दिल्ली: प्रदूषण कम करने के लिए EDMC कर रही है वाटर स्प्रे, जानें आखिर कहां से और कैसे आता है पानी
पूर्वी दिल्ली नगर निगम प्रदूषण को कम करने के लिए पानी का छिड़काव (वाटर स्प्रे) कर रही है. दरअसल ट्रीटेड इंडस्ट्रियल वेस्ट वॉटर यानी कारखानों से निकले गंदे पानी को साफ कर इसे स्प्रे किया जा रहा है. ये पानी पेड़ों और जमीन को नुकसान नहीं पहुंचाता.

नई दिल्ली: दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के लिए अलग अलग वजहें हैं, इसमें से एक वजह इंडस्ट्री भी है लेकिन अब यही इंडस्ट्री प्रदूषण को कम करने के काम आ रही है. पूर्वी दिल्ली नगर निगम इंडस्ट्रियल वॉटर वेस्ट को साफ कर इस पानी को छिड़काव के लिए इस्तेमाल कर रही है. पूर्वी दिल्ली नगर निगम में इन दिनों एक खास ट्रक के जरिए पानी का छिड़काव किया जा रहा है. पानी का ये छिड़काव प्रदूषण को कम करने के लिए किया जा रहा है.
खास डिजाइन वाले 40 ट्रक बनवाए हैं
खास तरह के ट्रक से तेज़ पानी निकलता है जिससे ज़मीन और हवा में फैले धूल मिट्टी के कण बैठ जाते हैं और प्रदूषण कुछ हद तक कम होता. पूर्वी दिल्ली नगर निगम ने ऐसे खास डिजाइन वाले 40 ट्रक बनवाए हैं जिससे पूरी पूर्वी और उतर पूर्वी दिल्ली में पानी का छिड़काव किया जाता है. खास बात ये है कि जिस पानी का इस्तेमाल छिड़काव के लिए किया जा रहा है वो दरसअल ट्रीटेड इंडस्ट्रियल वेस्ट वॉटर यानी कारखानों से निकले गंदे पानी को साफ किया हुआ पानी है.
गंदे पानी को साफ किया जाता है
दिल्ली के इंडस्ट्रियल वेस्ट वॉटर को CETP यानी कॉमन एफुलेंट ट्रीटमेंट प्लांट के जरिए इस्तेमाल करने लायक बनाया जाता है. सीईटीपी भी एक तरह का ट्रीटमेंट प्लांट जिसमे गंदे पानी को ट्रीट यानी साफ किया जाता है लेकिन ये इंडस्ट्रियल वॉटर वेस्ट यानी कारखानों से निकलने वाले गंदे पानी जिसमें कई केमिकल होते है. ये कॉमन एफूलेंट ट्रीटमेंट प्लांट इंडस्ट्रियल वॉटर वेस्ट से ये सारी गंदगी निकाल कर इसे साफ करता है. इतना साफ की इसका इस्तेमाल किया जा सके. सीईटीपी के संचालक और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड के सदस्य डॉ अनिल गुप्ता के मुताबिक ये CETP में ट्रीट हुआ पानी है. ट्रीट किया हुआ पानी इंसानों के पीने और नहाने लायक नहीं होता लेकिन इसे बागबानी, निर्माण और कई तरह के काम में इस्तेमाल में लाया जा सकता है. वहीं ये पानी पेड़ो और ज़मीन को नुकसान नहीं पहुंचता है.
पानी को कैसे साफ किया जाता है
कॉमन एफुलेंट ट्रीटमेंट प्लांट काम फैक्ट्री से निकालनेवाले दूषित पानी को साफ करना होता है. ये काम कैसे होता है ये जानने के लिए एबीपी न्यूज़ की टीम झिलमिल इंडस्ट्रियल एरिया में बने एक सीईटीपी पहुंची. इसमें झिलमिल इंडस्ट्रियल एरिया का सारा इंडस्ट्रियल वॉटर वेस्ट आता है. पूरे इंडस्ट्रियल एरिया में पाइप लाइन के जरिए सीईटीपी में पानी लाया जाता है. इसके बाद पंप के जरिए पानी को इक्विलाइजेशन के लिए लाया जाता है यानी साफ करने की प्रक्रिया शुरू होती है. पहले इसमें अलम यानी फिटकरी मिलाई जाती है. फिर इसके बाद पोली इलेक्ट्रोलाइट डोस्जिंग की जाती है जिसे गंदगी नीचे बैठ जाए और फिर पानी में ब्लीचिंग सॉल्यूशन मिलाया जाता है. इसके आखिरी में टैरिट्री ट्रीटमेंट किया जिसमें एक्टिवेटेड कार्बन को गुजारते है. इसके बाद पानी मौजूद थोड़ी बहुत गंदगी जैसे डस्ट या कीचड़ पूरी तरह हट जाता है. इसके बाद जो पानी मिलता है उसका इस्तेमाल किया जा सकता है.
एक दिन में 80 लाख इंडस्ट्रियल वाटर वेस्ट का ट्रीटमेंट होता है
ये प्लांट एक दिन में 80 लाख इंडस्ट्रियल वाटर वेस्ट को ट्रीट करता है. यानी इंडस्ट्रियल वाटर वेस्ट को साफ करता है. इस प्लांट से PWD बागबानी के लिए पानी लेता है. लेकिन अब 200 टैंकर पानी देने की कैपेसिटी होने के बावजूद सिर्फ 30-35 टैंकर ही पानी लिया जाता था. वहीं बाकी पानी नाले में छोड़ दिया जाता है.
एक साल पहले इस पानी के इस्तेमाल के बारे में सोचा गया
पूर्वी दिल्ली नगर निगम इन दिनों इसी पानी से पूरे पूर्वी और उत्तर पूर्वी दिल्ली में पानी का छिड़काव कर रही है. इस पूर्वी दिल्ली के स्टैंडिंग कमेटी अध्यक्ष संदीप कपूर ने एबीपी न्यूज़ से कहा कि एक साल पहले इस पानी के इस्तेमाल के बारे में सोचा गया और इसके खास तैयारी भी की गई. वहीं इसके लिए केंद्र से आए स्वच्छ भारत फंड से 40 ट्रक तैयार की गई जिसे खास छिड़काव के लिए डिजाइन किया गया.
मुफ्त में दिया जाता है पानी
वहीं अब पूर्वी दिल्ली नगर रोजान 40 ट्रक दो बार पानी लेती है यानी तकरीबन 10 लाख लीटर पानी. इसके अलावा बागबानी के लिए भी पानी लिया जाता है. वहीं ये पानी मुफ्त में दिया जाता है. इसे ना सिर्फ पैसों की बचत हो रही है बल्कि साफ और पीने के पानी की बचत भी हो रही है. वहीं ये पानी प्रदूषण से लड़ने में भी काम आ रहा है.
यह भी देखें
Source: IOCL























