरिटी और जियो-पॉलिटिक्स से संबंधित विषयों को कवर करते हैं. ABP लाइव पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम ‘गेम-चेंजर’ के प्रस्तुतकर्ता भी हैं.

रूस-यूक्रेन युद्ध पर उन्होंने पहली हिंदी पुस्तक "ऑपरेशन Z लाइव" लिखी, जो बेस्टसेलर सूची में भी शामिल हुई और पाठकों द्वारा खूब सराही गई.

रिपोर्टिंग का दायरा
- दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन से लेकर आतंकवाद प्रभावित जम्मू-कश्मीर और चीन सीमा पर तिब्बत के पठार तक
- पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर-स्ट्राइक से लेकर पनडुब्बी के जरिए समुद्र के भीतर तक
- ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनके एक्सक्लूसिव खुलासे और सटीक विश्लेषणों की व्यापक सराहना हुई
- यूक्रेन-रूस युद्ध क्षेत्र में मारियुपोल, डोनेत्स्क और लुहांस्क जैसे एक्टिव वॉर-जोन से रिपोर्टिंग. इसी अनुभव पर आधारित उनकी पुस्तक प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई
- दुनिया की सबसे संवेदनशील सीमाओं में से एक उत्तर-दक्षिण कोरिया की DMZ
- ⁠अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य अड्डों में से एक JBLM, और शीत युद्ध के दौरान "गैर-मौजूद" माने जाने वाले रूसी सैन्य अड्डों से भी ग्राउंड रिपोर्टिंग. 
- ⁠वे उन चुनिंदा रक्षा जुड़े पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने भारत के पहले स्वदेशी अटैक हेलिकॉप्टर LCH-प्रचंड के कॉकपिट में उड़ान भरी है. इसके अलावा फ्रांस में राफेल लड़ाकू विमान निर्माण सुविधा से भी उन्होंने विशेष रिपोर्टिंग की.

भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित 'Defence Correspondent Course' के Alumni हैं.

पूर्व कार्य अनुभव
- STAR NEWS में लगभग 6 वर्षों तक चीफ रिपोर्टर (क्राइम) के तौर पर कार्य किया और लोकप्रिय क्राइम शो 'सनसनी' से जुड़े रहे
- पत्रकारिता की शुरुआत अंग्रेजी दैनिक नेशनल हेराल्ड से की
- इसके बाद B.A.G. Films के साथ जुड़कर STAR NEWS के लिए क्राइम शो बनाए
- SAHARA TV में भी लगभग 2 वर्षों तक कार्यरत रहे

रक्षा और सुरक्षा के मामलों पर उनकी पकड़, ग्राउंड-जीरो रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण उन्हें देश के सबसे भरोसेमंद डिफेंस जर्नलिस्ट्स में स्थापित करती है.

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