सुप्रीम कोर्ट के उन पांच जजों को जानिए जो आज अयोध्या मामले पर सुनवाई करेंगे
Ayodhya land dispute Case: जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट ने ये साफ कर दिया है कि वो अयोध्या मामले को साधारण भूमि विवाद की तरह नहीं देख रहा है. उसे एहसास है कि ये राष्ट्रीय महत्व का मसला है.

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में आज पांच जजों की संविधान पीठ अयोध्या मामले की सुनवाई करेगी. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ आज ये तय कर सकती है कि अयोध्या विवाद पर सुनवाई किस तारीख से होगी. साथ ही ये भी तय होगा कि क्या इस मामले पर रोज सुनवाई होगी. जानकारों का मानना है कि शीर्ष अदालत अयोध्या मामले को साधारण जमीन विवाद के तौर पर नहीं देख रही. धर्म से जुड़ा ये मसला राष्ट्रीय महत्व का है, ऐसे में इसके संवैधानिक पहलुओं की भी समीक्षा की जरूरत पड़ेगी.
पांच जजों की संविधान पीठ में शामिल जजों को जानिए राम मंदिर का मुद्दा का देश की अदालतों में पिछले 70 सालों में अटका हुआ है. 5 जजों की संवैधानिक पीठ आज से सुनवाई करेगी. पांच जजों की इस बेंच में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस एन वी रमना, जस्टिस यू यू ललित और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ शामिल हैं. जजों की वरिष्ठता और उम्र के हिसाब से पीठ में शामिल चारों जज भी भविष्य में चीफ जस्टिस बनने की कतार में है.
बेंच के पहले जज और अध्यक्ष जस्टिस रंजन गोगोई पांच जजों की इस बेंच की अध्यक्षता चीफ जस्टिस रंजन गोगोई करेंगे. जस्टिस गोगोई का जन्म 18 नवंबर 1954 को असम के डिब्रूगढ़ में हुआ था. 12 फरवरी 2011 को वह पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने. 23 अप्रैल 2012 को वह सुप्रीम कोर्ट के जज बने थे, 3 अक्टूबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बने. गोगाई देश के 46वें चीफ जस्टिस हैं, जस्टिस रंजन गोगोई ने डिब्रूगढ़ के डॉन बोस्को स्कूल से पढ़ाई की. फिर दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से इतिहास की पढ़ाई की.
सबसे पहले रंजन गोगोई उस वक्त चर्चा में आए थे. जब पूर्व सीजेआई दीपक मिश्रा के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस करके चार जजों ने सनसनी फैला दी थी, गोगाई उनमें से एक हैं. ये देश के इतिहास का पहला मौका था जब देश की सर्वोच्च अदालत के जजों ने जनता की अदालत में अपनी बात रखी थी. जस्टिस गोगाई ने हाल ही में सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा को बहाल करते हुए सरकार का फैसला पलटा. राफेल मामले में सरकार के फैसले को सही बताया और दखल देने से इंकार कर दिया.
चुनाव के दौरान उम्मीदवारों को संपत्ति, शिक्षा व चल रहे मुकदमों का ब्योरा देने के लिए आदेश देने वाली पीठ में जस्टिस रंजन गोगोई भी शामिल थे. कोलकाता हाईकोर्ट के जस्टिस कर्णन को छह महीने की कैद की सजा, असम में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) बनाने के आदेश देने वाली पीठ में भी रहे.
बेंच के दूसरे जज हैं जस्टिस शरद अरविंद बोवडे 24 अप्रैल 1956 को महाराष्ट्र के नागपुर में पैदा हुए, 16 अक्टूबर 2012 में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने. 12 अप्रैल 2013 को वह सुप्रीम कोर्ट के जज बने. जस्टिस बोवड़े ने भी हाल ही में बेहद अहम फैसला सुनाए हैं. इन में से प्रमुख फैसले- बिना आधार कार्ड के सरकारी सब्सिडी और सुविधा का लाभ नहीं मिलेगा. निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार बताया.
बेंच के तीसरे जज हैं जस्टिस एनवी रमना 27 अगस्त 1957 को आन्ध्रप्रदेश के कृष्णा जिले में पैदा हुए, 2 सितंबर 2013 को दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने. 17 फरवरी 2014 को वह सुप्रीम कोर्ट के जज बनें. जस्टिस एन वी रमना ने भी 2016 में अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन हटाकर कांग्रेस की सरकार बहाल की थी.
बेंच के चौथे जज हैं जस्टिस यूयू ललित 9 नवंबर 1957 को पैदा हुए, अप्रैल 2004 में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील बने. कई मामलों में कोर्ट मित्र रहें, 2जी मामले में सीबीआई के वकील रहे और 13 अगस्त 2014 को वह सुप्रीम कोर्ट के जज बने. जस्टिस यू यू ललित एक झटके में तीन तलाक खत्म करने वाली बेंच का हिस्सा थे.
बेंच के पांचवे जज हैं जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ 1998 से 2000 तक भारत के एडिशनल सोलिसीटर जनरल रहे. 31 अक्टूबर 2013 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने. 13 मई 2016 को वह सुप्रीम कोर्ट के जज बने. जस्टिस चंद्रचूड़ ने निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित किया. शादी से बाहर संबंध को अपराध मानने वाली याचिका को निरस्त किया था.
आज क्या हो सकता है? मुस्लिम पक्ष के वकील एजाज़ मकबूल ने एबीपी न्यूज़ को बताया कि मामले से जुड़े दस्तावेजों के अनुवाद का काम पूरा हो चुका है. सभी दस्तावेजों और हाईकोर्ट रिकॉर्ड की 5 जजों के हिसाब से कॉपी तैयार कर ली गई है. ऐसे में अगर बेंच चाहे तो तुरंत सुनवाई शुरू कर सकती है. आज कोर्ट सबसे पहले मामले से जुड़े सवालों को तय करेगा. उन्हीं सवालों पर दलीलें रखी जाएंगी और फैसला आएगा.
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