कोलकाता बैंक घोटालाः 2,672 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले में ED की कार्रवाई, एक शख्स गिरफ्तार
Kolkata Bank Scam: ED ने कहा कि ये पूरी डील एक रिलेटेड पार्टी ट्रांसफर थी, यानी अपनी ही जुड़ी हुई कंपनियों के बीच लेन-देन दिखाया गया ताकि प्रोजेक्ट की असली वैल्यू छिपाई जा सके.

प्रवर्तन निदेशालय की कोलकाता जोनल टीम ने एक बड़े बैंक फ्रॉड मामले में कार्रवाई करते हुए 40 साल के प्रत्युष कुमार सुरेका को गिरफ्तार किया है. ये गिरफ्तारी शुक्रवार (16 जनवरी, 2026) को मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत हुई.
ये मामला श्री गणेश ज्वेलरी हाउस (इंडिया) लिमिटेड से जुड़े बैंक धोखाधड़ी से संबंधित है. ED की जांच CBI की उस FIR के आधार पर शुरू हुई थी, जो 12 जुलाई, 2016 को दर्ज हुई थी. FIR में श्री गणेश ज्वेलरी हाउस और उसके प्रमोटरों पर 25 बैंकों के समूह (कंसोर्टियम) से 2,672 करोड़ की धोखाधड़ी करने का आरोप है.
जांच में क्या हुआ खुलासा?
जांच में सामने आया कि साल 2011–12 के दौरान ज्वेलरी कारोबार के लिए लिए गए बैंक लोन को असली बिजनेस में लगाने की बजाय सोलर पावर प्रोजेक्ट में घुमा दिया गया. ये पैसा Alex Astral Power Pvt. Ltd. और उससे जुड़ी कंपनियों में लगाया गया, जहां प्रत्युष कुमार सुरेका को 24 अप्रैल, 2012 को जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर बनाया गया था.
ED के मुताबिक, करीब 400 करोड़ की लागत वाला सोलर प्रोजेक्ट, जिसमें 120 करोड़ इक्विटी और 280 करोड़ बैंक फाइनेंस शामिल था. उसको फर्जी तरीके से 20 करोड़ से भी कम में बेच दिया गया. ये ट्रांसफर सुरेका के नियंत्रण वाली कंपनियों में शेम इन्वेस्टमेंट एग्रीमेंट के जरिए किया गया, यानी कागजों में ऐसा दिखाया गया जैसे असली निवेश हो, लेकिन असल में ये प्लान बैंकों को धोखा देने के लिए था.
अपनी ही कंपनियों के बीच लेन-देन दिखाया
ED ने कहा कि ये पूरी डील एक रिलेटेड पार्टी ट्रांसफर थी, यानी अपनी ही जुड़ी हुई कंपनियों के बीच लेन-देन दिखाया गया ताकि प्रोजेक्ट की असली वैल्यू छिपाई जा सके और बैंक को भारी नुकसान हो. जांच में ये भी पाया गया कि सुरेका शुरुआत से ही इस सोलर प्रोजेक्ट के ऑपरेशन और मैनेजमेंट में शामिल थे. उनकी खुद की नेटवर्थ बहुत कम थी, लेकिन फिर भी सैकड़ों करोड़ की संपत्तियां सर्कुलर ट्रांजैक्शन, एंट्री ऑपरेटर, फर्जी डॉक्यूमेंट और जटिल कंपनी स्ट्रक्चर के जरिए उनके नियंत्रण में पहुंच गई.
इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से ED को ये भी पता चला कि कागजों पर सोलर प्रोजेक्ट की फर्जी बिक्री दिखाने के बावजूद, श्री गणेश ज्वेलरी हाउस के प्रमोटर निलेश पारेख को कई वर्षों तक उसी प्रोजेक्ट से कैश मिलता रहा, यानी धोखाधड़ी से कमाया पैसा छिपाकर इस्तेमाल किया जा रहा था, जो PMLA की धारा 3 के तहत मनी लॉन्ड्रिंग माना जाता है.
आरोपी प्रत्युष सुरेका पर क्या लगे आरोप
ED के मुताबिक, प्रत्युष सुरेका पर ये आरोप लगे हैं कि उन्होंने फर्जी बोर्ड रेज़ोल्यूशन तैयार किए, एग्रीमेंट्स को बैकडेट किया (यानी पुरानी तारीख में दिखाया), डिजिटल सिग्नेचर का गलत इस्तेमाल किया, डमी डायरेक्टर्स नियुक्त किए, कंपनी रिकॉर्ड फर्जी तैयार किया. इसके अलावा Alex Astral Power Pvt. Ltd. और अन्य ग्रुप कंपनियों के फंड्स को फर्जी लोन, झूठे खर्च और सर्कुलर ट्रांजैक्शन्स के जरिए सुरेका और उनके परिवार की कंपनियों में भेजा गया, जिससे काला धन सफेद दिखाया जा सके.
जांच में आरोपी नहीं कर रहा था सहयोग
ED के मुताबिक, कई बार नोटिस भेजने के बावजूद प्रत्युष सुरेका जांच में सहयोग नहीं कर रहा था और विदेश भागने की कोशिश कर रहा था. 5 जनवरी, 2026 को उसे कोलकाता एयरपोर्ट पर थाईलैंड जाने की कोशिश करते हुए लुकआउट सर्कुलर के आधार पर रोका गया. ED ने उसकी गिरफ्तारी इसलिए की, क्योंकि वो जांच में टालमटोल कर रहा था, सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका थी और गवाहों को प्रभावित करने का खतरा था. विदेश भागने की कोशिश हो रही थी. अपराध की आय को लगातार ठिकाने लगाने की कोशिश चल रही थी. फिलहाल ED इस पूरे मामले की जांच कर रही है.
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Source: IOCL























