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गिग वर्कर्स को मिला न्यू ईयर का गिफ्ट! सरकार के नए लेबर कानून के तहत मिलेगी ये सुविधाएं, कब से लागू होंगे नियम?

इन नियमों का मकसद उन लाखों लोगों को सोशल सिक्योरिटी के दायरे में लाना है जो ऐप के जरिए काम करते हैं और अब तक किसी तय सुरक्षा सिस्टम का हिस्सा नहीं थे.

10 मिनट में मिलने वाली डिलीवरी सुविधा के पीछे एक ऐसी सच्चाई छिपी है, जो देश की रोजगार व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है. सरकार अब मान रही है कि ऐप के जरिए काम करने वाला भी श्रमिक है और उसे पूरी तरह सिस्टम से बाहर नहीं रखा जा सकता. सरकार ने मजदूरों और कर्मचारियों से जुड़े नए नियमों का मसौदा जारी किया है जिसमें पहली बार गिग वर्कर्स को भी शामिल किया गया है.

सरकार के नए मसौदे में गिग वर्कर्स के लिए क्या है?

श्रम मंत्रालय ने चार लेबर कोड्स के तहत नए नियमों का मसौदा जारी किया है जिसे 1 अप्रैल 2026 से लागू करने का प्रस्ताव है. इन नियमों का मकसद उन लाखों लोगों को सोशल सिक्योरिटी के दायरे में लाना है जो ऐप के जरिए काम करते हैं और अब तक किसी तय सुरक्षा सिस्टम का हिस्सा नहीं थे.

नए ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक गिग या प्लेटफॉर्म वर्कर को सोशल सिक्योरिटी के लिए योग्य होने के लिए एक वित्तीय वर्ष में तय समय तक काम करना होगा. अगर कोई वर्कर एक ही एग्रीगेटर या ऐप पर काम करता है तो उसे कम से कम 90 दिन काम करना होगा. वहीं अगर वह एक से ज्यादा ऐप्स पर काम करता है, तो यह सीमा 120 दिन रखी गई है. खास बात यह है कि किसी दिन अगर वर्कर ने सिर्फ 1 रुपया भी कमाया है, तो वह दिन भी वर्किंग डे  माना जाएगा.

सरकार का कहना है कि जो गिग वर्कर्स इन शर्तों को पूरा करेंगे उन्हें एक डिजिटल पहचान पत्र दिया जाएगा. इसी पहचान के आधार पर उन्हें सरकार द्वारा नोटिफाई की जाने वाली सोशल सिक्योरिटी योजनाओं का लाभ मिलेगा. इनमें दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाएं और भविष्य में पेंशन जैसी सुविधाएं शामिल हो सकती हैं.

कौन होते हैं गिग वर्कर्स?

आप अपने मोबाइल फोन पर ऑर्डर करते हैं और स्क्रीन पर लिखा आता है, 'कुछ ही मिनटों में डिलीवरी'. यह सुविधा आज आम हो चुकी है लेकिन जिन लोगों की वजह से यह सुविधा मुमकिन हो पा रही है, उनकी जिंदगी किस हाल में है अब इस पर अब देश में गंभीर बहस शुरू हो गई है.

गिग वर्कर्स यानी ऐप के जरिए काम करने वाले डिलीवरी बॉय, कैब ड्राइवर और फ्रीलांसर. आज ये भारत की सबसे बड़ी लेकिन सबसे असुरक्षित कामगार आबादी बनते जा रहे हैं. गिग वर्क का मतलब है, ऐसा काम जिसमें न कोई तय मालिक होता है न पक्की नौकरी और न ही तय सैलरी. काम मिला तो कमाई नहीं मिला तो दिन खाली. यही वजह है कि गिग वर्क को लेकर यह सवाल अब जोर पकड़ रहा है कि क्या इसे सच में रोजगार कहा जा सकता है या यह सिर्फ मजबूरी में किया गया काम है.

'बहुत से भारतीय इस सेकेंडरी इनकम पर घर चला रहे'

आंकड़े बताते हैं कि ज़्यादातर गिग वर्कर्स पूरे साल बहुत कम दिन ही काम कर पाते हैं. खुद प्लेटफॉर्म्स इसे सेकेंडरी इनकम यानी अतिरिक्त कमाई का जरिया बताते हैं, न कि फुल-टाइम नौकरी की संज्ञा देते हैं. लेकिन भारत में बड़ी संख्या में लोग इसी सेकेंडरी इनकम पर अपना घर चला रहे हैं. यही विरोधाभास इस पूरी व्यवस्था की सबसे बड़ी समस्या है.

कमाई के आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर और साफ हो जाती है. औसतन साल भर में गिग वर्क से होने वाली आमदनी कई मामलों में सिर्फ ₹30 से ₹40 हजार के आसपास बैठती है. यह रकम शहरी जीवन के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा सकती. यही वजह है कि गिग वर्क को अब स्थायी रोजगार नहीं अस्थायी गुजारे का साधन माना जाने लगा है.

गिग वर्कर्स की क्या शिकायते हैं?

गिग वर्कर्स की एक बड़ी शिकायत यह भी है कि वे घंटों ऐप पर ऑनलाइन रहते हैं लेकिन उस इंतजार का कोई पैसा नहीं मिलता. भुगतान सिर्फ तब होता है, जब ऑर्डर मिलता है और डिलीवरी पूरी होती है यानी जोखिम पूरा वर्कर का होता है जबकि सिस्टम सुरक्षित रहता है. इसके साथ ही तेज डिलीवरी का दबाव सड़क सुरक्षा और वर्कर्स की सेहत पर भी असर डालता है.

एक और बड़ी सच्चाई यह है कि गिग इकॉनमी में काम करने वालों की संख्या बहुत ज़्यादा है. सप्लाई इतनी अधिक है कि अगर कोई कम रेट पर काम करने से मना करे तो दूसरा तुरंत तैयार मिल जाता है. इसी वजह से वर्कर्स के पास मोल-भाव की ताकत नहीं बचती और प्लेटफॉर्म्स पर बेहतर भुगतान का दबाव नहीं बन पाता. 

इन हालातों को देखते हुए अब केंद्र सरकार भी सक्रिय होती दिख रही है. सरकार ने मजदूरों और कर्मचारियों से जुड़े नए नियमों का मसौदा जारी किया है. जिसमें पहली बार गिग वर्कर्स को भी शामिल किया गया है.

About the author वरुण भसीन

वरुण भसीन एबीपी न्यूज़ में प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट हैं. पिछले 9 साल से पत्रकारिता कर रहे हैं. वे एयरलाइंस, रेलवे और सड़क-परिवहन से जुड़ी खबरें कवर करते हैं. इससे पहले वे कई संस्थानों में काम कर चुके हैं. वरुण न्यूज जगत से जुड़ी डॉक्यूमेंट्री फिल्में भी बनाते आए हैं. वरुण ने MBM यूनिविर्सिटी जोधपुर से पढ़ाई की है. संपर्क करने के लिए मेल आईडी है- varunb@abpnetwork.com

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