कोलकाता: अखबार में इश्तिहार, एमए पास लड़की के लिए चाहिए वामपंथी दूल्हा

नई दिल्ली: आपने अखबारों में अनेक मेट्रोमोनियल इश्तेहार देखे होंगे, जिनमें मनपसंद दूल्हे और दुल्हन के लिए शक्ल-सूरत, नौकरी, कद-काठी, शिक्षा और जाति जैसी बातें तो आमतौर पर मिलती हैं. भारत के कुछ विज्ञापन में खाने-पीने की आदतों के बारे में भी जानकारी दी और मांगी जाती है. लेकिन एक विशेष राजनीतिक विचारधारा वाला विज्ञापन तो दुर्लभ ही है. एक समाजशास्त्री के अनुसार, 'यह इतना दुर्लभ है कि इससे पहले नहीं देखा गया.'
26 साल की एमए पास लड़की के लिए वामपंथी दूल्हा चाहिए
कोलकाता के एक परिवार को 26 साल की अपनी एमए पास लड़की के लिए एक ऐसा दूल्हा चाहिए जो वामपंथी विचारों के समर्थक यानी वामपंथी या कम्युनिस्ट हो. दीप्तांज दासगुप्ता ने अपनी बहन की शादी के लिए यह विज्ञापन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के अखबार गन शक्ति में प्रकाशित किया. दासगुप्ता खुद को मार्क्सवाद का छात्र कहते हैं, लेकिन इसके साथ ही वे यह भी कहते हैं कि वे किसी पार्टी के सदस्य नहीं हैं.
लड़की चाहती है दूल्हा हो वामपंथी
दीप्तांज दासगुप्ता ने बीबीसी को बताया, "हमारा मानना है कि वाम विचारधारा के लोग संकीर्ण नहीं होते, जीवन के हर क्षेत्र में उनकी रुचि होती है, वह उच्च चिंतन रखते हैं. हमारे घर का माहौल ऐसा ही है. ऐसे में अपनी बहन के लिए हम वैसा लड़का चाहते हैं जो खुद को वामपंथी बताने में गर्व महसूस करता हो. खासकर ऐसे समय में जब साम्यवाद को कोरी कल्पना मानी जा रही है.' दीप्तांज दासगुप्ता के अनुसार, वामपंथी दूल्हे की खोज करने की वजह यह भी है कि उसकी बहन को ससुराल में भी घर जैसा माहौल मिले. उसकी बहन भी ऐसा ही चाहती है.
'यह एक अविश्वसनीय विज्ञापन है'
कोलकाता के प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र के पूर्व प्रमुख प्रोफेसर दिशा कर ने इस विज्ञापन को अविश्वसनीय करार दिया. दिशा कर कहते हैं, 'विज्ञापन देने वाले ने ईमानदारी के साथ बोल्ड कदम उठाते हुए अपनी विचारधारा को सामने रखा, जिसमें उनका विश्वास झलकता है. हालांकि बंगाली अब खुद को अंतर्राष्ट्रीय कहने लगे हैं लेकिन पारंपरिक रूप में जो विभाजित है, वह अभी भी है. मैंने खुद देखा है कि विभिन्न राजनीतिक विचारधारा वाली शादी कितनी कड़वी हो जाती हैं. यही स्थिति ईस्ट बंगाल और पश्चिम बंगाल के निवासियों के बीच होने वाली शादियों में भी होती है.'
यह विज्ञापन ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में कम्युनिस्टों की स्थिति काफी कमजोर हो चुकी है. ऐसे में इस विज्ञापन का क्या ये मतलब निकाला जा सकता है कि साम्यवादी विचारधारा का सफाया नहीं हुआ है?
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