आंतें भारत में तो पाकिस्तान में दफ्न है जहांगीर का बाकी शरीर, पढ़ें औरंगजेब के दादा की मौत की दास्तां
जीवन के आखिरी सालों में मुगल बादशाह जहांगीर कश्मीर चले गए थे. इस दौरान नूरजहां, उनके दामाद शहरयार भी उनके साथ थे. मौत के बाद जहांगीर के शरीर को बैठी हुई मुद्रा में पालकी में बैठाकर लाहौर लाया गया.

Mughal Emperor Jahangir Tomb: भारत के इतिहास में 300 सालों से ज्यादा का समय मुगलों के नाम पर दर्ज है. बाबर से शुरू हुई कहानी हुमायूं, अकबर, जहांगीर, शाहजहां और औरंगजेब से होते हुए बहादुर शाह जफर पर खत्म हुई. लेकिन आज हम जिस मुगल शासक की बात कर रहे हैं उसकी कब्र की कहानी बड़ी दिलचस्प है. ये मुगल बादशाह जहांगीर थे, जिसकी मौत के बाद शरीर से अंतड़ियां तक निकाल ली गई थीं.
वैसे तो जहांगीर की कब्र पाकिस्तान के लाहौर में मौजूद है, लेकिन एक कब्र भारत में भी है. अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसा कैसे हो सकता है तो इसके पीछे की वजह भारत में जहांगीर की आंतें होना और लाहौर में बाकी शरीर दफन होना है.
जब सिपहसालार ने किया अपहरण
जहांगीर के शासन की एक बड़ी घटना यह थी जब उनके सिपहसालार महाबत खां ने उनका अपहरण कर लिया था. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, सिपहसालार ने न सिर्फ बादशाह को कैद किया, बल्कि उन्हें फिजिकली गद्दी से उठाकर अपने पास रखा. जहांगीर को हाथी पर बैठाया और सभी मान-मर्यादा को बरकरार रखा. महाबत खां ने ये नहीं कहा कि मैं बादशाह हूं...इतना ही नहीं जहांगीर भी उनके साथ काफी प्यार से पेश आ रहे थे. महाबत खां जहांगीर से कह रहे थे कि आप बुरी संगत में हैं और मैं आपको उस बुरी संगत से बचा रहा हूं.
भारत और लाहौर, दो जगह दफन है जहांगीर का शरीर
जहांगीर की मौत 28 अक्टूबर, 1627 को राजौरी और भिंभर (कश्मीर) के बीच 58 साल की उम्र में हुई. इस दिन जब पत्नी नूरजहां उन्हें जगाने आईं तो जहांगीर ने अपनी आंखें नहीं खोलीं. ऐसा हुआ तो नूरजहां की आंखों से आंसू निकलने लगे और मौलाना हिसाम-उद्दीन ने इनकी रूह की शांति के लिए दुआ की.
अपने जीवन के आखिरी सालों में वो कश्मीर की तरफ चले गए थे. उस दौरान नूरजहां, उनके दामाद शहरयार और आसिफ खां भी उनके साथ थे. जिस जगह पर जहांगीर का निधन हुआ, उस जगह का नाम चंगेजघट्टी था. मौत के बाद उनके शरीर पर लेप लगाया गया और उनकी अंतड़ियों को निकालकर वहीं दफन कर दिया गया. अंतड़ियां निकालने के बाद जहांगीर के शरीर को बैठी हुई पोजीशन में पालकी में बैठाकर लाहौर लाया गया, जहां उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया.
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