यूपी के लव जिहाद विरोधी कानून पर सुनवाई से SC ने मना किया, कहा- पहले HC को लेने दीजिए फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के लव जिहाद विरोधी कानून के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को इलाहाबाद हाई कोर्ट जाना चाहिए.

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के अवैध धर्मांतरण और लव जिहाद विरोधी कानून के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करने से आज सुप्रीम कोर्ट ने मना कर दिया. कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को इलाहाबाद हाई कोर्ट जाना चाहिए, जहां पहले से मामले की सुनवाई चल रही है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि वह हाई कोर्ट का आदेश देखने के बाद ही मामले की सुनवाई करेगा.
6 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने विशाल ठाकरे नाम के याचिकाकर्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए इस मामले में नोटिस जारी किया था. उस याचिका में यूपी के अलावा उत्तराखंड के भी मिलते-जुलते कानून को चुनौती दी गई थी. आज एनजीओ पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज ने भी उस याचिका में दखल देने की कोशिश की. एनजीओ की तरफ से वरिष्ठ वकील संजय पारीख ने उन्हें भी सुने जाने की मांग की.
चीफ जस्टिस एस ए बोबड़े की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने नई याचिका को सुनने से इनकार कर दिया. चीफ जस्टिस ने कहा, "हाई कोर्ट मामले को सुन रहा है. आप वहां जाइए." वकील ने इस पर कहा, "लेकिन सुप्रीम कोर्ट पहले ही इससे मिलते एक मामले पर नोटिस जारी कर चुका है. हमारी याचिका भी यहीं सुनी जानी चाहिए."
बेंच इस बात से आश्वस्त नहीं हुई. चीफ जस्टिस ने कहा, "यह ठीक है कि हमने एक याचिका पर नोटिस जारी किया था. लेकिन हमने हाई कोर्ट की सुनवाई पर भी कोई रोक नहीं लगाई थी. हम चाहते हैं कि पहले हाई कोर्ट अपना आदेश दे. उसके बाद ही हम मामले को सुनेंगे."
इससे पहले यूपी सरकार भी 6 जनवरी को आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश को आधार बनाते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट में लंबित सभी याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने की गुहार कर चुकी है. इस मांग को भी सुप्रीम कोर्ट ने यही कहते हुए खारिज कर दिया था कि वह पहले हाई कोर्ट का फैसला देखना चाहता है. ऐसे में यह साफ हो गया है कि सुप्रीम कोर्ट फिलहाल इस मामले की सुनवाई नहीं करेगा.
























