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हिमाचल ही नहीं, गुटबाजी कहीं इन राज्यों में भी न डुबो दे बीजेपी की लुटिया?

चुनाव से पहले बीजेपी ने कर्नाटक, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में गुटबाजी खत्म नहीं की, तो हिमाचल की तरह पार्टी को नुकसान हो सकता है. इन राज्यों में कांग्रेस काफी मजबूत है.

गुजरात चुनाव में बंपर जीत के बावजूद हिमाचल की हार ने बीजेपी की जीत के जश्न को फीका कर दिया है. पहाड़ी राज्य में सत्ता गंवाने के बाद भगवा पार्टी हार की समीक्षा में जुटी है. शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक संगठन में गुटबाजी की वजह से बीजेपी सत्ता से दूर रह गई. हमीरपुर समेत कई जिलों में पार्टी का खाता तक नहीं खुला.

रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव परिणाम आने के बाद अमित शाह ने राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और संगठन महासचिव बीएल संतोष के साथ हार को लेकर चर्चा भी की. केंद्र में मजबूत सरकार होने के बावजूद राज्यों में आंतरिक गुटबाजी ने पार्टी हाईकमान की टेंशन बढ़ा दी है. 

बीजेपी समय रहते अगर गुटबाजी पर रोक नहीं लगा पाई तो अगले साल कई राज्यों में पार्टी को शिकस्त का सामना करना पड़ सकता है. आइए जानते हैं, किन-किन राज्यों में पार्टी के भीतर गुटबाजी हावी है?

1. राजस्थान- वसुंधरा वर्सेज गजेंद्र शेखावत-सतीश पूनिया
2018 में सत्ता गंवाने के बाद से ही बीजेपी राजस्थान में गुटबाजी जारी है. पूर्व सीएम वसुंधरा राजे और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत के बीच अब भी अदावतें की खबरें आती रहती है. प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के खिलाफ भी वसुंधरा गुट लगातार मोर्चा खोले रहता है.

जुलाई 2021 में शेखावत-पूनिया के खिलाफ बयान देने की वजह से बीजेपी ने वसुंधरा के करीबी और पूर्व मंत्री रोहिताश्व शर्मा को पार्टी से निकाल दिया था. हालांकि, गतिरोध तब भी नहीं रूका. इसी साल राज्यसभा चुनाव मे वसुंधरा के करीबी विधायक शोभारानी ने पार्टी के खिलाफ जाकर क्रॉस वोटिंग कर दिया. 

हिमाचल ही नहीं, गुटबाजी कहीं इन राज्यों में भी न डुबो दे बीजेपी की लुटिया?

वसुंधरा राजस्थान की दो बार सीएम रह चुकी हैं. जनता के बीच उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है. वसुंधरा के बेटे दुष्यंत अभी झालवाड़ से सांसद भी हैं. राजस्थान में चुनाव के अब एक साल से भी कम का वक्त बचा है. ऐसे में अगर वहां गुटबाजी जारी रही तो पार्टी को चुनाव में नुकसान उठाना पड़ सकता है.

2. कर्नाटक- बोम्मई वर्सेज येद्दियुरप्पा, चुनाव में दो महीने शेष
राजस्थान की तरह कर्नाटक में भी पार्टी के भीतर गुटबाजी चरम पर है. यहां पूर्व सीएम येद्दियुरप्पा और वर्तमान सीएम बीएस बोम्मई गुट आमने-सामने है. ऑपरेशन लोटस के तहत 2019 में सरकार बनाने के बाद बीजेपी ने येद्दियुरप्पा को सीएम बनाया था. 

जुलाई 2021 में पार्टी ने येद्दियुरप्पा को हटाकर बीएस बोम्मई को राज्य का सीएम बनवाया. इसके बाद से ही येद्दियुरप्पा गुट हाईकमान और सीएम के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है. पिछले महीने डैमेज कंट्रोल करने के लिए पार्टी ने येद्दियुरप्पा को केंद्रीय पार्लियामेंट बोर्ड का सदस्य भी नियुक्त किया था. 

हिमाचल ही नहीं, गुटबाजी कहीं इन राज्यों में भी न डुबो दे बीजेपी की लुटिया?

कर्नाटक में फरवरी 2023 में चुनाव होने हैं. ऐसे में अगर येद्दियुरप्पा को नहीं साधा गया तो पार्टी की हाथ से कर्नाटक की सत्ता निकल जाएगी. येद्दियुरप्पा जिस लिंगायत समुदाय से आते हैं, कर्नाटक में उनकी आबादी करीब 18 फीसदी है. 

3. मध्य प्रदेश- शिवराज वर्सेज नरोत्तम; सिंधिया गुट भी हावी
2018 के चुनाव में हारने के बावजूद ऑपरेशन लोटस के तहत बीजेपी मध्य प्रदेश में सरकार बनाने में कामयाब रही. पार्टी ने फिर से शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री बनाया. साथ ही हाईकमान ने नरोत्तम मिश्रा का कद भी बढ़ा दिया. नरोत्तम के कद बढ़ने के बाद से ही शिवराज खेमे को कुर्सी जाने का डर सताने लगा.

इसके बाद से ही एमपी में दोनों गुट एक-दूसरे के खिलाफ अंदरुनी तौर पर हमलावर है. मई में सीएम हाउस में एक कार्यक्रम के दौरान नरोत्तम को जब बोलने का मौका नहीं मिला, तो उन्होंने मंच छोड़ दिया. नरोत्तम-शिवराज गुट के अलावा कांग्रेस से आए सिंधिया गुट भी पार्टी के भीतर हावी है.


हिमाचल ही नहीं, गुटबाजी कहीं इन राज्यों में भी न डुबो दे बीजेपी की लुटिया?

टिकट से लेकर पोर्टफोलियों बंटवारे तक में सिंधिया गुट की सक्रियता कई बार पार्टी के लिए परेशानी खड़ी कर रही है. एमपी में भी चुनाव के एक साल से कम वक्त बचा है. ऐसे में अगर वहां गुटबाजी जारी रही तो पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है.

4. पश्चिम बंगाल- ममता की बजाय सुकांत-घोष खुद लड़ रहे
पश्चिम बंगाल में पांव जमाने में जुटी बीजेपी को वहां भी गुटबाजी का सामना करना पड़ रहा है. पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष और वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजमूदार गुट आमने-सामने हैं. दोनों गुटों की लड़ाई को देखते हुए बीजेपी हाईकमान ने मार्च 2022 में लेटर जारी किया था, जिसमें दिलीप घोष को सार्वजनिक तौर पर बयान नहीं देने के लिए कहा गया था.

2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने बंगाल में 18 सीटों पर जीत मिली थी. 2021 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने ममता को कड़ी टक्कर देते हुए 73 सीटो पर जीत दर्ज की थी, लेकिन 15 महीने में ही 7 विधायक अब तक पार्टी छोड़ चुके हैं.

बंगाल में भी अगर बीजेपी हाईकमान ने गुटबाजी पर रोक नहीं लगाई तो मिशन 2024 को बड़ा झटका पार्टी को लग सकता है. 

5. छत्तीसगढ़- यहां सब एक-दूसरे से लड़ रहे
2018 में छत्तीसगढ़ में भी बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा था. पार्टी ने संगठन को फिर से मजबूत करने के लिए कई प्रयोग किए, लेकिन गुटबाजी की वजह से सब फेल हो गया. यहां पूर्व सीएम रमन सिंह, पूर्व नेता प्रतिपक्ष धर्मलाल कौशिक, पूर्व अध्यक्ष विष्णुदेव साय गुट सक्रिय है. 

गुटबाजी को देखते हुए बीजेपी ने इस साल की शुरुआत में छत्तीसगढ़ में बड़ी सर्जरी की थी. प्रदेश प्रभारी से लेकर अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष तक को हटाया गया था, लेकिन पार्टी के परफॉर्मेंस पर इसका असर नहीं दिखा है. छत्तीसगढ़ में भी अगले साल चुनाव होने हैं. ऐसे में अगर पार्टी के भीतर गुटबाजी जारी रहती है तो भूपेश बघेल को टक्कर देना मुश्किल होगा.

4 राज्यों में अगले साल चुनाव, 2 में गढ़ बचाने की चुनौती
2023 में कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में विधानसभा का चुनाव होना है. इनमें कर्नाटक और मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार है, जबकि छत्तीसगढ़ और राजस्थान में पार्टी विपक्ष की भूमिका में हैं. मिशन 2024 में जुटी बीजेपी के लिए जहां 2 राज्यों में सरकार बचाने की चुनौती है, वही 2 राज्यों में जीत दर्ज करने की भी.


हिमाचल ही नहीं, गुटबाजी कहीं इन राज्यों में भी न डुबो दे बीजेपी की लुटिया?

मिशन 2024 पर क्या असर होगा?
जिन 5 राज्यों में बीजेपी के भीतर गुटबाजी सबसे ज्यादा हावी है, उन राज्यों में लोकसभा की कुल सीटें 135 है. 2019 के चुनाव में बीजेपी ने 135 में से 97 सीटों पर जीत दर्ज की थी. राजस्थान, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में पार्टी की एकतरफा जीत हुई थी. 

मिशन 2024 में जुटी बीजेपी को अगर इन राज्यों में गुटबाजी की वजह से हार का सामना करना पड़ा तो बड़ा नुकसान संभव है.

MAP में देखिए अभी कितने राज्यों में भाजपा की सरकार है...


हिमाचल ही नहीं, गुटबाजी कहीं इन राज्यों में भी न डुबो दे बीजेपी की लुटिया?

दिल्ली की डर से नेता खामोश, लेकिन जमीन पर निष्क्रिय
5 राज्यों के अलावा भी कई राज्यों में बीजेपी के भीतर गुटबाजी चरम पर है, लेकिन दिल्ली यानी हाईकमान के डर से नेता खामोश है. कई राज्यों में साइड लाइन पड़े नेता भले कोई बयान नही दे रहे, लेकिन वे जमीन पर पूरी तरह निष्क्रिय हैं. पार्टी को इसका भी नुकसान उठाना पड़ सकता है. 

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