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मध्य प्रदेश उपचुनाव में कुत्ते की समाधि बेचना भी बन गया चुनावी मुद्दा, जानें आखिर क्या है ये पूरा मामला

कुत्ते की समाधि का मामला सियासी फिजा में घुल गया. लोगों की रुचि यह जानने में बढ़ गई कि आखिरकार ऐसा कौन सा कुत्ता था जिसकी समाधि बनी और यह है कहाँ?

ग्वालियर:  मध्य प्रदेश में नामांकन की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है और चुनाव प्रचार अभियान भी अब परवान चढ़ने लगा है. हालांकि, उपचुनाव एमपी के विंध्य, मालवा और बुंदेलखंड में भी होने हैं लेकिन मुख्य अखाड़ा ग्वालियर चंबल अंचल ही है.

इसकी दो वजह हैं- एक, सबसे ज्यादा यानी 28 में से 16 सीटों पर उपचुनाव इसी अंचल में हो रहे हैं लिहाजा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार की जीवन रेखा की लंबाई तय करने में यहां के परिणाम बहुत निर्णायक होंगे. दूसरा न केवल ज्योतिरादित्य सिंधिया बल्कि समूचे सिंधिया परिवार के सियासी भविष्य का फैसला भी अब यह उपचुनाव करेगा. क्योंकि सत्तर के दशक के बाद पहला मौका है जब पूरा सिंधिया परिवार एक साथ एक ही दल यानी बीजेपी में है. यही वजह है इस चुनाव में प्रचार की मुख्य धुरी ज्योतिरादित्य सिंधिया ही हैं.

कांग्रेस लगातार उन पर कथित भूमि घोटालों के आरोप लगा रही है. बीजेपी इस मामले में ज्यादा आक्रामक रुख इसलिए नहीं अपना पा रही क्योंकि ये वही आरोप हैं जो दशकों से बीजेपी के बड़े नेता सिंधिया परिवार पर लगाते रहे हैं. बीजेपी की चुप्पी के बाद आमतौर पर ऐसे मामलों पर चुप रहने वाले सिंधिया परिवार ने मुखिया ज्योतिरादित्य ने खुद जवाब दिया. सिंधिया ने कहा, “भैया आप सबको पता है. मेरे पास जो संपत्ति है वह तो तीन सौ साल पुरानी है. सवाल तो उनसे पूछो जो कुछ सालों में ही महाराज बन गए हैं.”

इस पर कांग्रेस ने फिर नया आक्रमण किया. पूर्व सांसद अरुण यादव ने शिवपुरी की सभा में कहा कि इनकी बात क्या करें इन्होंने तो कुत्ते की समाधि तक करोड़ों में बेच डाली. इसी दिन कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा और  वर्षों से सिंधिया परिवार से जुड़े और भूमि संबंधी मामले उठा रहे कांग्रेस नेता मुरारी लाल दुबे ने कुत्ते की समाधि से संबंधित सारे दस्तावेज मीडिया को देकर दावा किया कि कुत्ते की समाधि सरकारी जमीन है, जिसमें पार्क बना है लेकिन सिंधिया परिवार ने उसे बेच दिया. इसके साथ ही कुत्ते की समाधि का मामला सियासी फिजा में घुल गया.

कैसे बना सियासी मुद्दा?

जिस कुत्ते की बात हो रही है, वह माधराव सिंधिया प्रथम का सबसे वफादार कुत्ता था.  कहा जाता है कि इसे जॉर्डन के शाह ने तत्कालीन सिंधिया शासक माधो महाराज प्रथम को उपहार में दिया था. इसका नाम था ‘हुजू’. इस समाधि पर लगे बीजक में कहा गया है कि महाराज पेरिस यात्रा पर गए थे. वहीं उनकी तबियत खराब हो गई.  हुजु का मालिक के प्रति लगाव ऐसा था कि जब माधराव सिंधिया प्रथम की तबीयत बिगड़ना शुरू हुई तो हुजु ने खाना-पीना छोड़ दिया. वहीं जब सिंधिया प्रथम का पेरिस में निधन हुआ तो यहां ग्वालियर में हुजु ने भी प्राण त्याग दिए. लिहाजा हुजु की वफादारी और प्रेम को देखते हुए सिंधिया प्रथम के बेटे जीवाजीराव सिंधिया ने महलगांव मौजे में उसका अंतिम संस्कार किया और वही समाधि बनवा दी .

दिवंगत महाराज की अंतिम इच्छा थी कि उनके शव को उनके वफादार कुत्ते के पास ले जाया जाए लिहाज फ्रांस से जब उनकी उनके अस्थि कलश ग्वालियर पहुंचे तो उन्हें कुछ देर के लिए हुजू की समाधि पर भी ले जाकर रखा गया. यहां इसका भी स्मारक बनाकर इसमें इस पूरे वृतांत का उल्लेख किया गया है.

अब यह समाधि शहर की सिटी सेंटर इलाके में स्थित  कॉलोनी शारदा विहार में है. इसमें सार्वजनिक पार्क है क्योंकि टाउन एन्ड कंट्री प्लानिंग और ग्वालियर विकास प्राधिकरण द्वारा पारित नक्शे में यह जमीन नजूल की बताई गई और इसे पार्क के लिए आरक्षित किया गया था. लेकिन कई सालों बाद अचानक पार्क पर कुछ लोग कब्जा करने पहुंचे तो लोगों को पता चला कि इस पार्क को सिंधिया परिवार ने बेच दिया. हालांकि तब सिंधिया कांग्रेस में थे और प्रदेश में बीजेपी की सरकार थी तो उसके नेताओं ने  मदद कर पार्क पर कब्जा होने से रोका और कॉलोनी वालों ने रजिस्ट्री रद्द करने की कार्यवाही की.

इन्वेंटरी है कुत्ते की समाधि

अब इसी कुत्ते की समाधि को लेकर कांग्रेस ने राजस्व अभिलेखों के आधार  पर  आरोप लगाया है कि कुत्ते की समाधि इन्वेंटरी में दर्ज है. साथ ही यह बेशकीमती जमीन है. जिसे सरकारी अफसरों की मदद से फर्जी दस्तावेजों के जरिए सिंधिया ट्रस्ट ने बेच दिया है. लिहाजा उपचुनाव से पहले प्रदेश की सियासत में घमासान मचा हुआ है. कांग्रेस सिंधिया को भू-माफिया बताने पर तुली हुई है. कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा का कहना है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया इस ग्वालियर चंबल अंचल के सबसे बड़े भू-माफिया हैं. उन्होंने सरकारी जमीन को जिला प्रशासन की मदद से अपने कब्जे में कर लिया है.

यह है राजस्व रिकॉर्ड और कांग्रेस का आरोप

कांग्रेस के अनुसार  यह समाधि ग्राम महलगांव तहसील ग्वालियर के सर्वे क्र. 916 रकवा .293 (1 बीघा 8 बिस्वा) सन् 1996 तक राजस्व अभिलेखों में राजस्व विभाग, कदीम, आबादी, पटोर नजूल के तौर पर दर्ज थी. सन् 1996 के पश्चात् कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से अवैधानिक तरीकों से तहसीलदार, ग्वालियर द्वारा बिना किसी वैधानिक आवेदन, बिना किसी प्रकरण दायर किये और शासन का पक्ष सुने स्व. माधवराव सिंधिया के नाम पर नामांतरित कर दी गई इस अवैध कार्य में तत्कालीन तहसीलदार ने माननीय उच्च न्यायालय, ग्वालियर की याचिका क्र.-61,62,63,64/1969 के आदेश दिनांक-08 सितम्बर 1981 के एक आदेश की भी अनुचित/अवैधानिक व्याख्या का दुरूपयोग करते हुए इस काम को अंजाम दिया जो एक गंभीर अपराध है, क्योंकि तहसीलदार न्यायालय को यह अधिकार न होकर प्रकरण लैण्ड रेवेन्यू कोड की धारा-57(2) के तहत यह अधिकार उपखंड अधिकारी एस.डी.ओ. को प्रदत्त है?  इस नामांतरण के बाद श्रीमति माधवीराजे सिंधिया ने अपने पुत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया व पुत्री चित्रांगदा राजे की सहमति के साथ इस भूमि का विक्रय कर दिया.

बकौल कांग्रेस  महाराजा ग्वालियर की ओर से उक्त सर्वे नं. के संबंध में यह बताया गया है कि यह भूमि उनकी व्यक्तिगत संपत्ति है. हकीकत यह है कि भारत सरकार से हुये समझौते के अनुसार महाराजा ग्वालियर की जो व्यक्तिगत पूर्ण स्वामित्व व उपयोग की जो संपत्ति थी, जिसकी चार सूचियां प्रकाशित हुई उसके अनुसार उस सूची क्र. 4 के अनुक्रम 28 पर इस भूमि का विवरण" Samadhi of the remain of H.L.H  Madhavrao Maharaja and Hass dog in the garden of Sardar Patankar Sahab." के रूप में दर्ज और महलगांव के सर्वे क्र. 916 में स्थित है. वर्ष 1992-93 में सर्वे क्र.-916 शासकीय भूमि के रूप में दर्ज है तथा खाता नं. 12 कैफियत में कुत्ता समाधि दर्ज है और इसका कब्जा पी.डब्ल्यू.डी. के अधीक्षण यंत्री के आदेश पर कार्यपालक अभियंता पी.डब्ल्यू.डी. ने ले लिया था.

कांग्रेस का दावा है कि माधवराव सिंधिया ने माननीय उच्च न्यायालय, ग्वालियर द्वारा पारित जिस उक्त प्रकरण क्रमांक का उल्लेख विक्रय पत्र में किया है जिसमें यह बताया गया है कि इसी आदेश के आधार पर सर्वे क्र.-916 हमें प्राप्त हुआ है, जो पूर्णतः गलत है,क्योंकि उच्च न्यायालय ने अपने प्रकरण में इस सर्वे नं. का कोई उल्लेख ही नहीं किया है! यह एक गंभीर किस्म की धोखाधडी भी है, यही नहीं यहां यह स्पष्ट करना भी आवश्यक है कि श्री माधवराव सिंधिया के स्वर्गवासी होने के पश्चात उनके वारिसान का नामांतरण भी वैधानिक रूप से नहीं किया गया है.

इस मामले में अभी तक सिंधिया परिवार ने कोई सफाई नही दी है बल्कि चुप्पी साधे हुए है. कांग्रेस के कथित भू माफिया होने के आरोप का ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कॉमन जबाव में दिया . उन्होंने कहा कि उनकी संपत्ति 300 साल पुरानी है सवाल तो नए महाराजों से पूछना चाहिए.

कांग्रेस देख रही जमीन के सपने- बीजेपी

वहीं इस मामले में बीजेपी भी  लगातार जबाव देने से बचती नजर आ रही है  मामले ने बहुत तूल पकड़ा तो बीजेपी के प्रदेश मीडिया प्रभारी लोकेंद्र पाराशर का कहना है कि कांग्रेस को इस समय सपने में जमीन दिख रही है, क्योंकि सिंधिया ने उनकी जमीन खिसका दी है और कांग्रेस का जमीन सबसे प्रिय विषय है. उनके खानदान का दामाद रॉबर्ट वाड्रा हजारों करोड़ों रूपये की जमीन दबा कर बैठे  हैं, इसलिए उनको सपने में सिर्फ जमीन ही याद आती है.

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