COVID-19 के कारण विदेश में फंसे भारतीयों को स्वदेश लाने के लिए नौसेना ने ऑपरेशन 'समुद्र-सेतु' किया लॉन्च
नौसेना के प्रवक्ता, कमांडर विवेक मधवाल के मुताबिक, कोरोना वायरस महामारी फैलने के कारण भारत सरकार विदेशों में फंसे भारतीयों को वापस लाना चाहती है.

नई दिल्ली: मालद्वीप में फंसे करीब एक हजार भारतीयों को स्वदेश वापस लाने के लिए भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन 'समुद्र-सेतु' लॉन्च कर दिया है. ऑपरेशन के तहत नौसेना के दो बड़े युद्धपोत 8 मई यानी शुक्रवार से भारतीयों को लेकर वापसी शुरू कर देंगे.
नौसेना के प्रवक्ता, कमांडर विवेक मधवाल के मुताबिक, कोरोना वायरस महामारी फैलने के कारण भारत सरकार विदेशों में फंसे भारतीयों को वापस लाना चाहती है. इसके लिए सरकार ने नौसेना को जरूरी इंतजाम करने का निर्देश दिया है. कमांडर मधवाल के मुताबिक, इसी के तहत नौसेना ने ऑपरेशन समुद्र-सेतु यानि समंदर में युद्धपोतों के जरिए ब्रिज यानी पुल बनाने का निर्णय लिया है.
जानकारी के मुताबिक, समुद्र सेतु ऑपरेशन के पहले चरण के लिए मालद्वीप से भारतीयों को लाने के लिए नौसेना ने अपने दो बड़े युद्धपोत, आईएनएस जलाश्व और आईएनएस मगर को मालद्वीप की राजधानी माले रवाना कर दिया है. माले से वापस लौटने का सिलसिला 8 मई से शुरू हो जाएगा.
माले स्थित भारतीय हाई कमीशन फंसे हुए भारतीयों की लिस्ट तैयार कर रहा है और इसके तहत पहले चरण में करीब एक हजार भारतीय वापस लाए जाएंगे. लेकिन वापस आने वाले भारतीयों को जरूरी मेडिकल स्क्रीनिंग होने के बाद ही भारत भेजा जाएगा.
नौसेना के प्रवक्ता के मुताबिक, माले से सभी भारतीयों को कोच्चि (केरल) लाया जाएगा. दोनों ही युद्धपोत में क्रू और लोगों के लिए जरूरी राशन और दूसरा सामान मौजूद है. दोनों ही युद्धपोत में स्वास्थय-सुविधाएं मौजूद है और सोशल-डिस्टेंशिंग सहित कोरोना वायरस से जुड़े सभी प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा. माले से कोच्चि की दूरी करीब 900 किलोमीटर है.
आपको बता दें कि जिन दो युद्धपोतों को मालद्वीप भेजा गया है वे दोनों ही एम्फीबियस जहाज हैं. यानि समंदर के साथ साथ ये जमीन पर आ सकते हैं. इन दोनों युद्धपोतों को नौसेना एम्फीबियस ऑपरेशन के लिए इस्तेमाल करती है. दोनों में हेलीकॉप्टर लैंडिग स्ट्रीप होती है और युद्ध के दौरान टैंक, आईसीवी व्हीकल्स और सैनिकों को लाने ले जाना का काम करते हैं. दोनों युद्धपोतों में कम से कम पांच सौ सैनिक (या सिविलयन) को ले जा सकता है (क्रू के अलावा). आईएनएस मगर तो 80 के दशक में श्रीलंका में ऑपरेशन पवन के दौरान भारतीय सैनिकों को पहुंचाने के काम आया था.
गौरतलब है कि शुक्रवार को ही नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीस सिंह ने कहा था कि भारतीय नौसेना विदेशों में फंसे भारतीयों को लाने के लिए पूरी तरह से तैयार है. वायुसेना प्रमुख आर के एस भदौरिया ने भी कहा था कि करीब 30 विमान पूरी तरह से तैयार हैं भारतीयों को वापस लाने के लिए. दोनों सैन्य प्रमुखों ने कहा था कि उन्हें सरकार के निर्देश का इंतजार है.
समुद्र सेतु भारतीय नौसेना का हाल के सालों में तीसरा बड़ा ऑपरेशन है जब फंसे हुए भारतीयों को विदेश से वापस लाया जाएगा. वर्ष 2015 में नौसेना ने यमन में हुए गृहयुद्ध के दौरान ऑपरेशन राहत लांच किया था. वर्ष 2006 में भी लेबनान से भारतीयों और दूसरे दक्षिण एशियाई नागरिकों को निकालने के लिए ऑपरेशन सुकून लांच किया था.
Source: IOCL

























