Explained: 'गॉडजिला' एल नीनो आ रहा है... 2026 का मौसम कितना भयानक हो सकता है और भारत पर इसका क्या असर पड़ेगा?
El-Nino: भारतीय अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा मॉनसून पर निर्भर है, यह समय सावधानी और तैयारी का है. एल नीनो के प्रभावों का अंदाजा लगाना मुश्किल जरूर है, लेकिन आधुनिक तकनीक की मदद से निपटारा किया जाएगा.

मौसम वैज्ञानिकों ने 2026 के अल नीनो को एक खास नाम दिया है 'गॉडजिला'. यह कोई सनसनीखेज मूवी का टाइटल नहीं है, बल्कि प्रशांत महासागर में पनप रही एक ऐसी भयानक मौसमी प्रणाली का नाम है जो दुनिया भर के तापमान, बारिश और तूफानों को पूरी तरह पलट सकती है. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह गॉडजिला अल नीनो 1997-98 और 2015-16 के उन रिकॉर्ड-तोड़ अल नीनो से भी ज्यादा तीव्र हो सकता है, जिन्होंने वैश्विक स्तर पर भारी तबाही मचाई थी. फिर अब कई इलाकों में बारिश क्यों हो रही है? भारत के मॉनसून पर इसका क्या असर होगा? और क्या यह फिल्मी दैत्य की तरह विनाशकारी साबित होगा?
गॉडजिला अल नीनो आखिर है क्या और यह नाम क्यों मिला?
अल नीनो एक प्राकृतिक मौसम चक्र है जो हर दो से सात साल के बीच आता है, जब प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का सतही पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है. लेकिन हर अल नीनो एक जैसा नहीं होता. इंडोनेशिया की IPB यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के मुताबिक, जब समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 2.5 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक बढ़ जाता है, तो इसे 'सुपर अल नीनो' कहा जाता है. 2026 में यह तापमान बढ़ोतरी 2.5 डिग्री को पार कर सकती है. इसीलिए वैज्ञानिकों ने इस राक्षसी ताकत को 'गॉडजिला' नाम दिया है. अप्रैल 2026 तक के आंकड़े बताते हैं कि यह अल नीनो अब तक के सबसे शक्तिशाली अल नीनो में से एक होगा.
1997 और 2015 का इतिहास क्या कहता है?
यह समझने के लिए कि गॉडजिला अल नीनो क्या कर सकता है, पिछले सुपर अल नीनो को देखना जरूरी है. 1997-98 का अल नीनो अब तक का सबसे भीषण दर्ज किया गया था. इसकी वजह से दुनिया भर में 23,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई और 45 अरब डॉलर से अधिक का आर्थिक नुकसान हुआ. कैलिफोर्निया में भीषण बाढ़ आई, इंडोनेशिया और ब्राजील के जंगलों में विनाशकारी आग लगी. अफ्रीका औऱ भारत में सूखा पड़ा. इसी तरह 2015-16 के अल नीनो ने दुनिया को अब तक का सबसे गर्म साल दिया और भारत में लगातार दो बार सूखे की स्थिति पैदा की. यही इतिहास वैज्ञानिकों को 2026 को लेकर सबसे ज्यादा चिंतित कर रहा है.
भारत के मॉनसून पर कैसा होगा असर?
भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता मॉनसून है. ऐतिहासिक रूप से, तीव्र अल नीनो और भारत में कमजोर मॉनसून के बीच गहरा संबंध रहा है. बीबीसी की रिपोर्ट में मौसम विशेषज्ञों के हवाले से बताया गया है कि गॉडजिला अल नीनो भारत में जून से सितंबर तक चलने वाले दक्षिण-पश्चिम मॉनसून को कमजोर कर सकता है. इससे देश के कई हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति बन सकती है. खासकर उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के किसानों के लिए यह बुरी खबर हो सकती है. हालांकि, वैज्ञानिक यह भी कहते हैं कि हर अल नीनो का असर एक जैसा नहीं होता. कभी-कभी हिंद महासागर का गर्म पानी (पॉजिटिव IOD) इसके नकारात्मक प्रभाव को कम कर सकता है.
दुनिया पर इसका प्रभाव: सूखा, बाढ़ और चक्रवात
गॉडजिला अल नीनो का असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहेगा. यह पूरी दुनिया के मौसम को अस्त-व्यस्त कर सकता है. फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके कारण ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बड़े हिस्से में भीषण सूखा पड़ सकता है, जिससे जंगलों में आग का खतरा बढ़ जाएगा. वहीं, दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट, खासकर पेरू और इक्वाडोर में भारी बारिश और बाढ़ की आशंका है. प्रशांत महासागर के गर्म पानी से तूफानों को अतिरिक्त ऊर्जा मिलेगी, जिससे चक्रवातों की संख्या और तीव्रता बढ़ सकती है.
एक पहेली: गॉडजिला आया तो बारिश क्यों हो रही है?
IPB यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट्स ने इस विरोधाभास को समझाया है. अप्रैल 2026 में ही अल नीनो की शुरुआत हो चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद कुछ क्षेत्रों में बारिश जारी रही. इसकी वजह यह है कि अल नीनो का असर तुरंत और एक समान नहीं होता. स्थानीय मौसम प्रणालियां, समुद्री हवाएं और दूसरी वैश्विक जलवायु प्रणालियां इसके प्रभाव को जटिल बनाती हैं. इंडोनेशिया में ही कुछ इलाकों में बारिश इसलिए हुई क्योंकि प्रशांत महासागर का प्रभाव वहां के स्थानीय मौसम विज्ञान से टकरा रहा था. यह बताता है कि अल नीनो एक तयशुदा फॉर्मूले की तरह काम नहीं करता, बल्कि यह एक पेचीदा प्राकृतिक प्रक्रिया है.
क्या दुनिया इस झटके को झेलने के लिए तैयार है?
गॉडजिला अल नीनो का सबसे बड़ा खतरा यह है कि यह पहले से ही जलवायु परिवर्तन की वजह से गर्म हो रही दुनिया पर दोहरी मार करेगा. 2023-24 पहले ही रिकॉर्ड पर सबसे गर्म साल रहे हैं और अब गॉडजिला अल नीनो वैश्विक तापमान को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है. खाद्य सुरक्षा, पानी की कमी और ऊर्जा आपूर्ति जैसे मुद्दे और गंभीर हो सकते हैं. हालांकि, सरकारें और मौसम एजेंसियां अब पहले से बेहतर तैयारी कर रही हैं.
भारत ने भी मॉनसून की निगरानी बढ़ा दी है और कृषि क्षेत्र को सलाह जारी की है. दुनिया भर में सरकारें आपदा प्रबंधन की योजनाएं तैयार कर रही हैं, लेकिन गॉडजिला जैसे दैत्याकार अल नीनो के सामने ये तैयारियां कितनी कारगर होंगी, यह तो आने वाले महीने ही बताएंगे.
डरने की नहीं, समझने की जरूरत
गॉडजिला अल नीनो बेशक एक गंभीर जलवायु घटना है, लेकिन इसे लेकर सिर्फ डर फैलाने के बजाय वैज्ञानिक नजरिये से समझना ज्यादा जरूरी है. इसके प्रभावों की भविष्यवाणी करना मुश्किल जरूर है, लेकिन अतीत के अनुभव और आधुनिक तकनीक की मदद से इससे निपटने के उपाय मौजूद हैं. भारत जैसे देश के लिए, जहां अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा मॉनसून पर निर्भर है, यह समय सतर्कता और तैयारी का है. आने वाले महीने बताएंगे कि क्या गॉडजिला सचमुच रिकॉर्ड तोड़ तबाही लाता है या फिर एक बड़ा खतरा बनते-बनते टल जाता है.

























