जैन मुनि पर विवादित टिप्पणी का मामला, सुप्रीम कोर्ट से तहसीन पूनावाला और विशाल डडलानी को बड़ी राहत
साल 2019 में हाई कोर्ट ने दोनों पर 10-10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था. उन्होंने माना था कि दोनों के बयानों से आईपीसी की धाराओं 153A और 295A का मामला नहीं बनता.

जैन मुनि तरुण सागर पर टिप्पणी के मामले में राजनीतिक कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला और संगीतकार विशाल डडलानी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पर पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट की तरफ से लगाया गया 10-10 लाख रुपए का जुर्माना खत्म कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि अदालतों का काम 'नैतिक पुलिसिंग' नहीं है.
2016 में जैन मुनि को हरियाणा विधानसभा में आमंत्रित किया गया था. वहां उनका प्रवचन हुआ था. तहसीन पूनावाला और विशाल डडलानी ने सोशल मीडिया पर इसकी कड़ी आलोचना की थी. दोनों की तरफ से की गई टिप्पणियों को जैन समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने और सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने की कोशिश बताते हुए अंबाला में एक एफआईआर दर्ज हुई थी.
पूनावाला और डडलानी ने एफआईआर रद्द करवाने और गिरफ्तारी पर रोक के लिए हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की. 2019 में दिए फैसले में हाई कोर्ट ने माना कि दोनों के बयानों से आईपीसी की धाराओं 153A (समाज में वैमनस्य फैलाना) और 295A (धार्मिक भावनाओं को आहत करना) का मामला नहीं बनता. हाई कोर्ट ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 19A) का भी हवाला अपने फैसले में दिया. इन सभी बातों को आधार बनाते हुए हाई कोर्ट ने एफआईआर रद्द कर दी.
एफआईआर रद्द करने के बावजूद हाई कोर्ट ने दोनों पर एक प्रसिद्ध संत का मजाक बनाने वाली अशोभनीय टिप्पणियों के लिए 10-10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया. हाई कोर्ट ने कहा कि जैन मुनि तरुण सागर का समाज के लिए जितना योगदान है, उतना पूनावाला और डडलानी का नहीं है. हाई कोर्ट ने कहा कि वह यह जुर्माना इसलिए लगा रहा है ताकि भविष्य में दोनों याचिकाकर्ता किसी संत का मखौल उड़ाने वाली बातें कहने से बचें.
सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में ही हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी. अब जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने हाई कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है. जजों ने कहा है कि जब हाई कोर्ट ने दोनों के खिलाफ किसी अपराध का मामला बनता नहीं पाया, तो उसे आगे की कार्यवाही करने की कोई जरूरत नहीं थी. हाई कोर्ट ने बिना संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए आदेश जारी कर दिया, यह भी गलत था.
ध्यान रहे कि अपने बयान पर समाज की प्रतिक्रिया देखने के बाद विशाल डडलानी ने सार्वजनिक माफी मांगी थी. उन्होंने व्यक्तिगत रूप से भी जैन मुनि तरुण सागर से मिल कर अपने बयान के लिए पछतावा जताया था. मुनि ने अपनी तरफ से दोनों को माफ कर दिया था, लेकिन तब तक अंबाला में एक व्यक्ति एफआईआर दर्ज करवा चुका था. अब उस मामले का अंतिम निपटारा हो गया है.
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