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Bihar Politics: नीतीश से नाता टूटने के बाद क्या CAA और जातीय जनगणना को लेकर BJP की बढ़ेंगी मुश्किलें?

Bihar Politics: बिहार सीएम पद से इस्तीफे के बाद जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार (Nitish Kumar) महागठबंधन के नेता चुन लिए गए हैं और अब वह बीजेपी (BJP) से ही दो-दो हाथ करने के मूड में दिखाई दे रहे हैं.

Nitish Kumar Vs BJP: राजनीति के पेशे में न कोई किसी का दोस्त होता है और न दुश्मन यहां ये रिश्ते नफे-नुकसान के बल पर बनते और बिगड़ते हैं. ऐसा ही कुछ नजारा आज मंगलवार 9 अगस्त को बिहार (Bihar) में देखने को मिला है. एनडीए (NDA) के सहयोग से साल 2020 में सूबे के मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने आज इस्तीफा दे दिया. अब वो बीजेपी (BJP) की ही लुटिया डुबाने के लिए तैयार नजर आ रहे हैं. इस्तीफा देने के बाद उनका सीधे पटना में राबड़ी देवी के घर पहुंचना बहुत कुछ कहता है.

राबड़ी देवी के घर में हुई बैठक में उन्हें गठबंधन का नेता चुन लिया गया है. कभी बीजेपी के साथ जाने को मास्टर स्ट्रोक कहने वाले नीतीश आज एनडीए की बुराई करते नहीं अघा रहे हैं. इसके साथ ही केंद्र में बीजेपी की एनडीए सरकार के माथे पर भी बल पड़ने शुरू हो गए हैं, क्योंकि एनडीए के सहयोग से सत्ता में आए नीतीश कुमार उन चुनिंदा नेताओं में से है जो एनडीए के साथ रहते हुए भी सीएए पर विरोध और जातीय जनगणना के पक्ष पर मुखर रहने के लिए मशहूर हैं. 

बीजेपी के सिर फोड़ा ठीकरा

नीतीश कुमार ने राज्पाल को अपना इस्तीफा सौंपने के तुंरत बाद हुई बैठक के बाद एनडीए छोड़ने का एलान कर डाला. जेडीयू (JDU) की बैठक में सबने उनके फैसले का समर्थन किया है. सूत्रों की मानें तो नीतीश कुमार ने साल 2020 में बीजेपी के साथ गठबंधन के बाद खुद के कमजोर होने का ठीकरा भी बीजेपी के सिर फोड़ डाला है. गौरतलब है कि साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बिहार में एनडीए का पलड़ा भारी था. तब 40 में से 39 सीटें एनडीए की झोली में थीं. उस वक्त बीजेपी 17 सहित एलजेपी को 6 और जेडीयू को 16 सीटें मिलीं थी.

ये गठजोड़ साल 2020 के विधानसभा चुनाव में भी नजर आया. जेडीयू ने एनडीए ने साथ मिलकर ये चुनाव लड़ा और नीतीश कुमार बिहार के सीएम बन गए. लेकिन कहा जा रहा है बीते डेढ़ साल से एनडीए और जेडीयू के बीच सब अच्छा नहीं चल रहा है. इसकी एक वजह नीतीश कुमार के सीए और जातीय जनगणना के लिए मुखर विरोध को भी माना जा रहा है. सीएए और जातीय जनगणना एक तरह से देश में बीजेपी की दुखती रग है और इस रग को बार-बार छेड़ कर नीतीश ने जेडीयू के साल 1999 से चले आ रहे रिश्तों को भी रिस्क जोन में डाल दिया है. 

नीतीश ने बिगाड़ा बीजेपी के सीएए का खेला

गौरतलब है कि बिहार में जनता दल यूनाईडेट शुरू से ही नागरिकता (संशोधन) विधेयक सीएए (Citizenship Amendment Act, 2019 -CAA) लागू करने के खिलाफ रही है. तीन महीने पहले ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने जब पश्चिम बंगाल के दौरे के वक्त कहा था कि कोविड-19 (Covid-19) के खत्म होने के बाद किसी भी हालत में सीएए लागू किया जाएगा. तब इस पर नीतीश कुमार की प्रतिक्रिया देखने लायक थी.

मई 2022 को जब पत्रकारों ने उनसे सीएए लागू करने को लेकर सवाल किया तो नीतीश ने अपने जवाब से सभी को चौंका दिया था. तब नीतीश ने कहा, "देखिए अब जो भी केंद्र का फैसला होगा, अभी कोविड-19 का दौर फिर से बढ़ने लगा है. मेरी ज्यादा चिंता है ... लोगों की रक्षा करने में. कोई पॉलिसी की बात होगी, हम उसको अलग से देखेंगे. अभी हमने देखा नहीं है."

इसी से साफ होता है कि नीतीश कुमार सीएए को लेकर किसी दबाव में नहीं रहने वाले है. वो सीएए की खिलाफत में रहे हैं और रहेंगे. नीतीश ने बैलोस ये पहले से ही साफ कर दिया कि बिहार में एनआरसी लागू होने का सवाल ही नहीं उठता है. यही नहीं नीतीश कुमार ने बीजेपी के साथ रहते हुए फरवरी 2020 में बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन ही बिहार में एनआरसी लागू न किए जाने को लेकर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करवाया था. 

जातीय जनगणना पर भी केंद्र सरकार से टकराव

गौरतलब है कि ठीक एक साल पहले अगस्त 2021 में नीतीश कुमार जातिगत जनगणना (Caste Census) के मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) से मुलाकात कर चुके हैं. बिहार में उस वक्त जातिगण जनगणना को लेकर घमासान मचा हुआ था. नीतीश के साथ पीएम से मिलने वालों में 10 पार्टियों के 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शामिल था. तब नीतीश कुमार ने कहा था कि पीएम ने हमारी पूरी बात सुनी और हमने उन्हें जातिगत जनगणना के पक्ष में सब बताया.

साल 2022 में भी बीजेपी के विरोध के बाद नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने जल्द से जल्‍द राज्य में जाति जनगणना (Caste Based census) कराने के फैसले की बात दोहराई है. जेडीयू के मंत्री और नेता भी इस मुद्दे को लेकर अपनी पक्ष साफ कर चुके हैं. बीजेपी जाति आधारित जनगणना के पक्ष में नहीं है. बिहार में जेडीयू और वहां का विपक्ष भी जाति जनगणना पर अड़ा है. 

तब बीजेपी के एग्रीकल्‍चर मिनिस्‍टर अमरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि था कि बिहार और देश में जाति आधारित जनगणना की आवश्यकता नहीं है. आरजेडी नाहक नीतीश सरकार पर दबाव बना रही है और दबाव में सरकार नहीं चलती. हालांकि उस वक्त ये साफ नहीं हो पाया था कि बीजेपी नेता का इशारा आरजेडी की तरफ था या नीतीश कुमार की तरफ, लेकिन आज के घटनाक्रम से सब साफ हो गया है. 

हालांकि इसके बाद भी नीतीश कुमार अपनी जिद पर अड़े रहे. उन्होंने तब एलान किया था कि वे जल्द से जल्द जाति आधारित जनगणना के लिए सर्वदलीय बैठक (All party meeting) बुलाएंगे. बीते साल 23 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद पीएम ने नीतीश को जातिगत मतगणना राज्य के खर्चे पर कराने के लिए कह दिया था. तब तत्कालीन केंद्रीय गृह राज्‍य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में साफ कहा था कि यह असंभव है. 

और बन गए नेता गठबंधन के नीतीश

आज मुख्यमंत्री राबड़ी देवी (Rabri Devi) के आवास पर राजद (RJD) के नेतृत्व वाले महागठबंधन की बैठक में नीतीश कुमार को गठबंधन का नेता चुन लिया गया है. इसमें भाकपा-माले और कांग्रेस (Congress) के नेता भी शामिल रहे. राष्ट्रीय जनता दल के विधायकों, एमएलसी और राज्यसभा सांसद ने पार्टी नेता तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) को नेता चुनने का फैसले लेने के लिए अधिकृत किया था. यहीं नहीं कांग्रेस और वाम दलों के विधायकों ने भी यादव को इसके लिए सहमति दी थी. राजद के नेतृत्व वाले विपक्ष ने साफ कहा था कि वे  जेडीयू और नीतीश कुमार (Nitish Kumar) का समर्थन करेंगे.

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