भारत और चीन की सेनाओं के सैन्य कमांडर्स के बीच हुई बातचीत, पढ़ें- मीटिंग से जुड़ी हर बड़ी बात
सूत्रों की मानें तो विवाद पूरी तरह से सुलझाने के लिए अभी सैन्य और राजनयिक स्तर पर कई और मीटिंग हो सकती हैं.

नई दिल्ली: भारत और चीन की सेनाओं ने शनिवार को उच्चस्तरीय सैन्य बातचीत की और पूर्वी लद्दाख में करीब एक महीने से सीमा पर जारी गतिरोध को शांतिपूर्ण संवाद के माध्यम से समाप्त करने का संकेत दिया. भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व लेह स्थित 14वीं कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने किया, जबकि चीनी पक्ष का नेतृत्व तिब्बत सैन्य जिले के कमांडर कर रहे थे. सेना और विदेश मंत्रालय ने इस बहु-प्रतीक्षित बैठक के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है.
10 बड़ी बातें
1- यह मीटिंग वास्तविक नियंत्रण रेखा यानि एलएसी पर चीन की तरफ मोलडो में बनी बॉर्डर पर्सनैल मीटिंग (बीपीएम) हट में हुई, जो भारत की चुशूल स्थित बीपीएम हट से सटी हुई है. पैंगोंग त्सो लेक से मोलडो की दूरी करीब 18 किलोमीटर है. मीटिंग भारत के समयनुसार दिन के साढ़े ग्यारह बजे (11.30 बजे) शुरू हुई.
2- शाम तक चली इस मीटिंग के बारे में सेना की तरफ से फिलहाल कोई जानकारी नहीं दी गई है. लेकिन सूत्रों से ये जानकारी जरूर मिल गई कि भारतीय सैन्य प्रतिनिधिमंडल ने मीटिंग में अपने चीनी समकक्ष से क्या मांग रखी. सूत्रों के मुताबिक, भारतीय सेना ने साफ कर दिया कि चीन को स्टेट्स-कयो यानि अप्रैल महीने की शुरूआत वाली स्थिति पर लौटना पड़ेगा. साथ ही भारत सीमावर्ती इलाकों में सड़क और दूसरा निमार्ण-कार्य नहीं रोकेगा, जिसके लिए चीन की तरफ से मांग रखी गई थी. भारत ने दो टूक कहा कि जो भी निमार्ण-कार्य किया गया है या किया जा रहा है वो भारत के अधिकार-क्षेत्र में है, किसी विवादित इलाके में नहीं है.
3- सूत्रों की मानें तो विवाद पूरी तरह से सुलझाने के लिए अभी सैन्य और राजनयिक स्तर पर कई और मीटिंग हो सकती हैं.
4- सूत्रों ने कहा कि दोनों सेनाओं में स्थानीय कमांडरों के स्तर पर 12 दौर की बातचीत और मेजर जनरल रैंक के अधिकारियों के बीच तीन दौर की बातचीत के बाद कोई ठोस नतीजा नहीं निकलने पर शनिवार को लेफ्टिनेंट जनरल स्तर पर बातचीत हुई.
5- उच्च स्तरीय सैन्य वार्ता से एक दिन पहले दोनों देशों के बीच राजनयिक स्तर पर बातचीत हुई और इस दौरान दोनों पक्षों में अपने मतभेदों का हल शांतिपूर्ण बातचीत के जरिये एक-दूसरे की संवेदनाओं और चिंताओं का ध्यान रखते हुए निकालने पर सहमति बनी थी.
6- पिछले महीने की शुरुआत में गतिरोध पैदा होने के बाद भारतीय सैन्य नेतृत्व ने फैसला किया था कि भारतीय जवान पैंगोंग सो, गलवान घाटी, डेमचोक और दौलत बेग ओल्डी के सभी विवादित क्षेत्रों में चीनी सैनिकों के आक्रामक रवैये के खिलाफ दृढ़ रुख अपनाएंगे.
7- माना जा रहा है कि चीनी सेना ने पैंगोंग सो और गलवान घाटी में करीब 2,500 सैनिकों की तैनाती की है और इसके अलावा वह धीरे-धीरे वहां अपने अस्थायी ढांचों और हथियारों को भी बढ़ा रहा है.
8- मौजूदा गतिरोध के शुरू होने की वजह पैंगोंग सो झील के आसपास फिंगर क्षेत्र में भारत द्वारा एक महत्वपूर्ण सड़क निर्माण का चीन द्वारा तीखा विरोध है. इसके अलावा गलवान घाटी में दरबुक-शायोक-दौलत बेग ओल्डी मार्ग को जोड़ने वाली एक और सड़क के निर्माण पर चीन के विरोध को लेकर भी गतिरोध है.
9- पैंगोंग सो में फिंगर क्षेत्र में सड़क को भारतीय जवानों के गश्त करने के लिहाज से अहम माना जाता है. भारत ने पहले ही तय कर लिया है कि चीनी विरोध की वजह से वह पूर्वी लद्दाख में अपनी किसी सीमावर्ती आधारभूत परियोजना को नहीं रोकेगा.
10- दोनों देशों के सैनिक बीते पांच और छह मई को पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग सो क्षेत्र में लोहे की छड़ और लाठी-डंडे लेकर आपस में भिड़ गए थे. उनके बीच पथराव भी हुआ था. इस घटना में दोनों पक्षों के सैनिक घायल हुए थे.
यह भी पढ़ें-Source: IOCL
























