राहुल गांधी को हराने से राजनीतिक गलियारों में बढ़ा स्मृति ईरानी का कद, दूसरी बार ली मंत्री पद की शपथ
टीवी की चहेती बहू ‘तुलसी’ अब उस पहचान को पीछे छोड़कर एक मंझी हुई राजनीतिज्ञ के रूप में उभरी है. इस बार उन्होंने अमेठी में राहुल कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को हराया है.

नई दिल्ली: गांधी परिवार के गढ़ अमेठी से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को हराकर लोकसभा चुनाव में सबसे बड़ा उलटफेर करने वाली स्मृति ईरानी ने राजनीति में अपना कद काफी ऊंचा किया है. कभी छोटे पर्दे की हर दिल अजीज बहू रही स्मृति अब कुशल राजनीतिज्ञ के रूप में पहचान बना चुकी है. स्मृति ईरानी ने दूसरी बार नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली.
चुनाव के ठीक बाद अमेठी में एक कार्यकर्ता की हत्या के बाद उसकी अर्थी को कंधा देकर स्मृति ने एक नयी मिसाल पेश की. पिछली बार लोकसभा चुनाव में हार के बावजूद उन्होंने मानव संसाधन विकास, सूचना और प्रसारण और कपड़ा मंत्रालय जैसे मंत्रालयों का जिम्मा संभाला. आइए जानते हैं स्मृति ईरानी के बारे में...
कांग्रेस के गढ़ में दर्ज की जीत
टीवी की चहेती बहू ‘तुलसी’ अब उस पहचान को पीछे छोड़कर एक मंझी हुई राजनीतिज्ञ के रूप में उभरी है. पिछली बार राहुल से अमेठी में एक लाख से अधिक मतों से हारने के बाद उन्होंने अमेठी से नाता नहीं तोड़ा. नतीजतन इस बार फिर उसी संसदीय क्षेत्र से बीजेपी ने ईरानी को फिर उम्मीदवार बनाया. ईरानी को क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहने का फायदा मिला और इसके बूते उन्होंने गांधी से पिछली बार मिली हार का बदला लिया.
स्मृति ने अमेठी में लहराया भगवा परचम
गांधी परिवार की परंपरागत संसदीय सीट अमेठी इस बार के आम चुनाव में बीजेपी के पास चली गई. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी चुनाव हार गए. बीजेपी प्रत्याशी स्मृति ईरानी ने उन्हें 55,120 वोटों से परास्त कर इस सीट पर भगवा परचम लहरा दिया है. केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी इस सीट से दूसरी बार उम्मीदवार थीं. राहुल गांधी यहां से चौथी बार चुनाव मैदान में थे. इस बार स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को 54 हजार सात सौ 31 वोटों से हराया. अमेठी में स्मृति ईरानी को कुल चार लाख 67 हजार पांच सौ 98 वोट मिले, जबकि राहुल गांधी को चार लाख बारह हजार 8 सौ 67 वोट मिले.
ईरानी ने अपनी जीत के बाद ट्वीट करके दुष्यंत कुमार की कविता की पंक्तियां लिखी थी ,‘‘ कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता .’’
मोदी सरकार 1 में संभाले कई महत्वपूर्ण मंत्रालयकौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता ...
— Smriti Z Irani (@smritiirani) May 23, 2019
पिछली बार चुनाव हारने के बावजूद उन्हें नरेंद्र मोदी सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री बनाया गया और बाद में वह सूचना प्रसारण और फिर कपड़ा मंत्री रही. ईरानी को उनकी शैक्षणिक योग्यता को लेकर या बतौर मंत्री कार्यकाल में कई विवादों का सामना करना पड़ा. अपने नामांकन पत्र में उन्होंने कहा था कि वह स्नातक नहीं है. वहीं 2014 चुनाव में उन्होंने कहा था कि वह 1994 में दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं जिससे उनके दावे की विश्वसनीयता को लेकर विवाद पैदा हो गया था. विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि वह स्नातक नहीं है.
व्यकितगत जीवन स्मृति ईरानी दिल्ली में मध्यवर्गीय परिवार में 23 मार्च 1976 को पैदा हुईं. उनके पिता पंजाबी और मां बंगाली हैं. तीन भाई-बहनों में स्मृति सबसे बड़ी हैं. परिवार की आर्थिक सहायता के लिए स्मृति ने दसवीं कक्षा के बाद ही काम करना शुरू कर दिया था. 1998 में स्मृति ने 'मिस इंडियां' प्रतियोगिता में हिस्सा लिया लेकिन वह फाइनल तक नहीं पहुंच पाईं. इसके बाद स्मृति ने मुंबई जाने की ठानी. मुंबई में शुरुआती दिनों में स्मृति ने आजीविका चलाने के लिए मैकडॉन्लड्स में भी काम किया. इसके बाद साल 2001 में उनकी शादी जुबिन ईरानी हुई. शादी के बाद उन्हें एकता कपूर का सीरियल मिला. यही स्मृति के लिए जिंदगी का ट्रनिंग प्वाइंट रहा. सीरियल 'क्योंकि सास भी कभी बहू' थी से वह घर-गर में तुलसी नाम के किरदार से प्रचलित हो गईं. यह नाटक काफी प्रसिद्ध हुआ और स्मृति ईरानी को इस सीरियल के लिए कई अवॉर्ड मिले. इसके बाद स्मृति राजनीति में आ गईं. पहली बार साल 2004 में कपिल सिब्बल के खिलाफ लड़ा लोकसभा चुनाव समृति ईरानी ने साल 2003 में बीजेपी ज्वाइन किया और उन्हें महाराष्ट्र यूथ विंग की जिम्मेदारी दी गई. इसके बाद साल 2004 के लोकसभा चुनाव में दिल्ली के चांदनी चौक से बीजेपी प्रत्याशी के रूप में कांग्रेस राजनेता कपिल सिब्बल के खिलाफ चुनाव लड़ीं. स्मृति चुवान हार गईं, लेकिन उनको कुछ समय बाद ही बीजेपी की केंद्रिय समिति की एग्जक्यूटिव मेंबर बनाया गया. 2010 में स्मृति ईरानी पार्टी की राष्ट्रीय सचिव और महिला विंग की प्रसिडेंट बनाई गईं. 2011 में स्मृति गुजरात राज्यसभा के सदस्य के रूप में निर्वाचित हुईं. सितंबर 2011 से वे राज्य की कोयला और स्टील समिति की सदस्य हैं. मोदी लगातार दूसरी बार बने प्रधानमंत्री, 57 मंत्रियों के साथ ली शपथ, अमित शाह- जयशंकर भी बने कैबिनेट मंत्री अनदेखी तस्वीरें: मोदी के शपथ समरोह में सोनिया-राहुल, अंबानी परिवार सहित 8 हजार लोगों ने की शिरकत कैबिनेट मंत्री बने अमित शाह को मिल सकता है विदेश मंत्रालय, BJP अध्यक्ष पद की दौड़ में नड्डा सबसे आगे यह भी देखें Source: IOCL























