Explained: अबतक देश के 20 राज्यों में कटे कितने वोटर्स के नाम, एक क्लिक में पढ़े डेटा
दिल्ली में लगभग 33% वोटरों के नाम कटने और ओडिशा व कर्नाटक जैसे राज्यों में भारी कटौती के बाद स्थानीय अधिकारियों और विपक्षी दलों द्वारा चिंता जताई गई है.

चुनाव आयोग (EC) ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से छूटे हुए पात्र नागरिकों के नाम दोबारा शामिल करने के लिए 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है. यह लिखित निर्देश 29 सितंबर को सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को भेजा गया, जिसे 1 अक्टूबर को हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान पुनर्व्यक्त किया गया.
देश भर के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR के तहत जारी ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं. इनमें दिल्ली में सबसे ज्यादा 33% वोटरों के नाम कटे हैं, जबकि ओडिशा, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में भी भारी कटौती दर्ज की गई है.
दोबारा कैसे जुड़ेगा नाम?
जिन राज्यों में SIR प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां "लेफ्ट आउट" और नए/पहली बार वोट देने योग्य नागरिकों के लिए नामांकन का मुख्य ज़रिया फॉर्म 6 होगा.
SIR के दौरान फॉर्म 6 के साथ जोड़ी गई अतिरिक्त घोषणा अब लागू नहीं होगी. आवेदन 'निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960' के तहत तय सामान्य फॉर्म 6 के ज़रिए ही स्वीकार किए जाएंगे.
चुनाव अधिकारियों को SIR से पहले और बाद की मतदाता सूचियों का मिलान करने का निर्देश दिया गया है, ताकि गलती से बाहर हुए पात्र वोटरों की पहचान की जा सके.
आवश्यकता पड़ने पर बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर फॉर्म 6 भरवाने और ज़रूरी दस्तावेज़ जमा कराने में नागरिकों की मदद करेंगे. इस काम में राजनीतिक दलों और बूथ-लेवल एजेंटों (BLAs) का भी सहयोग लिया जाएगा.
आंतरिक विवाद और केंद्रीकृत सॉफ्टवेयर पर सवाल
'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक, बड़े पैमाने पर नाम गायब करने और सॉफ्टवेयर प्रबंधन को लेकर चुनाव आयोग के भीतर ही गंभीर मतभेद उजागर हुए हैं. तीन-सदस्यीय चुनाव आयोग में दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम-से-कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराईं. उनका आरोप है कि नाम जोड़ने-हटाने के नीतिगत फैसलों में उन्हें अंधेरे में रखा गया.
दिल्ली स्थित केंद्रीय IT सिस्टम (ERONet/ECINet) के अत्यधिक केंद्रीकरण के कारण स्थानीय अधिकारियों (ERO/AERO) की स्वायत्तता प्रभावित हुई. उदाहरण के लिए, गोवा में 97 पात्र वोटरों को स्थानीय जांच में सही पाए जाने के बावजूद केंद्रीय IT सिस्टम में 'रोलबैक/रीस्टोर' सुविधा न होने से सूची में शामिल नहीं किया जा सका.
ओडिशा के भद्रक (धामनगर) में BLOs के क्रेडेंशियल्स का कथित दुरुपयोग कर थोक में फॉर्म 7 (नाम हटाने का आवेदन) दाखिल किए जाने का मामला सामने आया, जिसकी पुलिस जांच जारी है.
जहां चुनाव आयोग की मंशा फर्जी मतदाताओं को हटाकर देश की मतदाता सूची को पूरी तरह सटीक बनाने की है. वहीं इतने बड़े संख्या में नाम कटना दर्शाता है कि अत्यधिक तकनीकी निर्भरता, सख्त समयावधि और केंद्रीकृत प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में वास्तविक नागरिकों के मताधिकार पर संकट मंडरा रहा है.
किस राज्य से कितने वोटर्स के नाम कटे
| क्रम | राज्य / केंद्र शासित प्रदेश | ड्राफ्ट से पहले कुल वोटर | संशोधित / अंतिम वोटर | हटाए गए वोटर (संख्या) | गिरावट (प्रतिशत %) |
| 1 | उत्तर प्रदेश | 15.44 करोड़ | 13.39 करोड़ | 2.05 करोड़ | -13.21% |
| 2 | महाराष्ट्र | 9.81 करोड़ | 7.74 करोड़ | 2.07 करोड़ | -21.10% |
| 3 | पश्चिम बंगाल | 7.69 करोड़ | 6.86 करोड़ | 83.86 लाख | -10.90% |
| 4 | तमिलनाडु | 6.41 करोड़ | 5.67 करोड़ | 74.00 लाख | -11.50% |
| 5 | तेलंगाना | 3.30 करोड़ | 2.58 करोड़ | 71.60 लाख | -21.70% |
| 6 | गुजरात | 5.08 करोड़ | 4.40 करोड़ | 68.00 लाख | -14.50% |
| 7 | दिल्ली | 1.57 करोड़ | 1.05 करोड़ | 51.50 लाख | -32.80% (सबसे अधिक %) |
| 8 | बिहार | 7.89 करोड़ | 7.42 करोड़ | 47.00 लाख | -5.95% |
| 9 | मध्य प्रदेश | 5.74 करोड़ | 5.39 करोड़ | 34.25 लाख | -5.96% |
| 10 | राजस्थान | 5.46 करोड़ | 5.15 करोड़ | 31.00 लाख | -5.70% |
| 11 | हरियाणा | 2.01 करोड़ | 1.73 करोड़ | 28.00 लाख | -13.90% |
| 12 | छत्तीसगढ़ | 2.12 करोड़ | 1.87 करोड़ | 25.00 लाख | -11.80% |
| 13 | पंजाब | 2.14 करोड़ | 1.89 करोड़ | 25.00 लाख | -11.60% |
| 14 | ओडिशा | 3.33 करोड़ | 3.16 करोड़ | 17.00 लाख | -5.10% |
| 15 | कर्नाटक | 5.38 करोड़ | 5.27 करोड़ | 11.00 लाख | -2.04% |
| 16 | केरल | 2.78 करोड़ | 2.69 करोड़ | 9.00 लाख | -3.24% |
| 17 | उत्तराखंड | 83.70 लाख | 75.80 लाख | 7.90 लाख | -9.44% |
| 18 | गोवा | 11.85 लाख | 10.57 लाख | 1.28 लाख | -10.80% |
| 19 | पुडुचेरी | 10.21 लाख | 9.44 लाख | 77,000 | -7.54% |
| 20 | अंडमान एवं निकोबार | 3.10 लाख | 2.58 लाख | 52,000 | -16.60% |
| 21 | लक्षद्वीप | 57,000 | 56,794 | 206 | -0.35% (सबसे कम %) |





















