कारगिल आर्यन का एक कबीला जो मनाता है 'दुनिया छोड़ने' से पहले जश्न
दुनियाभर के लोग अपना जन्मदिन तो मनाते हैं लेकिन लद्दाख में ऐसा भी कबीला भी है जो जिंदगी पूरा होने का जश्न मनाता है. यह कबीला मौत के आने का जश्न मनाता है. इस कबीला के सदस्य लद्दाख के रहने वाले आर्यन हैं.

नई दिल्ली: दुनियाभर के लोग अपना जन्मदिन तो मनाते हैं लेकिन लद्दाख में ऐसा भी कबीला भी है जो जिंदगी पूरा होने का जश्न मनाता है. यह कबीला मौत के आने का जश्न मनाता है. इस कबीला के सदस्य लद्दाख के रहने वाले आर्यन हैं. कारगिल से करीब 70 किलोमीटर दूर बटालिक सेक्टर के दारचिक गांव में मंगलवार को "याटा उत्सव" मनाया गया. इस उत्सव में दो दिन तक पूरे गांव में जश्न और दावत का माहौल रहा. पचास साल के बाद इस फेस्टिवल का आयोजन किया गया था.
याटा महोत्सव उन लोगो की तरफ से मनाया जाता है जो अपना जीवन गुज़ार चुके होते हैं. जिनकी उम्र 60 साल के पार पहुंच गयी हो और उन्होंने अपने जीवन कार्य पूरे लिए हो. अब उनके वापस लौटने का समय आ गया हो. इसी कारण वह दुनिया छोड़ने से पहले सबको दावत देते हैं.
नए ज़माने में इन लोगो का यह फेस्टिवल खो गया था. करीब पचास साल के बाद गांव के लोगो ने एक बार फिर फेस्टिवल मनाया. इस दौरान उन्होंने पारंपरिक कपड़े पहने. इस दौरान पूरे गांव के लोग पहुंचे और दावत देने वाले बुज़र्गो को "जीवन पूर्ती" के लिए बधाई दी.
कुछ लोगों के मुताबिक कबीले के लोगों 'अलेक्जेंडर द ग्रेट' के वंशज हैं और कहते हैं कि यह लोग उसकी सेना के पीछे छूटे सेनिको के परिवार है जो यहीं आकर बस गए. वहीं कुछ इतिहासकारों का मानना है कि यह लोग दक्षिण एशिया से आये हैं. लेकिन यहां के लोगो का मानना है कि वह आर्यन हैं और आज भी अपनी उसी परंपरा को निभा रहे है. Source: IOCL



























