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क्या है ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट, जिसकी ब्रह्मोस-BSF की गुप्त जानकारी लीक होने के बाद हो रही चर्चा

साल 2019 में ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत 36 मामले दर्ज किए थे. वहीं साल 2020 में 39 मामले दर्ज किए गए और साल 2021 में 50 मामले दर्ज किए.

हाल ही में दो ऐसे मामले सामने आए थे जिसमें देश की सुरक्षा के लिए बहुत ही अहम प्रोजेक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों ने प्यार या पैसों के चक्कर में खुफिया जानकारी दुश्मन देश के एजेंट को दे दी थी. इन दोनों ही मामलों में आरोपी की ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत गिरफ्तारी हुई. 

पहला मामला महाराष्ट्र का था, जिसमें DRDO के एक वैज्ञानिक प्रदीप कुरुलकर एक पाकिस्तानी महिला एजेंट से आकर्षित हो गए थे. दोनों के बीच बातें होने लगी और प्रदीप ने उसे डिफेंस प्रोजेक्ट के अलावा भारतीय मिसाइल सिस्टम के बारे में कई गुप्त जानकारी दे दी. 

पुणे के वैज्ञानिक प्रदीप कुरुलकर से ही मिलता-जुलता मामला गुजरात के भुज में भी सामने आया था. यहां बीएसएफ में काम कर रहे एक कर्मचारी को पाकिस्तानी महिला एजेंट के साथ संवेदनशील जानकारी शेयर करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया.

2019 से 2021 तक कितने मामले दर्ज

एनसीआरबी की एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले कुछ सालों में ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत दर्ज मामलों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है. साल दर साल हनी ट्रैप या लालच के कारण देश की खुफिया जानकारी विदेशी जासूस को भेजने के मामले बढ़ रहे हैं. 

एनसीआरबी के डाटा के अनुसार साल 2019 में ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत 36 मामले दर्ज किए थे. वहीं साल 2020 में 39 मामले दर्ज किए गए और साल 2021 में 50 मामले दर्ज किए.

साल 2014 से 2018 तक मामले दर्ज हुए

लोकसभा में बताया साल 2018 में बताया गया था कि 2014 से ऑफिसियल सीक्रेट एक्ट के उल्लंघन के 50 मामले देश में पंजीकृत हैं. इन 50 मामलों में साल 2016 में 30 मामले दर्ज किए गए, साल 2015 में 9 मामले दर्ज किए गए और साल 2014 में 11 मामले दर्ज किए गए थे. वहीं साल 2014 में पंजीकृत 30 मामलों में से आठ तमिलनाडु के मामले थे तो वहीं  पंजाब और उत्तर प्रदेश में 5 मामले दर्ज हुए थे.

इस रिपोर्ट में जानते हैं कि आखिर ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट क्या होता है और किन गतिविधियों पर लागू किया जाता है?

 क्या है ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट

ऑफिसियल सीक्रेट एक्ट यानी आधिकारिक गुप्त अधिनियम को साल 1923 में अंग्रेजों ने बनाया था. यह एक जासूसी निरोधक कानून है जिसका इस्तेमाल कर अंग्रेज देश के स्वतंत्रता सेनानियों को जासूसी के आरोपों में फंसाते थे. इस एक्ट में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति अगर भारत के खिलाफ किसी भी तरह के षड्यंत्र में दुश्मन देश की मदद करता है या कोई गुप्त जानकारी पहुंचाता है तो ऐसी स्थिति में उसे कड़ी सजा दी जाएगी.

इस एक्ट के तहत कोई भी व्यक्ति निषिद्ध सरकारी क्षेत्र में बिना अनुमति के प्रवेश नहीं कर सकता है या उन क्षेत्रों का निरीक्षण तक नहीं कर सकता है. यहां तक ​​कि बिना अनुमति कोई व्यक्ति उन निषिद्ध सरकारी क्षेत्र को पार भी नहीं कर सकता है. 

ऑफिसियल सीक्रेट एक्ट के तहत को सरकार से जुड़े किसी भी ऑफिस की डिटेल, उसका नक्शा, स्केच या पासवर्ड किसी विदेश एजेंट से साझा करना अपराध की श्रेणी में आता है.

यह एक्ट भारत के बाहर के नागरिकों के ऊपर भी लागू

आधिकारिक गुप्त अधिनियम आम लोगों के अलावा भारत सरकार के कर्मचारियों और भारत के बाहर भारतीय नागरिकों पर भी लागू होता है. इसके अंतर्गत निम्नलिखित गतिविधियां शामिल की जाती है;

1. किसी भी व्यक्ति कोई सरकारी या महत्वपूर्ण बिल्डिंग का नक्शा या स्केच बनाना, जरूरी फाइल में दर्ज जानकारी को नोट करना इस एक्ट की तहत अपराध की श्रेणी में आता है. क्योंकि देश के दुश्मन हमारे देश के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देने के लिए इतना काफी है.

2. अगर कोई व्यक्ति देश की सुरक्षा के लिहाज से कोई गुप्त जानकारी इकट्ठा कर रहा हो, रिकॉर्ड कर रहा हो या फिर कोई भी गुप्त  योजना, मॉडल या दस्तावेज किसी ऐसे इंसान को भेजने की कोशिश कर रहा हो जिससे देश की सुरक्षा या पड़ोसी देशों से मैत्रीपूर्ण संबंध प्रभावित हो, ऐसे व्यक्ति के खिलाफ ऑफिसियल सीक्रेट एक्ट के तहत कानूनी कार्यवाही की जाएगी. 

विदेशी एजेंट के साथ जानकारी शेयर करने का दोषी कैसे माना जाता है 

1. इस एक्ट के तहत अगर कोई व्यक्ति भारत में या भारत के अलावा भी किसी अन्य देश में रहते हुए किसी विदेशी एजेंट के पते का दौरा करता है या उस एजेंट के साथ किसी तरह का सम्बन्ध रखता है तो उसे दोषी माना जा सकता है. 

2. भारत सरकार का कोई कर्मचारी या  कोई ऐसा व्यक्ति जिसे केंद्र सरकार की तरफ से कोई कॉन्ट्रैक्ट दिया गया हो इस जानकारी को किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा करता है, तो ऐसी स्थिति में वह अपराधी माना जायेगा.

3. कोई भी व्यक्ति भारत मे की जा रही कोई गुप्त ऑपरेशन, लड़ाई से जुड़ा कोई नक्सा, फोटो, स्केच, योजना, मॉडल, लेख,  दस्तावेज की किसी विदेशी एजेंट को भेजता है तो उसके खिलाफ इस एक्ट के तहत कार्यवाही की जाएगी.

दोषी को कितने सालों तक की मिल सकती है सजा 

कोई व्यक्ति अगर इस एक्ट के तहत लगाए गए आरोपों पर दोषी करार होता है तो ऐसी स्थिति में उस व्यक्ति को कम से कम  3 साल तक की सजा होगी. हालांकि अगर अपराध रक्षा कार्यों, सैन्य या वायुसेना प्रतिष्ठान, सुरंगों, कारखाना, डॉकयार्ड, शिविर, नौसेना, जहाज, गुप्त आधिकारिक कोड से जुड़ा हो तो उसे 14 साल की सजा दिए जाने का प्रावधान है.

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