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'मैं तमिलनाडु का बेटा, 100 बार माफी मांगने को तैयार', हिंदी को लेकर जारी विवाद के बीच बोले धर्मेंद्र प्रधान

हिंदी को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने राज्यसभा में कहा कि वह तमिलनाडु के बेटे हैं और अपने बयान के लिए माफी मांगने को तैयार हैं.

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को राज्यसभा में शिक्षा मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि मैं तमिलनाडु का बेटा हूं. अगर मेरे बयान से कोई आहत हुआ है तो मैं 100 बार माफी मांगने को तैयार हूं. 

उन्होंने कहा, हमारे उड़िया समाज में भगवान जगन्नाथ सबसे ऊपर हैं. पुरी के राजा हमारे लिए जीवित देवता की तरह हैं. उन्होंने कांची की रानी से विवाह किया है. यानी मेरी मां तमिलनाडु से हैं. मैं तमिलनाडु का बेटा हूं. कनिमोझी मेरी बहन की तरह हैं. हमारे समाज में मां और बहन का दर्जा सबसे ऊपर हैं. 

उन्होंने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) पर तमिलनाडु सरकार के रुख को लेकर उस पर हमला किया और उस पर 'भय का माहौल' पैदा करने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि वह राज्य में तमिल को बढ़ावा देने के लिए कुछ नहीं कर रही है. 

उन्होंने जोर देकर कहा कि केंद्र सरकार किसी भी राज्य पर कोई भाषा नहीं थोपी रही है और आंकड़ों के हवाले से दावा किया कि तमिलनाडु के सरकारी स्कूलों में तमिल भाषा का ह्रास हो रहा है और औपनिवेशिक भाषा बढ़ रही है.

प्रधान ने कहा, 'राज्य में 67 प्रतिशत छात्र अब अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में हैं, जबकि तमिल माध्यम में नामांकन 54 प्रतिशत (2018-19) से घटकर 36 प्रतिशत (2023-24) हो गया है. सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में तमिल नामांकन में 7.3 लाख की गिरावट आई है, जो इस बदलाव को दर्शाता है.'

उन्होंने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सरकार से वैश्विक जरूरतों के मुताबिक बहुभाषावाद का समर्थन करने का आह्वान किया और एनईपी के कार्यान्वयन पर निर्णय लेने से पहले राज्य के छात्रों के हितों के बारे में सोचने की अपील की.

राज्यसभा में शिक्षा मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा का जवाब देते हुए प्रधान ने कहा कि देश तमिलनाडु को विकास का इंजन बनाकर प्रगति करना चाहता है. उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर से वंचित नहीं किया जाना चाहिए और वह द्रमुक सरकार के किसी भी व्यक्तिगत हमले का सामना करने के लिए तैयार हैं.

मंत्री ने कहा कि राज्य में छात्र तेजी से अंग्रेजी का चयन कर रहे हैं और तमिलनाडु सरकार तीन-भाषा फार्मूले की आवश्यकता पर सवाल उठा रही है. प्रधान ने कहा कि तमिल भाषा के प्रति उनकी सरकार को अपनी प्रतिबद्धता के बारे में किसी से प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है.

उन्होंने कहा, 'कोई किसी पर कुछ नहीं थोप रहा है. यह एक लोकतांत्रिक समाज है और समय की मांग है कि आपको बहुभाषी होना होगा.' उन्होंने कहा कि उन्हें तमिल पर गर्व है, जो एक प्राचीन भाषा है. उन्होंने राज्य सरकार से पूछा भी कि एनईपी पर उसे क्या आपत्ति है.

उन्होंने कहा, 'मुझे तमिल भाषा पर गर्व है. एनईपी को लेकर आपका क्या विरोध है? यह वकालत कर रहा है कि कक्षा 5 तक शिक्षा का माध्यम तमिल भाषा में होना चाहिए. हम सेंगोल को बढ़ावा दे रहे हैं और यही तमिल भाषा की हमारी समझ है.'

उन्होंने कहा कि तमिल भाषा का पतन हो रहा है और तमिलनाडु के सरकारी स्कूलों में औपनिवेशिक भाषा बढ़ रही है. प्रधान ने राज्य सरकार से युवाओं को एनईपी से वंचित नहीं करने का आग्रह करते हुए कहा, 'भय का माहौल पैदा मत करो. कोई भी आप पर कुछ भी नहीं थोप रहा है.'

उन्होंने कहा, 'तमिलनाडु में शिक्षा का माध्यम तमिल होना चाहिए. यह एनईपी में है. मैं अंग्रेजी के विरुद्ध नहीं हूं. छात्र को अंतरराष्ट्रीय बाजार में जाना होता है. उन्हें अंग्रेजी सीखनी और समझनी चाहिए क्योंकि हमें विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करनी है.'

उन्होंने कहा, ''लेकिन आलोचनात्मक समझ के लिए मातृभाषा प्राथमिक है और यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति की प्राथमिक पूर्व शर्त है. पांचवीं कक्षा तक मातृभाषा केंद्रित शिक्षा जरूरी है और एनईपी में यही कहा गया है.'

उन्होंने कहा कि एनईपी के अनुसार, यह छात्रों पर निर्भर करता है कि वे आठवीं कक्षा के बाद अपनी पसंद के अनुसार तमिल भाषा का चयन करें.

उन्होंने कहा, 'मैं यह नहीं समझ पा रहा हूं कि तमिलनाडु में जो लोग दो भाषा फॉर्मूले की वकालत कर रहे हैं, उनके अपने सरकारी स्कूलों में तमिल भाषा का पतन हो रहा है और औपनिवेशिक भाषा बढ़ रही है. यह एक खतरनाक बात है ... भय का माहौल पैदा न करें. कोई भी आप पर कुछ भी थोप नहीं रहा है.'

प्रधान ने कहा कि उनका इरादा किसी को चोट पहुंचाने का नहीं है. उन्होंने कहा, 'मैं तमिलनाडु के अपने सहयोगियों से अपील करता हूं कि उन्हें मुझे व्यक्तिगत रूप से गाली देने दें, आज तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने कहा है कि पीएम श्री का अर्थ संस्कृत है... हमें भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है और हम तमिलनाडु के तहत देश को आगे ले जाएंगे.'

द्रमुक सरकार पर हमला करते हुए उन्होंने कहा, 'आप तमिलनाडु के लोगों को मूर्ख नहीं बना सकते. मैं तमिलनाडु के युवाओं के लिए अवसर पैदा करना चाहता हूं. इतने छोटे मत बनो. कृपया पुराने विचारों से बाहर आएं. हम सभी को एक नया देश बनाना है.'

बाद में 'एक्स' पर एक पोस्ट में, प्रधान ने कहा कि 'भाषा थोपने पर द्रमुक का नवीनतम हो हल्ला और एनईपी के तीन-भाषा फार्मूले पर इसका रुख उनके पाखंड को उजागर करता है.'

उन्होंने कहा, 'एनईपी 2020 के विरोध का तमिल गौरव, भाषा और संस्कृति के संरक्षण से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए सब कुछ है.'

उन्होंने कहा, ''द्रमुक तमिल भाषा को बढ़ावा देने की वकालत करती है. लेकिन सच्चाई यह है कि उन्होंने तमिल भाषा, साहित्य और साहित्यिक प्रतीकों को बढ़ावा देने और संरक्षित करने के लिए बहुत कम किया है.'

ज्ञात हो कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति और नीति में प्रस्तावित त्रिभाषा फार्मूले को लागू करने को लेकर तमिलनाडु सरकार और केंद्र के बीच टकराव चल रहा है.

प्रधान ने सोमवार को लोकसभा में यह कहकर हंगामा खड़ा कर दिया था कि राज्य सरकार 'बेईमान' है और उस पर पीएम स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया (पीएम श्री) योजना को लागू करने के मुद्दे पर यू-टर्न लेने का आरोप लगाया.

द्रमुक सदस्यों ने प्रधान पर तमिलनाडु का अपमान करने का आरोप लगाया और इस पर उन्होंने अपनी टिप्पणी वापस ले ली.

संबंधित राज्य को केंद्र सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करना होता है कि वह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को लागू करेगा और बदले में केंद्र सरकार धन प्रदान करेगी.

प्रधान ने मंगलवार को कहा कि वह एनईपी लागू करने पर तमिलनाडु के 'यू-टर्न' के बारे में अपने बयान पर कायम हैं.

द्रमुक पर हमला करते हुए प्रधान ने आरोप लगाया कि पार्टी किसी को उपदेश नहीं दे सकती. उन्होंने याद दिलाया कि किस तरह दिवंगत अन्नाद्रमुक नेता जे जयललिता का तमिलनाडु में सदन में अपमान किया गया था.

उन्होंने कहा, 'हमें किसी से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है कि हम तमिल भाषा को लेकर प्रतिबद्ध हैं या नहीं... सच्चाई हमेशा सच्चाई रहती है लेकिन कुछ को चुभती है. सच्चाई हमेशा कड़वी होती है.'

प्रधान ने कहा कि केंद्र सरकार ने अगले पांच साल में 50,000 अटल टिंकरिंग प्रयोगशालाएं स्थापित करने का फैसला किया है.

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में ऐसी प्रयोगशालाएं जनसंख्या के आधार पर यथानुपात आधार पर स्थापित की जाएंगी.

उन्होंने कहा, ''एनईपी की प्रमुख सिफारिशों में से एक यह है कि भारत की विरासत और संस्कृति को कैसे देखा जाए. लेकिन हम किसी पर कुछ थोपना नहीं चाहते. हमारे पास लोगों का जनादेश है कि हमें अपने देश की विरासत को कैसे देखना चाहिए.'

उन्होंने कहा कि प्रमाण पत्र और डिग्री का अपना महत्व है, लेकिन क्षमता और कौशल भी महत्वपूर्ण हैं. प्रधान ने कहा कि भारत बहुभाषी देश है.

उन्होंने कहा कि शिक्षा और कौशल विकास को साथ मिलकर काम करना होगा और देश में बच्चों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए एक रोडमैप तैयार करना होगा.

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